
ब्रिटेन ने नवलनी और स्क्रिपल मामले में रासायनिक हथियार विकसित करने वाले रूसी संस्थानों और वैज्ञानिकों पर प्रतिबंध लगाए
ब्रिटेन ने नोविचोक और एपिबैटिडीन जैसे घातक रासायनिक एजेंटों के विकास में शामिल सात व्यक्तियों और दो अनुसंधान संस्थानों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनका उपयोग अलेक्सी नवलनी और डॉन स्टर्जेस को जानलेवा जहर देने में किया गया।
ब्रिटेन सरकार ने सोमवार को दो रूसी अनुसंधान संस्थानों और सात वरिष्ठ अधिकारियों-वैज्ञानिकों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। ब्रिटिश विदेश कार्यालय के अनुसार, ये सभी नोविचोक तंत्रिका गैस और एपिबैटिडीन विष के विकास, उत्पादन और परीक्षण में शामिल रहे हैं। इन्हीं रासायनिक एजेंटों का प्रयोग 2018 में सैलिसबरी में पूर्व रूसी खुफिया अधिकारी सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी पर हमले तथा 2024 में आर्कटिक दंड कॉलोनी में विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी की मौत के लिए किया गया था। सैलिसबरी हमले के बाद नोविचोक के संपर्क में आने से ब्रिटिश नागरिक डॉन स्टर्जेस की भी मृत्यु हो गई थी। यह कार्रवाई यूरोपीय संघ द्वारा 3 जुलाई को इसी आधार पर छह रूसी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद और अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले सामने आई है।
पश्चिमी देशों की स्थिति स्पष्ट है। ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का घृणित उल्लंघन और वैश्विक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा’ बताया। ब्रिटेन, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड पहले ही फरवरी में मॉस्को पर नवलनी को दुर्लभ विष एपिबैटिडीन से मारने का आरोप लगा चुके हैं। ब्रिटेन में एक सार्वजनिक जांच पिछले वर्ष इस निष्कर्ष पर पहुंची कि स्क्रिपल पर हमले का आदेश संभवतः राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिया था और इसे जीआरयू के एजेंटों ने अंजाम दिया। दूसरी ओर, रूसी अधिकारियों के अनुसार ये सभी आरोप निराधार हैं और पश्चिमी प्रचार का हिस्सा हैं। लंदन स्थित रूसी दूतावास ने इन नए प्रतिबंधों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
प्रतिबंधों के दायरे में एससी सिग्नल और जीएनIII वीएम नामक राजकीय अनुसंधान संस्थान तथा इनके निदेशक, उपनिदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल हैं। इनमें आंद्रेई अंतोखिन और विक्टर तरानचेंको जैसे वैज्ञानिक हैं जिन्होंने नोविचोक पर शोध किया, और व्लादिमीर कोंद्रात्येव जिन्होंने एपिबैटिडीन की विषाक्तता पर लेख का सह-लेखन किया। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, ये प्रतिबंध संपत्ति स्थिरीकरण और यात्रा प्रतिबंध के रूप में लागू होंगे। यह कदम यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर लगाए गए 3,400 से अधिक ब्रिटिश प्रतिबंधों की शृंखला का हिस्सा है। इसी दिन ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने नॉर्वेजियन सागर में एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के निकट एक रूसी बियर-एफ समुद्री गश्ती विमान को असुरक्षित ढंग से उड़ान भरने और सोनोबॉय गिराने की घटना की भी जानकारी दी, जिसे ब्रिटेन ने ‘असुरक्षित और अव्यावसायिक’ बताया।
रासायनिक हथियारों का यह मामला यूरोपीय सुरक्षा परिदृश्य में एक गंभीर मोड़ है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोपीय धरती पर रासायनिक हथियारों का पहला प्रयोग सैलिसबरी में हुआ, जिसके बाद पश्चिमी देशों ने सामूहिक रूप से रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया था। नवलनी के मामले में, 2020 में नोविचोक से जहर दिए जाने के बाद वे बच गए थे, लेकिन 2024 में एपिबैटिडीन के प्रयोग से उनकी मृत्यु की पुष्टि यूरोपीय प्रयोगशालाओं ने की। नाटो शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे पर आगे की सामूहिक कार्रवाई पर चर्चा होने की संभावना है। ब्रिटिश विदेश कार्यालय ने संकेत दिया है कि रासायनिक हथियार अभिसमय के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने और भविष्य में ऐसे प्रयोगों को रोकने के लिए सहयोगियों के साथ काम जारी रखा जाएगा।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.60 | critical |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
The United Kingdom strikes at the barbaric developers of chemical weapons, defending justice and global security.
By repeatedly invoking the deaths of Navalny and Sturgess and using terms like 'barbaric' and 'deadly', the narrative creates a moral imperative that makes sanctions appear as the only reasonable response.
The narrative omits Russia's categorical denial of involvement and any context of alleged Western provocation, such as the Skripal case's disputed details.
Europe supports the British sanctions as a due act against the use of chemical weapons, focusing on the technical and legal aspects.
By detailing the specific institutes and individuals and the legal basis for sanctions, the narrative normalizes the measure as a standard diplomatic tool rather than a dramatic confrontation.
The narrative omits the emotional impact of the poisonings and the broader geopolitical context of NATO-Russia tensions, focusing narrowly on the sanctions themselves.
Britain accuses, but the evidence is circumstantial; the story remains uncertain.
By using words like 'suspected' and 'believed', the narrative introduces doubt and distances itself from the Western accusation, presenting the sanctions as a political move rather than a proven fact.
The narrative omits the detailed accounts of the poisonings' effects and the UK's moral outrage, focusing only on the bare announcement.
The UK sanctions, but Russia denies; the truth is contested between the two sides.
By including both the Western accusation and Russia's denial, the narrative presents the story as a dispute with two equally valid claims, avoiding taking a side.
The narrative omits the specific evidence cited by the UK (e.g., the chemical analysis) and the strong condemnatory language used by Western leaders, instead offering a balanced summary.
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