
विश्व कप से बाहर होते ही स्कॉटलैंड कोच क्लार्क का इस्तीफ़ा, सात साल का सफ़र ख़त्म
क्रोएशिया के हाथों घाना की हार ने स्कॉटलैंड की उम्मीदें ख़त्म कीं, जिसके कुछ ही पलों बाद सबसे सफल कोच स्टीव क्लार्क ने पद छोड़ दिया।
रविवार तड़के क्रोएशिया ने घाना को 2-1 से हराकर स्कॉटलैंड के विश्व कप सफ़र का गणितीय अंत कर दिया। यह नतीजा ग्रुप-एल से आया, लेकिन इसकी गूँज अमेरिका के चार्लोट शहर में स्कॉटलिश शिविर तक पहुँची, जहाँ टीम पहले ही ग्रुप-सी में तीसरे स्थान पर रहते हुए बाहर होने की कगार पर थी। स्कॉटलैंड ने अपना अभियान हैती पर 1-0 की जीत से शुरू किया था, लेकिन इसके बाद मोरक्को से 0-1 और ब्राज़ील से 0-3 की हार ने उसे केवल तीन अंक और -3 के गोल अंतर के साथ बेहतरीन आठ तीसरे स्थान की टीमों में शामिल होने के दायरे से लगभग बाहर कर दिया था। क्रोएशिया की जीत ने आख़िरकार वह उम्मीद भी ख़त्म कर दी।
नतीजा आने के एक घंटे के भीतर ही मुख्य कोच स्टीव क्लार्क ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। 62 वर्षीय क्लार्क ने खिलाड़ियों के नाम एक भावुक खुले पत्र में लिखा, “इस अलविदाई का सबसे भावनात्मक हिस्सा मेरे खिलाड़ियों के लिए है, जिनके बिना हमारे पास 2019 से अब तक की कोई यादें नहीं होतीं। वे सभी प्रशंसा और प्यार के हक़दार हैं और मेरे लिए उनका कोच कहलाना सचमुच सम्मान की बात थी।” हैरान करने वाली बात यह रही कि उन्होंने महज़ एक महीने पहले ही 2030 तक का नया करार किया था।
क्लार्क का सात साल का कार्यकाल स्कॉटिश फ़ुटबॉल के पुनर्जागरण का प्रतीक रहा। 2019 में जब उन्होंने पदभार संभाला, तब स्कॉटलैंड 1998 के बाद किसी बड़े टूर्नामेंट के लिए क्वालीफ़ाई नहीं कर पाया था। उनकी अगुआई में टीम ने लगातार दो यूरोपीय चैंपियनशिप (2020 और 2024) और 28 साल बाद पहली बार विश्व कप (2026) में जगह बनाई। स्कॉटिश एफ़ए के मुख्य कार्यकारी इयान मैक्सवेल ने कहा कि टीम चौथी पॉट से उठकर क्वालीफ़ाइंग ग्रुप में शीर्ष पर पहुँची—यह प्रगति निर्विवाद है। हालाँकि, तीनों बड़े टूर्नामेंटों के फ़ाइनल में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा; एकमात्र जीत हैती के ख़िलाफ़ ही आ सकी।
ब्राज़ील के सामने रक्षात्मक ग़लतियों ने अंतिम-32 की राह लगभग बंद कर दी थी, और फिर अन्य समूहों के नतीजों ने बची-खुची संभावनाएँ भी ख़त्म कर दीं। अमेरिकी मैदानों पर ‘टार्टन आर्मी’ के हज़ारों समर्थकों ने शोर और रंग बिखेरे, लेकिन मैदान पर टीम उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। अब स्कॉटिश एफ़ए नए कोच की तलाश शुरू करेगी, जिसका लक्ष्य 2028 में ब्रिटेन-आयरलैंड की सह-मेज़बानी वाली यूरो और 2030 विश्व कप क्वालीफ़ाइंग में टीम को और मज़बूत करना होगा।
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