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समाजसोमवार, 15 जून 2026

डिजिटल क्रांति का हर कोना रोशन, लेकिन भरोसे की परत दरकी

सऊदी अरब से स्वीडन तक इंटरनेट और एआई अपनाने की रफ्तार चौंकाती है, मगर धोखाधड़ी, नकली सामग्री और नौकरियों की चिंता उपभोक्ताओं के भरोसे को कमजोर कर रही है।

दुनिया के कई हिस्सों में डिजिटल बुनियादी ढांचा अब लगभग पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। सऊदी अरब की सांख्यिकी एजेंसी के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 98.1 फीसदी प्रतिष्ठानों के पास सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन है, और ई-सरकारी सेवाओं पर निर्भरता 93 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कारोबारी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल साल भर में 20 फीसदी उछल गया है। पड़ोसी ओमान की कहानी भी कम प्रभावशाली नहीं: वहां इलेक्ट्रॉनिक भुगतान गेटवे के लेन-देन 76.3 फीसदी बढ़कर 3.2 अरब रियाल तक जा पहुंचे, जबकि क्यूआर कोड भुगतान ने 133.5 फीसदी की रफ्तार पकड़ ली। यह कोई सतही लहर नहीं, बल्कि खाड़ी देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव को फिर से गढ़ने वाला भूचाल है।

लेकिन इसी तेज रोशनी के साथ भरोसे का एक गहरा संकट भी सामने आ रहा है। जॉर्डन में वीजा के अध्ययन से पता चलता है कि 80 फीसदी उपभोक्ता खरीदारी के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी केवल 16 फीसदी को एआई एजेंटों पर चेकआउट पूरा करने का भरोसा है। सोशल मीडिया पर हुई खरीदारी में 48 फीसदी लोगों ने धोखाधड़ी का सामना किया है, और बच्चों के ऑनलाइन शिकार बनने की आशंका 82 फीसदी अभिभावकों को सता रही है। यह बेचैनी केवल अरब जगत तक सीमित नहीं है। ब्राजील के एक सर्वेक्षण में 84 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे एआई से बनी छवियों पर भरोसा नहीं करते और असली लोगों द्वारा रची गई सामग्री को ज्यादा महत्व देते हैं। उत्तर यूरोपीय देश स्वीडन में तो चिंता राजनीति की सुर्खियों में है: 69 फीसदी युवा इस बात से डरे हुए हैं कि एआई उनकी नौकरी के अवसर छीन लेगा, जबकि पुलिस द्वारा संवेदनशील आंकड़ों के संग्रह को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है।

विशेषज्ञ इस दोहरे व्यवहार को समझने के लिए सोशल मीडिया के शुरुआती दौर की याद दिलाते हैं। तब उपयोगकर्ता बिना किसी हिचक के बच्चों की तस्वीरें और निजी जानकारी साझा करते थे, ठीक वैसे ही जैसे आज लोग बैंक दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड एआई असिस्टेंट के हवाले कर रहे हैं। इसका कारण व्यावहारिक है: तत्काल मिलने वाली सुविधा और उत्पादकता का लाभ, आशंका की कीमत से कहीं अधिक भारी पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे धोखाधड़ी के किस्से बढ़ रहे हैं, उपभोक्ता तेजी से यह अपेक्षा करने लगे हैं कि सुरक्षा की जिम्मेदारी अकेले उनकी नहीं हो सकती। जॉर्डन में 63 फीसदी लोग चाहते हैं कि कोई संदिग्ध गतिविधि होने पर स्वचालित अलर्ट मिले, जबकि मात्र 7 फीसदी मानते हैं कि सुरक्षा का प्राथमिक बोझ उपभोक्ता पर होना चाहिए।

यह सब एक स्पष्ट संकेत देता है: डिजिटल अर्थव्यवस्थाएं तभी टिकाऊ होंगी जब नीतियां भरोसे की इस कमी को पाटें। स्वीडन में उठी आवाज कि 'तकनीकी सवाल राजनीतिक हैं', पूरी दुनिया के लिए सबक है। सरकारों और संस्थाओं को एआई के लाभ और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए सख्त मानक और पारदर्शी प्रणालियां विकसित करनी होंगी। दक्षिण एशिया जैसे भारी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए, जहां डिजिटल भुगतान और एआई उपकरण अभी पैर पसार रहे हैं, यह चेतावनी और भी प्रासंगिक है। भविष्य में वही समाज आगे रहेंगे जो 'भरोसे' को एक कठोर मुद्रा की तरह संजोएंगे, न कि केवल तकनीकी अपनाने की गति पर इतराएंगे।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

44%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa del Golfo araboStampa europea continentale
Stampa del Golfo arabo
pragmatismodistacco

खाड़ी देशों में डिजिटल क्रांति लगभग पूरी हो चुकी है, इंटरनेट और ई-भुगतान में भारी बढ़ोतरी हुई है; फिर भी भरोसे की परत दरक रही है, खासकर जब एआई खरीदारी में दखल देता है और सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी बढ़ती है, जिससे केवल उपभोक्ता की जिम्मेदारी नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा की माँग उठ रही है।

Stampa europea continentale/ nordica
allarmescetticismo

नॉर्डिक यूरोप में डिजिटल रोशनी के पीछे भरोसे की कमी छिपी है: नागरिक उत्साह से एआई सहायकों को निजी डेटा दे रहे हैं, लेकिन बढ़ती बेचैनी राजनीतिक माँगों को जन्म देती है कि विदेशी टेक फर्मों से नियंत्रण वापस लिया जाए, जो सोशल मीडिया के शुरुआती लापरवाह दौर की याद दिलाता है।

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अपडेट 03:42 pm3 भाषाएँ · 3 स्रोत
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सोमवार, 15 जून 2026

