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भू-राजनीति और राजनीतिगुरुवार, 2 जुलाई 2026

चार माह बाद अली ख़ामेनेई का अंतिम संस्कार, अमेरिका-इज़राइल को ईरान की कड़ी चेतावनी

28 फरवरी को अमेरिकी-इज़राइली हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता का अंतिम संस्कार 4-9 जुलाई को होगा, जिसमें भारत समेत 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

ईरान चार माह से अधिक के विलंब के बाद 4 जुलाई से 9 जुलाई तक पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार करने जा रहा है। ख़ामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा तेहरान पर किए गए हवाई हमलों में मारे गए थे। ईरानी सैन्य कमांडर अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी दी है कि वे “कोई ग़लत अनुमान” न लगाएं और किसी भी आक्रमण का “कठोर जवाब” दिया जाएगा। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने जनता से भारी संख्या में शामिल होकर “बदले की पुकार” को दुनिया तक पहुँचाने का आह्वान किया है। तेहरान, क़ोम, मशहद और इराक़ के नजफ़-करबला में होने वाले इस छह दिवसीय आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, और कई शहरों में हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रहेगा।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, 100 से अधिक देशों के विदेशी मेहमान इस अंतिम संस्कार में शामिल होंगे, जिनमें 30 से अधिक देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हैं। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा श्रद्धांजलि देंगे; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण के बावजूद पूर्व निर्धारित यात्रा के कारण नहीं जाना संभव हो सका। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के स्थान पर वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ स्वयं तेहरान जा रहे हैं, जो अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता की उनकी भूमिका को भी रेखांकित करता है। चीन, रूस और ताजिकिस्तान के भी शीर्ष नेता या विशेष दूत शामिल होंगे।

इस पूरे आयोजन पर सबसे बड़ा प्रश्न नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर है। 56 वर्षीय मोजतबा, जो अपने पिता की मृत्यु के बाद 8 मार्च को सर्वोच्च नेता बने, अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं और कथित तौर पर उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनके शामिल होने का निर्णय पूरी तरह उनके कार्यालय पर निर्भर है। पश्चिमी विश्लेषकों के अनुसार, यदि मोजतबा जनाज़े में नज़र आते हैं तो यह उनके नेतृत्व को मज़बूत करेगा, लेकिन अनुपस्थिति से शासन की आंतरिक स्थिरता पर सवाल उठ सकते हैं। दूसरी ओर, ईरानी शासन इस आयोजन को जनसमर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रहा है, हालांकि विश्लेषक बताते हैं कि आर्थिक तंगी और दमन से जनता में गहरी नाराज़गी है।

यह अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच क़तर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है और एक नाज़ुक युद्धविराम लागू है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोहा में हालिया दौर की बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान वार्ता स्थगित रहेगी और इसके बाद अगला दौर आयोजित होने की संभावना है। दक्षिण एशिया के लिए, पाकिस्तान की मध्यस्थता और भारत की भागीदारी क्षेत्रीय कूटनीति में संतुलन को दर्शाती है, जबकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़रानी सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सभी पक्षों की प्राथमिकता बनी हुई है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार के बाद ही अमेरिका के साथ व्यापक समझौते पर बातचीत आगे बढ़ेगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

भारतीय कवरेज खामेनेई के अंतिम संस्कार की कूटनीतिक रूपरेखा और घरेलू राजनीतिक पहलुओं पर केंद्रित है, जिसमें बताया गया है कि किन नेताओं को आमंत्रित किया गया है और देश का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। यह ईरान की भीड़ आपदा की पुनरावृत्ति की चिंता को भी रेखांकित करता है, खुमैनी और सुलेमानी के दफ़न के दौरान हुई घातक भगदड़ को याद करते हुए। रिपोर्टिंग संतुलित, व्यावहारिक और क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष के बजाय भारत की प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
चेतावनीप्रतिशोधवाद

दक्षिण-पूर्व एशियाई आउटलेट खामेनेई के अंतिम संस्कार को तेहरान द्वारा आयोजित एक विशाल शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश करते हैं, जिसमें अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ बदले की मांग को बढ़ावा दिया जाता है। कथा लाखों लोगों की लामबंदी, भारी सुरक्षा उपस्थिति और ईरान और उसके विरोधियों के बीच बढ़ते तनाव पर जोर देती है। लहजा तत्काल और चेतावनीपूर्ण है, इस घटना को पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में एक संभावित विस्फोटक बिंदु के रूप में पेश किया गया है।

