
इथियोपिया में बस हादसा: 100 मीटर गहरी खाई में गिरने से 28-31 लोगों की मौत, बचाव में देरी ने बढ़ाई त्रासदी
अम्हारा क्षेत्र में यात्रियों से भरी बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से कम से कम 28 लोगों की जान चली गई, यह घटना अफ्रीका और दक्षिण एशिया में सड़क सुरक्षा की साझा चुनौतियों को रेखांकित करती है।
इथियोपिया के उत्तरी अम्हारा क्षेत्र में सोमवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना में कम से कम 28 से 31 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, डेसी शहर से राजधानी अदीस अबाबा जा रही यात्रियों से खचाखच भरी बस हारेगो 'एस' नामक घुमावदार और संकरी सड़क पर अनियंत्रित होकर 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। मरने वालों में बस चालक भी शामिल है। घायलों को डेसी और कोम्बोलचा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी और एम्बुलेंस सेवाओं के अभाव के कारण कई लोगों को सार्वजनिक वाहनों से ले जाना पड़ा, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
यह हादसा इथियोपिया की सड़क सुरक्षा के संकट को एक बार फिर उजागर करता है। अफ्रीका की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले इस देश में सड़कों का रखरखाव बेहद खराब है और वाहनों की तकनीकी स्थिति अक्सर मानकों से नीचे होती है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बचाव कार्य में हुई देरी के कारण लगभग 30 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह त्रासदी दिसंबर 2024 की उस दुर्घटना की याद दिलाती है, जब दक्षिणी सिदामा क्षेत्र में एक ट्रक नदी में गिरने से 66 से 71 लोग मारे गए थे। कुछ रिपोर्टों ने इसे पिछले 25 वर्षों में इथियोपिया की सबसे घातक बस दुर्घटना करार दिया है, हालांकि मृतक संख्या को लेकर विभिन्न स्रोतों में 28 से 31 तक का अंतर बना हुआ है।
इथियोपिया की यह घटना वैश्विक दक्षिण के कई देशों, विशेषकर दक्षिण एशिया, के लिए एक चेतावनी है। भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी पहाड़ी मार्गों पर ओवरलोडेड बसों के खाई में गिरने की घटनाएं आम हैं, जहां सड़कों की संकरी चौड़ाई, तीखे मोड़ और आपातकालीन सेवाओं की कमी जानलेवा साबित होती है। भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में डेढ़ लाख से अधिक मौतें होती हैं, और हिमालयी राज्यों में बस दुर्घटनाएं एक स्थायी चिंता हैं। इथियोपिया का हारेगो 'एस' मोड़ भारत के किश्तवाड़-अनंतनाग या नेपाल के पृथ्वी राजमार्ग जैसे खतरनाक पर्वतीय मार्गों की याद दिलाता है, जहां बुनियादी सुरक्षा उपायों का अभाव आम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की त्रासदियों का समाधान केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से निकाला जा सकता है। अफ्रीकी संघ और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) जैसे मंच सड़क सुरक्षा मानकों, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों और चालक प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकते हैं। इथियोपिया में बढ़ता भारतीय निवेश और प्रवासी समुदाय भी इस मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में प्राथमिकता देने का अवसर प्रदान करता है।
आगे की राह में, इथियोपिया सरकार को सड़क अवसंरचना के आधुनिकीकरण, वाहन फिटनेस प्रमाणन को सख्त करने और दूरदराज के इलाकों में त्वरित बचाव इकाइयां स्थापित करने की आवश्यकता है। साथ ही, यात्री जागरूकता और ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है। यह हादसा महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन नीतिगत खामियों का प्रतिबिंब है जो विकासशील देशों में रोजमर्रा की आवाजाही को जोखिम भरा बना देती हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी मीडिया इथियोपिया की बस दुर्घटना को नज़रअंदाज़ करता है और इसके बजाय त्युमेन क्षेत्र में एक स्थानीय दुर्घटना की रिपोर्ट करता है, जिसमें एक की मौत और 11 घायल हुए, राज्य आपातकालीन प्रतिक्रिया पर जोर देता है।
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस इस दुर्घटना को इथियोपिया में खराब रखरखाव वाली सड़कों और भीड़भाड़ वाली बसों का परिणाम बताती है, बचाव प्रयासों में देरी को उजागर करती है और इसे 25 वर्षों में सबसे घातक बताती है, चिंतित आलोचना के स्वर में।
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