
हैरी केन का जादू: इंग्लैंड ने कांगो को हराया, अब एज़्टेका में मेक्सिको से महामुकाबला
इंग्लैंड 0-1 से पिछड़ने के बाद केन के दो देर के गोलों से जीता; अगला पड़ाव मेज़बान मेक्सिको के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक अज़्टेका स्टेडियम में।
अटलांटा के मर्सिडीज़-बेंज़ स्टेडियम में जब इंग्लैंड की विश्व कप उम्मीदें डूबती दिख रही थीं, कप्तान हैरी केन ने पांच मिनट के भीतर दो गोल दागकर टीम को बाहर होने से बचा लिया। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने सातवें मिनट में ब्रायन सिपेंगा के गोल से चौंका दिया था और गोलकीपर लियोनेल एमपासी बार-बार इंग्लिश आक्रमण को विफल कर रहे थे। लेकिन 75वें मिनट में एंथनी गॉर्डन के क्रॉस पर केन के हेडर ने बराबरी दिलाई, और 86वें मिनट में उन्होंने पेनल्टी एरिया के बाहर से ज़ोरदार शॉट लगाकर 2-1 की नाटकीय जीत पक्की कर दी। यह पहला मौक़ा था जब 1986 के बाद इंग्लैंड ने विश्व कप में हाफ़टाइम तक पिछड़ने के बाद वापसी की।
मुक़ाबला शुरू से ही इंग्लैंड के लिए कठिन रहा। सिपेंगा ने बाएं छोर से जॉर्डन पिकफ़ोर्ड को नज़दीकी पोस्ट पर छकाते हुए कांगो को बढ़त दिला दी। इसके बाद इंग्लैंड ने क़ब्ज़ा बनाए रखा और जूड बेलिंगहम के दो हेडर, मार्कस रैशफ़ोर्ड का शॉट और ख़ुद केन का वॉली एमपासी ने बचा लिए। एरॉन वान-बिसाका ने गोललाइन से एक और प्रयास नाकाम किया, जबकि दूसरी ओर योआने विसा का शॉट पोस्ट से टकराकर कांगो की बढ़त दोगुनी होने से चूक गया। दूसरे हाफ़ में कोच थॉमस टूशेल ने विंगर बदले, और गॉर्डन के आते ही खेल पलटा। केन ने बाद में कहा, “हमने हीरो पलों की बात की थी—आज वह मेरा दिन था।” यह जीत इंग्लैंड की अफ़्रीकी टीमों के ख़िलाफ़ विश्व कप में लगातार दसवीं अपराजित मैच रही।
केन के इस दोहरे प्रहार ने उनके विश्व कप गोलों की संख्या 13 कर दी, जिससे वह पेले (12) को पीछे छोड़कर जस्ट फोंटेन के बराबर आ गए। यह केवल दूसरा अवसर है जब इंग्लैंड ने विश्व कप मैच में पहले गोल खाने के बाद जीत दर्ज की—पहली बार 1966 का फ़ाइनल था। यूरोपीय मीडिया में केन की ‘हरिकेन’ छवि को रेखांकित किया गया, जबकि लैटिन अमेरिकी अख़बारों ने इस जीत को मेक्सिको के साथ होने वाले मुक़ाबले के चश्मे से देखा।
अब इंग्लैंड का सामना 5 जुलाई को एज़्टेका स्टेडियम में सह-मेज़बान मेक्सिको से होगा। मेक्सिको ने अब तक चारों मैच जीते हैं और एक भी गोल नहीं खाया; इक्वाडोर के ख़िलाफ़ 2-0 की जीत के बाद राजधानी में दस लाख से अधिक प्रशंसक सड़कों पर उतर आए थे, हालांकि उस दौरान भगदड़ में तीन लोगों की मौत ने जश्न पर ग्रहण लगा दिया। मेक्सिको 40 साल बाद विश्व कप के पांचवें मैच में पहुंचा है, और एज़्टेका वही मैदान है जहां 1986 में माराडोना के ‘हैंड ऑफ़ गॉड’ और ‘गोल ऑफ़ द सेंचुरी’ ने इंग्लैंड को क्वार्टर फ़ाइनल से बाहर किया था। मेक्सिकन मीडिया 1966 की वेम्बली हार का बदला लेने की बात कर रहा है, जबकि अंग्रेज़ी विश्लेषक मानते हैं कि लगातार चार क्लीन शीट रखने वाली मेज़बान टीम के सामने इंग्लैंड की लय में उतार-चढ़ाव बड़ी चुनौती होगी।
इस मुक़ाबले का विजेता क्वार्टर फ़ाइनल में ब्राज़ील या नॉर्वे से भिड़ेगा। एज़्टेका की 80,000 से अधिक क्षमता वाली दहाड़ती भीड़ के बीच दोनों टीमों के लिए यह टूर्नामेंट का सबसे कठिन इम्तिहान होगा।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.50 | aligned |
England won, but the playing system raises doubts.
Technical aspects and rules are emphasized to downplay the epic nature of the comeback.
The celebratory atmosphere and Kane's individual heroism are omitted, replaced by a detached analysis of game dynamics.
Kane has shown that a single player can change a nation's destiny.
A heroic narrative is built around the player, ignoring team context and opponent weaknesses.
Tactical analysis of the match and the opponent's defensive errors are omitted, focusing solely on the individual feat.
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