
अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से तेल कीमतों में गिरावट, भारत को आपूर्ति की उम्मीद
स्विट्जरलैंड में पहले दौर की वार्ता के बाद ईरान को तेल निर्यात छूट मिलने और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बहाल होने से ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की उच्च-स्तरीय वार्ता संपन्न हुई। ब्रेंट क्रूड का भाव 1.9 प्रतिशत गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि सत्र के आरंभ में यह 82.30 डॉलर तक पहुंच गया था। यह गिरावट ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि तेहरान ने कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट, कुछ जमे हुए संसाधनों की रिहाई और एक पुनर्निर्माण योजना की शुरुआत सुनिश्चित कर ली है। इससे वैश्विक आपूर्ति की कमी की आशंकाओं को कम करने में मदद मिली।
कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में रविवार से शुरू हुई यह वार्ता अप्रैल में हुए युद्धविराम को कम से कम 60 दिनों के लिए बढ़ाने वाली समझौता ज्ञापन के तहत हुई। मध्यस्थों के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए 'संचार लाइन' स्थापित करने पर सहमति जताई। इस जलडमरूमध्य से सामान्य समय में वैश्विक तेल और गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है। सोमवार को कुछ जहाजों की आवाजाही बहाल हुई, जिनमें भारत के लिए उर्वरक लेकर जा रहे 12 जहाज भी शामिल थे, जो नाकेबंदी के कारण फंसे हुए थे। ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के प्रमुख के अनुसार, पिछले सप्ताह से 2.5 करोड़ बैरल से अधिक ईरानी तेल नाकेबंदी रेखा पार कर चुका है।
क्षेत्रीय उत्पादकों ने भी आपूर्ति बढ़ाने के संकेत दिए हैं। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक ने पिछले सप्ताह ग्राहकों को अतिरिक्त तेल की पेशकश की, और इराक ने अपना उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ाकर 42-43 लाख बैरल प्रति दिन करने की योजना बनाई है। हालांकि, यूरोपीय बैंक आईएनजी के विश्लेषकों ने आगाह किया कि 60-दिवसीय युद्धविराम के दौरान शत्रुता फिर से भड़कने के 'बहुत वास्तविक जोखिम' बने हुए हैं, विशेषकर दक्षिणी लेबनान में जहां इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव जारी है। शनिवार को इजरायली हमलों में कम से कम 20 लोग मारे गए। भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक के लिए, होर्मुज में आवाजाही की बहाली और ईरानी तेल की संभावित वापसी से आयात लागत और आपूर्ति सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अगला कदम इस सप्ताह शुरू होने वाली तकनीकी वार्ता है, जिसका लक्ष्य 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने का रोडमैप तैयार करना है। बाजार की निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात की बहाली पर रहेंगी, जिसे कूटनीतिक प्रगति का सूचक माना जा रहा है। इसके अलावा, इस सप्ताह अमेरिकी पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़े और ब्राजील के केंद्रीय बैंक की बैठक का विवरण भी आने वाला है, जो व्यापक वित्तीय बाजारों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद, तेहरान द्वारा कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट प्राप्त करने की घोषणा से तेल की कीमतें गिर गईं, जिससे आपूर्ति की चिंताएँ कम हुईं। शुरुआती उछाल ट्रंप की धमकियों और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण था, लेकिन कूटनीतिक सफलता ने बाजार में शांति ला दी।
स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता समाप्त होने के बाद सोमवार को तेल की कीमतें गिर गईं, ब्रेंट 80 डॉलर से नीचे आ गया। तेहरान द्वारा निर्यात छूट प्राप्त करने की घोषणा ने वैश्विक आपूर्ति व्यवधान की चिंताओं को कम किया। तनाव और धमकियों के बीच कीमतें पहले बढ़ी थीं, लेकिन वार्ता के बाद निचले स्तर पर आ गईं।
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