
ब्रिटेन में मई में महंगाई दर 2.8% पर स्थिर, विशेषज्ञों के अनुमान को झुठलाया
हवाई किराए और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी से महंगाई दर स्थिर रही, बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए राहत लेकिन आगे चुनौतियाँ बरकरार।
ब्रिटेन की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर मई में अप्रत्याशित रूप से 2.8 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि अधिकांश अर्थशास्त्री और स्वयं बैंक ऑफ इंग्लैंड इसे बढ़कर 3.0 से 3.3 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान लगा रहे थे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) के अनुसार, यह स्थिरता दो विपरीत दबावों के बीच संतुलन का परिणाम रही: एक ओर मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से परिवहन क्षेत्र में 6.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई, जो दिसंबर 2022 के बाद सबसे ऊँचा स्तर है, और हवाई किराए में अकेले अप्रैल से मई के बीच 10.3 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ। दूसरी ओर, मांस, डेयरी उत्पादों, सब्ज़ियों और घरेलू हीटिंग ईंधन की कीमतों में गिरावट ने इस दबाव को काफ़ी हद तक बेअसर कर दिया।
यह आँकड़ा बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से ठीक एक दिन पहले जारी हुआ, जिससे वित्तीय बाज़ारों में तत्काल हलचल देखी गई। स्टर्लिंग डॉलर के मुक़ाबले कमज़ोर हुआ, ब्रिटिश सरकारी बॉन्ड यील्ड दो महीने के निचले स्तर पर आ गई और निवेशकों ने वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना को कम कर दिया। हालाँकि, अर्थशास्त्री आगाह कर रहे हैं कि यह राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि ऊर्जा कीमतों का दबाव आने वाले महीनों में महंगाई को फिर से ऊपर धकेल सकता है।
वैश्विक परिदृश्य में, ब्रिटेन की महंगाई पर मध्य पूर्व संघर्ष की छाया स्पष्ट दिखाई देती है। ब्रिटिश वित्त मंत्री रेचल रीव्स ने भी स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में युद्ध दुनिया भर में कीमतों को बढ़ा रहा है, लेकिन खाद्य कीमतों में नरमी ने उपभोक्ताओं को कुछ राहत दी है। यह स्थिति भारत और दक्षिण एशिया के लिए भी प्रासंगिक है, जहाँ कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता अर्थव्यवस्थाओं को बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। हालाँकि, भारत में खाद्य महंगाई का ढाँचा अलग है—यहाँ मानसून और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की भूमिका अधिक निर्णायक होती है, जबकि ब्रिटेन में वैश्विक कमोडिटी कीमतों और आयातित मुद्रास्फीति का सीधा असर पड़ता है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए यह आँकड़ा नीतिगत दुविधा को और गहराता है। एक ओर, स्थिर महंगाई दर ब्याज दरों में कटौती की माँग को बल देती है ताकि सुस्त अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके; दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र की महंगाई और मज़दूरी वृद्धि अभी भी ऊँची बनी हुई है, जो समय-पूर्व ढील के जोखिम की याद दिलाती है। आने वाले महीनों में यदि तेल की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊँची रहती हैं, तो महंगाई फिर से 3 प्रतिशत के पार जा सकती है, जिससे परिवारों के जीवन-यापन की लागत पर दबाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फ़िलहाल सतर्क रुख़ बनाए रखेगा और दरों में किसी बड़े बदलाव से पहले गर्मियों के आँकड़ों का इंतज़ार करेगा।
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मई में ब्रिटेन की महंगाई दर 2.8% पर स्थिर रही, विशेषज्ञों के अनुमानों को झुठलाते हुए। परिवहन की कीमतें 6.8% बढ़ीं, जबकि खाद्य महंगाई घटकर 2.2% हो गई, जिसने दबाव को संतुलित किया।
ब्रिटेन की महंगाई दर मई में अप्रत्याशित रूप से 2.8% पर बनी रही, जो 13 महीने का निचला स्तर है और सभी अनुमानों से कम है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के दर निर्णय से एक दिन पहले जारी आंकड़ों ने स्टर्लिंग को कमजोर किया और दर वृद्धि की उम्मीदों को घटाया। अमेरिका-इजराइल तनाव से जुड़े ऊर्जा मूल्य दबावों की भरपाई खाद्य कीमतों में धीमी वृद्धि ने कर दी।
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