
जब एक बाल प्रभावक ने मंत्री से पूछा: सोशल मीडिया पर प्रतिबंध क्यों?
दुनिया भर में बच्चों के स्क्रीन समय, डेटा प्रोफाइलिंग और गुमनामी के अधिकार को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं, जबकि सरकारें प्रतिबंधों और कानूनों के ज़रिए संतुलन साधने की कोशिश कर रही हैं।
अबू धाबी के अमीरात टावर्स में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच कुछ बच्चे भी बैठे थे। उनमें से एक के सोशल मीडिया पर चार लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। तभी एक बच्चे ने संयुक्त अरब अमीरात की परिवार मंत्री सना बिन्त मोहम्मद सुहैल से सीधा सवाल किया: पंद्रह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया? मंत्री का उत्तर वैज्ञानिक अध्ययनों और राष्ट्रीय संस्थाओं की व्यापक भागीदारी पर आधारित था—एकमात्र मानदंड बच्चे का हित था। यह दृश्य महज एक सरकारी आयोजन नहीं था, बल्कि उस वैश्विक बदलाव का प्रतीक बन गया जिसमें बचपन और डिजिटल दुनिया के रिश्ते को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है।
यह बदलाव कई महाद्वीपों पर एक साथ दिखाई दे रहा है। ब्राज़ील में बारह साल तक के बच्चों के पास अपना मोबाइल फोन रखने की दर में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है। अभिभावक सुरक्षा—चाहे सड़क पर लूट का डर हो या साइबर बुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर असर—को प्रमुख कारण बता रहे हैं। वहाँ स्कूलों में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून 92 प्रतिशत शिक्षण संस्थानों तक पहुँच चुका है, और प्रधानाचार्यों के अनुसार कक्षा में ध्यान, सामाजिक मेलजोल और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दूसरी ओर, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की घोषणा की है, जबकि इंडोनेशिया के शोधकर्ताओं ने दो साल से छोटे बच्चों को किसी भी स्क्रीन से दूर रखने की सिफारिश की है—उनका व्यवस्थित अवलोकन बताता है कि इस उम्र में स्क्रीन का संपर्क भाषा विकास को सीमित करता है, माता-पिता से जुड़ाव घटाता है और अति-उत्तेजना का खतरा बढ़ाता है।
लेकिन यह तस्वीर सिर्फ प्रतिबंधों की नहीं है। मलेशिया और सिंगापुर के अभिभावकों पर किए गए एक अध्ययन में 'शेयरेंटिंग' की उलझन सामने आई—माता-पिता पारिवारिक उपलब्धियाँ साझा कर सामुदायिक जुड़ाव और मान्यता चाहते हैं, फिर भी 74 प्रतिशत इस बात से चिंतित हैं कि तकनीकी कंपनियाँ उनके बच्चों के डेटा का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर विकसित करने में कर रही हैं, और 73 प्रतिशत मानते हैं कि प्लेटफ़ॉर्म बच्चों की ऑनलाइन प्रोफाइलिंग कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में यहूदी समुदाय की निराशा एक अलग पहलू उजागर करती है: सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए 'डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर' कानून अभी भी अठारह महीने दूर है, और गुमनाम खातों से होने वाले उत्पीड़न को रोकने की कोशिशों और वैध गुमनामी के अधिकार—जैसे घरेलू हिंसा से बचे लोगों या व्हिसलब्लोअर्स के लिए—के बीच एक नाजुक संतुलन साधा जाना बाकी है।
इन सबके बीच, अभिभावकों और समाज की प्रतिक्रिया धीरे-धीरे आकार ले रही है। ब्राज़ील के स्कूल प्रांगणों में बच्चों की आपसी बातचीत और खेल वापस लौट रहे हैं, और शिक्षक राहत महसूस कर रहे हैं। एशियाई देशों में माता-पिता अब 'सोच-समझकर शेयर करने' की रणनीति अपना रहे हैं, बच्चों की डिजिटल छाप को सीमित करने के लिए अधिक सतर्क हो रहे हैं। अमीरात की उस ब्रीफिंग में मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह तकनीक के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की सबसे संवेदनशील उम्र में संतुलन लाने की कोशिश है। उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय परियोजना बताया—ऐसा निवेश जो इंसान से शुरू होता है।
उस दिन अबू धाबी में, चार लाख फॉलोअर्स वाला बच्चा अपनी सीट पर वापस जा बैठा। उसके सवाल का जवाब उसे मिल चुका था, लेकिन वह सवाल हवा में गूँजता रहा—एक ऐसी दुनिया में जहाँ बचपन अब स्क्रीन की चमक और आँखों की नमी के बीच अपनी जगह तलाश रहा है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
Social platforms must be regulated with clear laws and severe penalties for child exploitation.
It leverages statistical data and judicial cases to demonstrate the urgency of legislative intervention.
Society must redefine childhood as a protected space, away from the logic of digital profit.
It uses philosophical language and cultural references to elevate the debate to a universal principle.
Families and the state must safeguard Islamic values and protect children from the moral deviations of social media.
It appeals to religious authority and tradition to legitimize regulation as a moral duty.
The government must counter foreign influence that corrupts youth, while the opposition exploits the issue to attack those in power.
It personalizes the debate by blaming specific political figures, turning the issue into a partisan clash.
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