
टीम मेल्ली का विश्व कप सफर अंतिम क्षणों में खत्म, मेक्सिको को बनाया दूसरा घर
ईरानी टीम ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद तिजुआना से रवाना हुई, जहां मैक्सिकन प्रशंसकों ने जोरदार विदाई दी और टीम ने अमेरिकी मेज़बानी पर सवाल उठाए।
ईरान का विश्व कप अभियान एक ऐसे पल में समाप्त हुआ जो इतिहास रच सकता था। मिस्र के खिलाफ अंतिम ग्रुप मैच के इंजरी टाइम में शोजा खलीलज़ादेह का गोल ऑफसाइड करार दिया गया—एक ऐसा फैसला जिसने टीम मेल्ली को पहली बार नॉकआउट में पहुंचने से रोक दिया। स्कोर 1-1 रहा, और ईरान ग्रुप जी में तीनों मैच ड्रॉ खेलकर अपराजित रहा, लेकिन तीसरे स्थान पर रहते हुए बाहर हो गया।
यह निराशा उस दिन और गहरा गई जब ऑस्ट्रिया ने अल्जीरिया के खिलाफ अंतिम क्षणों में बराबरी का गोल कर ईरान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तिजुआना के होटल लॉबी में खिलाड़ी और स्टाफ पहले अल्जीरिया की बढ़त पर झूम उठे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद सन्नाटा छा गया। इससे पहले, न्यूज़ीलैंड के साथ 2-2 और बेल्जियम के साथ 0-0 की बराबरी ने टीम को हर मैच में संघर्षरत लेकिन अंततः अधूरा रखा।
मैदान से बाहर की चुनौतियों ने इस अभियान को और जटिल बना दिया। अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध के कारण ईरान ने अपना बेस कैंप एरिज़ोना के टक्सन से हटाकर मैक्सिकन सीमा पर स्थित तिजुआना में स्थानांतरित कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने शुरू में टीम को मैच से सिर्फ एक दिन पहले प्रवेश की अनुमति दी, हालांकि बाद में सिएटल मुकाबले के लिए दो दिन पहले आने की छूट दी गई। फेडरेशन के 11 अधिकारियों को वीज़ा नहीं मिला, जिनमें अध्यक्ष मेहदी ताज भी शामिल थे, जिन्हें वाशिंगटन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ा मानता है।
तिजुआना से विदाई के दृश्य ने एक अलग ही कहानी बयां की। 150 से अधिक मैक्सिकन प्रशंसक होटल के बाहर जमा हुए, “ईरान, मेरे भाई, तुम अब मैक्सिकन हो!” के नारे लगाए और ऑटोग्राफ लिए। टीम ने एक हस्तलिखित संदेश में कहा, “सच्ची मेज़बानी सम्मान, मानवता और गरिमा पर आधारित होती है। हम तिजुआना के लोगों की दयालुता कभी नहीं भूलेंगे।” साथ ही, टीम ने प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि “फैसलों, लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं और परिस्थितियों की एक श्रृंखला ने न्याय की भावना को कमज़ोर किया।” अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सचिव मार्कवेन मुलिन ने सार्वजनिक रूप से ईरान के बाहर होने पर “खुशी का नृत्य” करने की बात कही, जिसे टीम ने “क्षुद्रता” करार दिया।
ईरानी खिलाड़ी अब तेहरान लौट रहे हैं, जहां युद्ध का माहौल अभी भी कायम है। प्रशंसकों का मानना है कि टीम को गर्व करना चाहिए—उन्होंने हर मैच में संघर्ष किया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई। लेकिन यह विश्व कप एक ऐसे सवाल के साथ समाप्त हुआ जिसका जवाब भविष्य के टूर्नामेंट ही देंगे: क्या खेल की दुनिया वास्तव में सभी के लिए समान परिस्थितियां सुनिश्चित कर सकती है?
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