
ईरान का सपना VAR ने तोड़ा, मिस्र ने पहली बार विश्व कप नॉकआउट में बनाई जगह
स्टॉपेज टाइम में शोजा खलीलज़ादेह का गोल ऑफसाइड करार, ईरान को तीसरे स्थान की उम्मीदों पर छोड़ा; मिस्र ऑस्ट्रेलिया से भिड़ेगा।
सिएटल के ल्यूमन फील्ड में शनिवार तड़के खेले गए ग्रुप जी के निर्णायक मुकाबले में ईरान और मिस्र 1-1 की बराबरी पर रुके, लेकिन असली नाटक चोट के समय में हुआ। 93वें मिनट में शोजा खलीलज़ादेह ने गोल कर ईरानी बेंच और प्रशंसकों को जश्न में डुबो दिया, मगर वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की लंबी समीक्षा के बाद रेफरी ने ऑफसाइड का झंडा खड़ा कर दिया। विश्लेषण के अनुसार, खलीलज़ादेह गोल करने के क्षण में नहीं, बल्कि उससे पहले मोहम्मद क़ोरबानी के शॉट के वक्त ऑफसाइड थे, क्योंकि मिस्र के गोलकीपर मुस्तफ़ा शोबीर आगे निकल आए थे और सिर्फ एक डिफेंडर पीछे रह गया था। इससे पहले मेहदी तारेमी का हेडर क्रॉसबार से टकराया था, और ईरान की किस्मत एक बार फिर तकनीकी बारीकी में उलझ गई।
मैच की शुरुआत बेहद तेज़ रही। पांचवें मिनट में मोहम्मद सलाह के शॉट को ईरानी गोलकीपर अलीरेज़ा बेरानवंद ठीक से पकड़ नहीं पाए और महमूद साबेर ने गेंद को पैरों के बीच से निकालकर मिस्र को बढ़त दिला दी। ईरान को नौवें मिनट में पेनल्टी मिली जब मोहम्मद अब्देलमोनेम ने तारेमी को गिराया, लेकिन तारेमी का कमज़ोर शॉट शोबीर ने बचा लिया। हालांकि, 14वें मिनट में मिलाद मोहम्मदी के शॉट को शोबीर ने रोका तो रिबाउंड पर रामिन रज़ाईयान ने बेहद तंग कोण से गेंद को जाल में पहुंचाकर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने मौके बनाए, लेकिन दूसरे हाफ में मिस्र ने अधिक नियंत्रण रखा और सलाह को 57वें मिनट में बाहर बैठा दिया गया, जिसके बाद वे बर्फ से जांघ सेंकते नज़र आए।
यह मुकाबला कई स्तरों पर ऐतिहासिक रहा। मिस्र ने अपने चार विश्व कप अभियानों में पहली बार नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। कोच होसाम हसन ने कहा कि खिलाड़ियों ने जीत की प्रबल इच्छा दिखाई और यह सामूहिक संघर्ष का नतीजा है। दूसरी ओर, ईरान लगातार तीसरे ड्रॉ के बाद तीन अंकों के साथ ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा और अब उसे सर्वश्रेष्ठ आठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह पाने के लिए दूसरे ग्रुपों के नतीजों पर निर्भर रहना होगा। ईरानी मीडिया ने इसे ‘बदकिस्मती’ और ‘VAR का श्राप’ बताया, जबकि मिस्र के अख़बारों ने राहत और ऐतिहासिक उपलब्धि पर जोर दिया।
मैदान के बाहर भी यह मुकाबला चर्चा में रहा। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते ईरानी टीम को मेक्सिको के तिजुआना में बेस बनाना पड़ा और वीज़ा शर्तों के तहत मैच से ठीक पहले ही अमेरिका में प्रवेश दिया गया तथा खेल के दिन ही लौटना अनिवार्य था। स्थानीय आयोजकों ने इस खेल को ‘प्राइड मैच’ का नाम दिया था, और स्टेडियम में इंद्रधनुषी झंडे भी नज़र आए, हालांकि मैदान पर कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
अब मिस्र का सामना 3 जुलाई को डलास में ऑस्ट्रेलिया से होगा, जबकि ईरान की निगाहें क्रोएशिया, अल्जीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के मैचों पर टिकी हैं। यदि इनमें से कोई भी टीम जीत दर्ज कर चार अंकों तक पहुंचती है, तो ईरान का सफर समाप्त हो जाएगा। दक्षिण एशियाई संदर्भ में, यह मुकाबला इस बात का प्रतीक बन गया कि कैसे तकनीकी हस्तक्षेप और भू-राजनीतिक पाबंदियां खेल के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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यह मुकाबला अंतिम-32 में जगह बनाने की सीधी लड़ाई थी। मिस्र को केवल ड्रॉ की जरूरत थी, उसने साबेर के गोल से बढ़त बनाई, जबकि ईरान ने तारेमी से पेनल्टी गंवा दी। 1-1 की बराबरी ने फैरोज़ को अगले दौर में पहुंचा दिया और ईरान को दूसरे मैच के नतीजे का इंतजार रहा।
स्थानीय प्रशासन द्वारा इसे एलजीबीटीआई+ प्राइड दिवस घोषित करने के फैसले से घिरे इस मुकाबले में मिस्र और ईरान ने विवादों के बीच तनावपूर्ण ड्रॉ खेला। तारेमी का चूका पेनल्टी निर्णायक पल रहा, और अमेरिका-ईरान तनाव की भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि ने एक और परत जोड़ दी। मिस्र आगे बढ़ा, लेकिन मैदान के बाहर के विवाद चर्चा पर हावी रहे।
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