
ट्रंप ने ज़ेलेंस्की को 'पुतिन' कहा, ईरान को जापान; नाटो में ग़लतियों का सिलसिला
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की ज़बानी भूलों ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा की, साथ ही ज़ेलेंस्की-पुतिन मुलाक़ात की घोषणा भी की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ प्रेस वार्ता में दो ज़बानी ग़लतियाँ कीं। उन्होंने ज़ेलेंस्की की ओर इशारा करते हुए पत्रकारों से 'राष्ट्रपति पुतिन' के लिए सवाल पूछने को कहा, और कुछ ही मिनट पहले ईरान को 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ जापान' बता दिया।
इसी प्रेस वार्ता में ट्रंप ने घोषणा की कि ज़ेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही मिलेंगे और 'कुछ सकारात्मक होगा'। व्हाइट हाउस ने ग़लतियों पर सीधी टिप्पणी न करते हुए प्रेस सचिव के बयान से ट्रंप के 'मैराथन, उच्च-ऊर्जा' प्रदर्शन का बचाव किया। यूक्रेनी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से इस भूल पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार पुतिन ने मास्को में बैठक का सुझाव दिया था, जिसे ट्रंप ने अस्वीकार कर दिया।
यूरोपीय मीडिया ने इन ग़लतियों को ट्रंप की मानसिक स्थिति पर उठते सवालों से जोड़ा, जबकि एशियाई देशों में 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ जापान' वाली भूल ने विशेष ध्यान खींचा। जापानी समाचार एजेंसी जिजी प्रेस ने इसे प्रमुखता से रिपोर्ट किया, और इंडोनेशियाई मीडिया ने अमेरिका-जापान सैन्य गठबंधन के संदर्भ में इस ग़लती का विश्लेषण किया। लैटिन अमेरिकी प्रेस ने दोनों ग़लतियों को रेखांकित करते हुए ट्रंप के पिछले ऐसे बयानों की याद दिलाई, जैसे मार्च में जापानी प्रधानमंत्री के सामने पर्ल हार्बर का मज़ाक उड़ाना। दक्षिण एशियाई मीडिया ने भी इस घटना को कवर किया, हालाँकि इस क्षेत्र पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव सीमित है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब ट्रंप के स्वास्थ्य को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, 82 वर्षीय ट्रंप इतिहास के सबसे उम्रदराज़ राष्ट्रपति हैं और सार्वजनिक रूप से कई बार ऊँघते या हाथों पर चोट के निशान लिए देखे गए हैं। वहीं, नाटो शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा यूक्रेन को समर्थन और ईरान के साथ बढ़ते तनाव पर केंद्रित था। ट्रंप ने ईरान के शासन को 'मैल' करार दिया और दावा किया कि उसकी सेना पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त हो चुका है और अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में ठिकानों पर फिर से हमले किए हैं।
ट्रंप ने बताया कि वह उसी दिन पुतिन से फ़ोन पर बात करेंगे और पत्रकारों से पुतिन के लिए 'अच्छा, कठिन सवाल' माँगा। ज़ेलेंस्की-पुतिन मुलाक़ात की कोई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि यह जल्द होगी। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, यह पहल यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक संभावित कदम हो सकती है, हालाँकि मास्को और कीव के बीच बुनियादी मतभेद बरकरार हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक इस प्रस्तावित बैठक की रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
अमेरिकी राष्ट्रपति की बार-बार की गफ़ियाँ वैश्विक मंच के लिए एक अयोग्य नेता को प्रकट करती हैं, अमेरिकी विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं और उनकी मानसिक फिटनेस पर सवाल उठाती हैं।
गफ़िया और उसे छिपाने के प्रयास पर ध्यान केंद्रित करके, कहानी एक एकल घटना के माध्यम से अक्षमता का चित्र बनाती है, अपेक्षित राष्ट्रपति व्यवहार और वास्तविक प्रदर्शन के बीच विरोधाभास का उपयोग करते हुए।
यह उल्लेख नहीं करता कि ट्रंप ने पहले ईरान को वेनेजुएला समझ लिया था, जो ऐसी त्रुटियों के एक पैटर्न का संकेत देगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति की मौखिक चूक शर्मनाक हैं लेकिन उनकी अपरिष्कृत शैली के विशिष्ट हैं; वे एक अन्यथा तनावपूर्ण शिखर सम्मेलन में हल्केपन का एक क्षण प्रदान करते हैं।
कवरेज गफ़िया की गंभीरता को कम करने के लिए व्यंग्य और अल्पकथन का उपयोग करता है, इसे राजनयिक संकट के बजाय एक हास्यपूर्ण किस्सा मानता है।
यह उल्लेख नहीं करता कि ट्रंप ने पहले ईरान को वेनेजुएला समझ लिया था, जो तत्काल गफ़िया से परे भ्रम का एक पैटर्न जोड़ेगा।
अमेरिकी नेता का सहयोगियों और विरोधियों के बीच भ्रम ट्रंप के तहत अमेरिकी विदेश नीति की अराजकता और अक्षमता को उजागर करता है।
भ्रम के कई उदाहरणों (पिछले ईरान-वेनेजुएला मिश्रण सहित) को सूचीबद्ध करके, कहानी एक पैटर्न बनाती है जो पृथक त्रुटि के बजाय प्रणालीगत शिथिलता का सुझाव देती है।
इस तथ्य को छोड़ देता है कि ट्रंप ने खुद को सुधारा और पत्रकारों ने त्रुटि की ओर इशारा किया, जो एक कम गंभीर चूक दिखाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति की गफ़ियाँ छोटी शर्मिंदगी हैं जो नाटो शिखर सम्मेलन या अमेरिकी विदेश नीति की मूलभूत गतिशीलता को नहीं बदलती हैं।
कवरेज गफ़ियों को पृथक घटनाओं के रूप में प्रस्तुत करता है, उनके महत्व को कम करता है और नैतिक निर्णय के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करता है।
ट्रंप के पिछले ईरान-वेनेजुएला भ्रम का उल्लेख नहीं करता, जो गफ़िया को एक पैटर्न के हिस्से के रूप में संदर्भित करेगा।
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