
पेरिस हाउते कॉउचर: जब सुनहरी चोटी वाली टाई और पत्थर सी लगती पोशाकों ने मचाई धूम
पेरिस हाउते कॉउचर वीक के पहले दिन भारतीय शिल्प, अतियथार्थवादी डिज़ाइन और वैश्विक सितारों की मौजूदगी ने फैशन को कला के करीब पहुंचा दिया।
जब पोर्टो रीको के गायक बैड बनी पेरिस के शियापारेली शो में पहुंचे, तो उनकी गले में बंधी सुनहरी चोटी जैसी टाई ने सबका ध्यान खींचा। मक्खन जैसे पीले रंग का डबल-ब्रेस्टेड सूट, सफ़ेद रेशमी शर्ट और वह अनोखी टाई—काले और सुनहरे धागों से गूंथी एक चोटी—यह सब क्रिएटिव डायरेक्टर डैनियल रोज़बेरी की सर्रियलिस्ट सोच का नतीजा था। उसी अगली कतार में ब्रिटिश अभिनेत्री एमा कोरिन एक ऐसी जैकेट में बैठी थीं जिसका कॉलर पूरी तरह रंग-बिरंगे पंखों से बना था और सीने पर सींग जैसी आकृति उभरी हुई थी। शियापारेली के ‘द एबिस’ कलेक्शन ने जैसे पहनने योग्य मूर्तियों का एक संग्रह प्रस्तुत किया, जिसमें सिलिकॉन जैसे अप्रत्याशित पदार्थों को पारंपरिक कारीगरी से जोड़ा गया था। इसी मंच पर ब्राज़ील की तीन मॉडलों—लुइज़ा पेरोते, थालिता फ़रेरा और एरिका बार्लेता—ने भी कदम रखा, जो कम समय में ही चैनल, गुच्ची और बालेन्सियागा जैसे ब्रांड्स के लिए वॉक कर चुकी हैं।
इसी दिन भारतीय डिज़ाइनर राहुल मिश्रा ने अपने ‘देवी’ कलेक्शन से एक अलग ही दुनिया रच दी। रैपर कार्डी बी आइवरी-सफ़ेद रंग की एक ऐसी कॉउचर गाउन में नज़र आईं, जिस पर मोती, क्रिस्टल और हाथ की कढ़ाई से ऐसी अलंकरण उकेरा गया था मानो किसी प्राचीन मंदिर की पत्थर की मूर्ति पर गहने तराशे गए हों। कंधों पर मोतियों की पट्टियां, कमर पर बीडवर्क और हाथ से बनी फ्रिंज—पूरी पोशाक एक चलती-फिरती कलाकृति लग रही थी। कार्डी बी ने माथे पर क्रिस्टल का टीका और लंबी चोटी के साथ इस लुक को पूरा किया, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने उन्हें ‘वॉकिंग आर्ट’ और ‘प्रिंसेस गॉडेस’ कहा। वहीं उद्योगपति ईशा अंबानी ने धातुई धूसर रंग की स्ट्रैपलेस गाउन पहनी थी, जिसके कोर्सेट पर टोनल एम्ब्रॉयडरी और त्रिआयामी बीडवर्क से ऐसा भ्रम होता था जैसे कपड़े पर गहनों की परतें लटक रही हों। उनके हाथ में 18 कैरेट सफ़ेद सोने से बना और 3,025 हीरों से जड़ा दुर्लभ हर्मेस बैग था—वही बैग जो कभी उनकी मां नीता अंबानी ने इस्तेमाल किया था।
लेबनानी अख़बार अन-नहार के विश्लेषण के अनुसार, इस बार का हाउते कॉउचर वीक दिखावे से अधिक रचनात्मकता पर केंद्रित रहा। डीयोर ने जहां जोनाथन एंडरसन की देखरेख में हस्तशिल्प और अवधारणा के बीच संतुलन साधा, वहीं आइरिस वान हर्पेन ने विज्ञान को मंच पर उतारा। उनकी एक पोशाक को पार्टिकल एक्सेलरेटर में प्रोसेस करने के बाद प्राकृतिक विद्युत डिस्चार्ज से उसकी बारीकियां पूरी की गईं—यह महज़ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि फ़ैशन के भविष्य पर एक सवाल था। लेबनानी डिज़ाइनर जॉर्ज होबेइका ने ‘द विज़िटर’ कलेक्शन में प्रकृति के तत्वों को हाथ की कढ़ाई से ऐसे उकेरा मानो कोई दृश्य कविता रची गई हो, जबकि टोनी वार्ड ने रेगिस्तानी टीलों की लहरों से प्रेरित वास्तुशिल्पीय सिल्हूट पेश किए।
राहुल मिश्रा के शो ने भारतीय शिल्प की वैश्विक पहुंच को एक नई ऊंचाई दी। उन्होंने लगभग 2,000 कारीगरों और कलाकारों के साथ मिलकर ऐसी पोशाकें बनाईं जिनमें अजंता की गुफाओं और कर्नाटक के तारकेश्वर मंदिर की मूर्तियों की छाया दिखी। कई मॉडलों को इस तरह तैयार किया गया मानो उनके एक से अधिक चेहरे हों—यह भ्रम ज़रदोज़ी, दबका और बाघल मोतियों की सूक्ष्म कारीगरी से पैदा हुआ। कार्डी बी और ईशा अंबानी का साथ-साथ बैठना इस बात का प्रतीक बन गया कि भारतीय परंपरा से उपजी कॉउचर अब अंतरराष्ट्रीय पॉप संस्कृति और भारतीय विलासिता, दोनों को एक मंच पर ला सकती है।
शाम ढलने तक यह साफ़ हो गया कि पेरिस के इस पहले दिन ने फ़ैशन, कला और विज्ञान के बीच की रेखाओं को धुंधला कर दिया था। एक ओर शियापारेली का पंखों और सींगों वाला अतियथार्थवाद, दूसरी ओर मिश्रा की पत्थर सी लगती पोशाकें जो चलने पर जीवंत हो उठती थीं। आइरिस वान हर्पेन की वह पोशाक, जो कण त्वरक से गुज़री थी, एक ऐसी छवि छोड़ गई जिसमें परंपरा और भविष्य एक साथ सांस लेते दिखे।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.80 | aligned |
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| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.30 | aligned |
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| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Indian art conquers the world stage with Rahul Mishra's 'Devi' collection.
Through hyperbolic language and divine references, a fashion event is transformed into a ritual of cultural affirmation.
It fails to acknowledge that Rahul Mishra's show was not the opening of the week, which was Schiaparelli.
Haute couture must return to its creative essence, rejecting pure spectacle.
It positions itself as a judge of good taste, establishing a hierarchy between authentic fashion and exhibitionism.
It omits the celebrity frenzy that dominates other accounts, focusing only on creative aspects.
Stars and their extravagant looks are the true protagonists of haute couture.
Through detailed descriptions of individual outfits, the event is reduced to a media red carpet.
It omits the cultural and craftsmanship narrative present in other blocs.
Brazilian talent conquers Parisian haute couture.
It selects a detail (the presence of Brazilian models) and frames it as evidence of national worth.
It omits the overall context of the fashion week and other designers.
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