डिजिटल क्रांति का हर कोना रोशन, लेकिन भरोसे की परत दरकी

सऊदी अरब से स्वीडन तक इंटरनेट और एआई अपनाने की रफ्तार चौंकाती है, मगर धोखाधड़ी, नकली सामग्री और नौकरियों की चिंता उपभोक्ताओं के भरोसे को कमजोर कर रही है।

दुनिया के कई हिस्सों में डिजिटल बुनियादी ढांचा अब लगभग पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। सऊदी अरब की सांख्यिकी एजेंसी के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 98.1 फीसदी प्रतिष्ठानों के पास सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन है, और ई-सरकारी सेवाओं पर निर्भरता 93 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कारोबारी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल साल भर में 20 फीसदी उछल गया है। पड़ोसी ओमान की कहानी भी कम प्रभावशाली नहीं: वहां इलेक्ट्रॉनिक भुगतान गेटवे के लेन-देन 76.3 फीसदी बढ़कर 3.2 अरब रियाल तक जा पहुंचे, जबकि क्यूआर कोड भुगतान ने 133.5 फीसदी की रफ्तार पकड़ ली। यह कोई सतही लहर नहीं, बल्कि खाड़ी देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव को फिर से गढ़ने वाला भूचाल है।

लेकिन इसी तेज रोशनी के साथ भरोसे का एक गहरा संकट भी सामने आ रहा है। जॉर्डन में वीजा के अध्ययन से पता चलता है कि 80 फीसदी उपभोक्ता खरीदारी के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी केवल 16 फीसदी को एआई एजेंटों पर चेकआउट पूरा करने का भरोसा है। सोशल मीडिया पर हुई खरीदारी में 48 फीसदी लोगों ने धोखाधड़ी का सामना किया है, और बच्चों के ऑनलाइन शिकार बनने की आशंका 82 फीसदी अभिभावकों को सता रही है। यह बेचैनी केवल अरब जगत तक सीमित नहीं है। ब्राजील के एक सर्वेक्षण में 84 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे एआई से बनी छवियों पर भरोसा नहीं करते और असली लोगों द्वारा रची गई सामग्री को ज्यादा महत्व देते हैं। उत्तर यूरोपीय देश स्वीडन में तो चिंता राजनीति की सुर्खियों में है: 69 फीसदी युवा इस बात से डरे हुए हैं कि एआई उनकी नौकरी के अवसर छीन लेगा, जबकि पुलिस द्वारा संवेदनशील आंकड़ों के संग्रह को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है।

विशेषज्ञ इस दोहरे व्यवहार को समझने के लिए सोशल मीडिया के शुरुआती दौर की याद दिलाते हैं। तब उपयोगकर्ता बिना किसी हिचक के बच्चों की तस्वीरें और निजी जानकारी साझा करते थे, ठीक वैसे ही जैसे आज लोग बैंक दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड एआई असिस्टेंट के हवाले कर रहे हैं। इसका कारण व्यावहारिक है: तत्काल मिलने वाली सुविधा और उत्पादकता का लाभ, आशंका की कीमत से कहीं अधिक भारी पड़ता है। लेकिन जैसे-जैसे धोखाधड़ी के किस्से बढ़ रहे हैं, उपभोक्ता तेजी से यह अपेक्षा करने लगे हैं कि सुरक्षा की जिम्मेदारी अकेले उनकी नहीं हो सकती। जॉर्डन में 63 फीसदी लोग चाहते हैं कि कोई संदिग्ध गतिविधि होने पर स्वचालित अलर्ट मिले, जबकि मात्र 7 फीसदी मानते हैं कि सुरक्षा का प्राथमिक बोझ उपभोक्ता पर होना चाहिए।

यह सब एक स्पष्ट संकेत देता है: डिजिटल अर्थव्यवस्थाएं तभी टिकाऊ होंगी जब नीतियां भरोसे की इस कमी को पाटें। स्वीडन में उठी आवाज कि 'तकनीकी सवाल राजनीतिक हैं', पूरी दुनिया के लिए सबक है। सरकारों और संस्थाओं को एआई के लाभ और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए सख्त मानक और पारदर्शी प्रणालियां विकसित करनी होंगी। दक्षिण एशिया जैसे भारी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए, जहां डिजिटल भुगतान और एआई उपकरण अभी पैर पसार रहे हैं, यह चेतावनी और भी प्रासंगिक है। भविष्य में वही समाज आगे रहेंगे जो 'भरोसे' को एक कठोर मुद्रा की तरह संजोएंगे, न कि केवल तकनीकी अपनाने की गति पर इतराएंगे।

स्रोतों में मतभेद

समाज · 3 स्रोत · 3 भाषाएँ

44%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र33%
निंदक67%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa del Golfo araboStampa europea continentale
Stampa del Golfo arabo
pragmatismodistacco

खाड़ी देशों में डिजिटल क्रांति लगभग पूरी हो चुकी है, इंटरनेट और ई-भुगतान में भारी बढ़ोतरी हुई है; फिर भी भरोसे की परत दरक रही है, खासकर जब एआई खरीदारी में दखल देता है और सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी बढ़ती है, जिससे केवल उपभोक्ता की जिम्मेदारी नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा की माँग उठ रही है।

Stampa europea continentale/ nordica
allarmescetticismo

नॉर्डिक यूरोप में डिजिटल रोशनी के पीछे भरोसे की कमी छिपी है: नागरिक उत्साह से एआई सहायकों को निजी डेटा दे रहे हैं, लेकिन बढ़ती बेचैनी राजनीतिक माँगों को जन्म देती है कि विदेशी टेक फर्मों से नियंत्रण वापस लिया जाए, जो सोशल मीडिया के शुरुआती लापरवाह दौर की याद दिलाता है।

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