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वैश्विक कंपनियों में 4.3 लाख नौकरियों की कटौती, एआई और आर्थिक दबाव बने प्रमुख कारण·कोलंबिया ने घाना को हराकर पूरी की अंतिम-16 की तस्वीर, अब शुरू होंगे क्वार्टर फाइनल के लिए संघर्ष·फेरारी ने पहली इलेक्ट्रिक कार की मिली-जुली प्रतिक्रिया के बाद V12 मैनुअल एडिशन पेश किया·ब्रिटेन के भावी प्रधानमंत्री बर्नहैम ने पेंशन ट्रिपल लॉक बरकरार रखने और शीघ्र चुनाव से इनकार की घोषणा की·विस्कॉन्सिन झील में तूफान के बीच नौका पलटी, तीन की मौत; मृतक बच्चे होने की आशंका·रूस का कीव पर 570 ड्रोन-मिसाइल हमला, 30 मरे; ड्रोन भंडारण की रणनीति पर बल·पुर्तगाल ने क्रोएशिया को हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई, दिवंगत जोटा को दी भावुक श्रद्धांजलि·ब्राजील की शीर्ष अदालत ने बोलसोनारो की नजरबंदी बरकरार रखी, सभी हथियार जब्त करने का आदेश·वैश्विक कंपनियों में 4.3 लाख नौकरियों की कटौती, एआई और आर्थिक दबाव बने प्रमुख कारण·कोलंबिया ने घाना को हराकर पूरी की अंतिम-16 की तस्वीर, अब शुरू होंगे क्वार्टर फाइनल के लिए संघर्ष·फेरारी ने पहली इलेक्ट्रिक कार की मिली-जुली प्रतिक्रिया के बाद V12 मैनुअल एडिशन पेश किया·ब्रिटेन के भावी प्रधानमंत्री बर्नहैम ने पेंशन ट्रिपल लॉक बरकरार रखने और शीघ्र चुनाव से इनकार की घोषणा की·विस्कॉन्सिन झील में तूफान के बीच नौका पलटी, तीन की मौत; मृतक बच्चे होने की आशंका·रूस का कीव पर 570 ड्रोन-मिसाइल हमला, 30 मरे; ड्रोन भंडारण की रणनीति पर बल·पुर्तगाल ने क्रोएशिया को हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई, दिवंगत जोटा को दी भावुक श्रद्धांजलि·ब्राजील की शीर्ष अदालत ने बोलसोनारो की नजरबंदी बरकरार रखी, सभी हथियार जब्त करने का आदेश·
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चार माह बाद अली ख़ामेनेई का अंतिम संस्कार, अमेरिका-इज़राइल को ईरान की कड़ी चेतावनी

28 फरवरी को अमेरिकी-इज़राइली हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता का अंतिम संस्कार 4-9 जुलाई को होगा, जिसमें भारत समेत 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

ईरान चार माह से अधिक के विलंब के बाद 4 जुलाई से 9 जुलाई तक पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार करने जा रहा है। ख़ामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा तेहरान पर किए गए हवाई हमलों में मारे गए थे। ईरानी सैन्य कमांडर अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी दी है कि वे “कोई ग़लत अनुमान” न लगाएं और किसी भी आक्रमण का “कठोर जवाब” दिया जाएगा। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने जनता से भारी संख्या में शामिल होकर “बदले की पुकार” को दुनिया तक पहुँचाने का आह्वान किया है। तेहरान, क़ोम, मशहद और इराक़ के नजफ़-करबला में होने वाले इस छह दिवसीय आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, और कई शहरों में हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रहेगा।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, 100 से अधिक देशों के विदेशी मेहमान इस अंतिम संस्कार में शामिल होंगे, जिनमें 30 से अधिक देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हैं। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा श्रद्धांजलि देंगे; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण के बावजूद पूर्व निर्धारित यात्रा के कारण नहीं जाना संभव हो सका। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के स्थान पर वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ स्वयं तेहरान जा रहे हैं, जो अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता की उनकी भूमिका को भी रेखांकित करता है। चीन, रूस और ताजिकिस्तान के भी शीर्ष नेता या विशेष दूत शामिल होंगे।

इस पूरे आयोजन पर सबसे बड़ा प्रश्न नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर है। 56 वर्षीय मोजतबा, जो अपने पिता की मृत्यु के बाद 8 मार्च को सर्वोच्च नेता बने, अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं और कथित तौर पर उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनके शामिल होने का निर्णय पूरी तरह उनके कार्यालय पर निर्भर है। पश्चिमी विश्लेषकों के अनुसार, यदि मोजतबा जनाज़े में नज़र आते हैं तो यह उनके नेतृत्व को मज़बूत करेगा, लेकिन अनुपस्थिति से शासन की आंतरिक स्थिरता पर सवाल उठ सकते हैं। दूसरी ओर, ईरानी शासन इस आयोजन को जनसमर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रहा है, हालांकि विश्लेषक बताते हैं कि आर्थिक तंगी और दमन से जनता में गहरी नाराज़गी है।

यह अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच क़तर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है और एक नाज़ुक युद्धविराम लागू है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोहा में हालिया दौर की बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान वार्ता स्थगित रहेगी और इसके बाद अगला दौर आयोजित होने की संभावना है। दक्षिण एशिया के लिए, पाकिस्तान की मध्यस्थता और भारत की भागीदारी क्षेत्रीय कूटनीति में संतुलन को दर्शाती है, जबकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़रानी सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सभी पक्षों की प्राथमिकता बनी हुई है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार के बाद ही अमेरिका के साथ व्यापक समझौते पर बातचीत आगे बढ़ेगी।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 6 स्रोत · 3 भाषाएँ

0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

भारतीय कवरेज खामेनेई के अंतिम संस्कार की कूटनीतिक रूपरेखा और घरेलू राजनीतिक पहलुओं पर केंद्रित है, जिसमें बताया गया है कि किन नेताओं को आमंत्रित किया गया है और देश का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। यह ईरान की भीड़ आपदा की पुनरावृत्ति की चिंता को भी रेखांकित करता है, खुमैनी और सुलेमानी के दफ़न के दौरान हुई घातक भगदड़ को याद करते हुए। रिपोर्टिंग संतुलित, व्यावहारिक और क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष के बजाय भारत की प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
चेतावनीप्रतिशोधवाद

दक्षिण-पूर्व एशियाई आउटलेट खामेनेई के अंतिम संस्कार को तेहरान द्वारा आयोजित एक विशाल शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश करते हैं, जिसमें अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ बदले की मांग को बढ़ावा दिया जाता है। कथा लाखों लोगों की लामबंदी, भारी सुरक्षा उपस्थिति और ईरान और उसके विरोधियों के बीच बढ़ते तनाव पर जोर देती है। लहजा तत्काल और चेतावनीपूर्ण है, इस घटना को पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में एक संभावित विस्फोटक बिंदु के रूप में पेश किया गया है।

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