
अमेरिका-ईरान संघर्ष: होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद दोनों ओर से बड़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिका ने ईरान में 80 से अधिक ठिकानों पर हमले किए, ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया, जिससे युद्धविराम समझौता खतरे में पड़ गया।
अमेरिकी सेना ने 7-8 जुलाई की रात ईरान में 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें वायु रक्षा प्रणालियां, कमांड सेंटर, तटीय रडार और 60 से अधिक ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की छोटी नौकाएं शामिल थीं। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए हमलों का सीधा जवाब थी। इसके कुछ ही घंटों बाद, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए और एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया।
अमेरिकी पक्ष ने इन हमलों को ईरान द्वारा युद्धविराम का 'स्पष्ट और खतरनाक उल्लंघन' बताया और कहा कि इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। वहीं, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि 'धमकी और जबरन वसूली का युग खत्म हो चुका है।' ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी हमलों को संघर्षविराम का उल्लंघन करार देते हुए 'निर्णायक कदम' उठाने की चेतावनी दी।
इस ताजा सैन्य टकराव के बाद वैश्विक तेल कीमतों में 2-3% की वृद्धि हुई, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल बिक्री पर लगी अस्थायी छूट को भी रद्द कर दिया, जो जून में हुए समझौते का हिस्सा थी। कतर और सऊदी अरब ने अपने-अपने टैंकरों पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया; कतर ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर अस्वीकार्य हमला' बताया और ईरानी उप-राजदूत को तलब किया। ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जो जहाज ईरानी अधिकारियों से समन्वय नहीं करते, वे जोखिम उठाते हैं।
ये घटनाएं ऐसे समय हुई हैं जब ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल रही है, जो 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे गए थे। ईरानी गार्ड्स ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने जानबूझकर इस ऐतिहासिक शोक सभा के दौरान हमले किए ताकि ध्यान भटकाया जा सके। जून में अमेरिका और ईरान के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसमें 60 दिनों के युद्धविराम और अंतिम शांति समझौते के लिए बातचीत का प्रावधान था। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान द्वारा जहाजों से शुल्क न वसूलने पर सहमति बनी थी।
हालांकि दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है, लेकिन ताजा हमलों ने समझौते की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वार्ताकार 'सद्भावना' के साथ अंतिम समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जबकि ईरानी पक्ष ने अमेरिकी 'बुरी नीयत' का आरोप लगाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल सौदेबाजी के हथियार के रूप में कर रहा है। अगले कदम के रूप में, खामेनेई के दफन के बाद वार्ता फिर शुरू होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.50 | critical |
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.10 | neutral |
The exchange of strikes is a dangerous escalation that puts the ceasefire at risk; both sides must step back.
By presenting both sides' actions and then highlighting the ceasefire as a common good that is threatened, it creates an impression of impartiality and concern.
It omits the specific numbers of targets hit by both sides, which would give a clearer picture of the scale of the escalation, and Iran's claim of hitting 85 US sites.
The US has launched a new wave of strikes that are four to five times larger than before, an aggressive escalation that threatens peace. Iran is willing to negotiate, but the US continues its attacks.
By citing Axios and emphasizing the scale, it makes the US action appear as an unjustified escalation, using a US-based source for credibility.
It omits the Iranian attacks on commercial ships that triggered the US response and the US justification of protecting international shipping.
The US-Iran conflict is now directly affecting our region, with sirens in Bahrain and Kuwait. We must monitor the situation closely as it threatens our security.
By highlighting the sirens and the impact on Gulf states, the conflict is made a local concern, emphasizing the region's vulnerability.
It omits the details of US and Iranian justifications, focusing only on the regional impact, and omits the ceasefire negotiations.
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