
जर्मनी में सरोगेसी विवाद के बाद स्पान का इस्तीफा, थोरस्टेन फ्राई बने नए संसदीय दल प्रमुख
जेन्स स्पान के इस्तीफे के बाद सीडीयू/सीएसयू संसदीय दल की कमान चांसलर कार्यालय प्रमुख थोरस्टेन फ्राई को सौंपी गई, जबकि पूर्वी जर्मनी में चुनावों से पहले 'अग्नि-दीवार' पर बहस तेज हो गई है।
जर्मनी की सत्तारूढ़ कंज़र्वेटिव पार्टी के संसदीय दल के अध्यक्ष जेन्स स्पान ने सरोगेसी के ज़रिए पिता बनने पर हुए आंतरिक विरोध के बाद इस्तीफा दे दिया। सीडीयू सूत्रों के अनुसार, चांसलर फ्रीडरिष मेर्ट्स और सीएसयू प्रमुख मार्कुस ज़ोएडर ने उनके उत्तराधिकारी के रूप में चांसलर कार्यालय के वर्तमान प्रमुख थोरस्टेन फ्राई के नाम पर सहमति बना ली है। फ्राई को लंबे समय से मेर्ट्स का करीबी सहयोगी माना जाता है और उनकी नियुक्ति को सरकार के भीतर स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। संसदीय दल के नेतृत्व ने बुधवार दोपहर एक आपातकालीन डिजिटल बैठक बुलाई, जिसमें इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई। औपचारिक चुनाव अगले सप्ताह होने की उम्मीद है।
स्पान का इस्तीफा जर्मनी में सरोगेसी पर कानूनी प्रतिबंध और पार्टी की नीतियों के बीच अंतर्विरोध से उपजा। जर्मन कानून के तहत सरोगेसी अवैध है, और सीडीयू ने फरवरी में एक पार्टी सम्मेलन में इसके उदारीकरण के ख़िलाफ़ मतदान किया था। स्पान ने स्वयं 2020 में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए सरोगेसी पर प्रतिबंधों में ढील देने से इनकार किया था। ब्राज़ीलियाई मीडिया में छपी टिप्पणियों के अनुसार, इस विरोधाभास ने पार्टी के भीतर और बाहर से तीखी आलोचना को जन्म दिया, जिसमें ग्रीन पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि जो नेता दूसरों के लिए नियम बनाते हैं, उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे नियम उन पर व्यक्तिगत रूप से लागू क्यों नहीं होते। सीडीयू के स्थानीय नेताओं ने भी इसे 'पानी का उपदेश देकर शराब पीने' जैसा बताया, जिससे पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा।
इस बीच, पूर्वी जर्मनी में सितंबर में होने वाले राज्य चुनावों से पहले धुर-दक्षिणपंथी एएफडी के साथ गठबंधन न करने की 'अग्नि-दीवार' नीति पर बहस तेज़ हो गई है। सैक्सोनी के मुख्यमंत्री मिषाएल क्रेचमर (सीडीयू) ने एक साक्षात्कार में कहा कि 'जो अब भी अग्नि-दीवारों की बात करता है, उसने समय के संकेतों को नहीं पहचाना' और सभी दलों से बातचीत की वकालत की। सैक्सोनी के युवा सोशल डेमोक्रेट्स (जूसोस) ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह चरम दक्षिणपंथ के साथ राजनीतिक सीमाओं को धुंधला करने का संकेत है। रूसी विश्लेषकों के अनुसार, यह बहस पूरे यूरोप में पारंपरिक केंद्र-दक्षिणपंथी दलों के कमज़ोर पड़ने और धुर-दक्षिणपंथी ताकतों के उदय के व्यापक रुझान को दर्शाती है, जैसा कि फ्रांस में मरीन ले पेन की बढ़ती लोकप्रियता से भी स्पष्ट है।
चांसलर मेर्ट्स के लिए यह घटनाक्रम कई मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण है। एक ओर, स्पान के जाने से उन्हें अपने सबसे महत्वाकांक्षी आंतरिक प्रतिद्वंद्वी से छुटकारा मिल गया है, जैसा कि जर्मन राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं। दूसरी ओर, सरोगेसी विवाद ने पार्टी की एकजुटता को नुकसान पहुंचाया है, खासकर उन पूर्वी राज्यों में जहां एएफडी पहले से ही मज़बूत स्थिति में है। सैक्सोनी-एनहाल्ट और मेक्लेनबुर्ग-वोर्पोमर्न में चुनाव प्रचार कर रहे सीडीयू उम्मीदवारों का कहना है कि इस विवाद ने उनके तर्कों को कमज़ोर किया है। भारतीय संदर्भ में, यह प्रकरण सरोगेसी कानूनों के वैश्विक विखंडन को रेखांकित करता है—जहां जर्मनी जैसे देशों में यह प्रतिबंधित है, वहीं अमेरिका और भारत जैसे देशों में अलग-अलग नियम लागू हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैतिक और कानूनी जटिलताएं पैदा होती हैं।
फिलहाल, सरकार ने संकेत दिया है कि वह जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकती है, हालांकि फ्राई के स्थान पर चांसलर कार्यालय प्रमुख की नियुक्ति अभी तय नहीं है। संसदीय दल की बैठक में औपचारिक मंज़ूरी के बाद अगले बुधवार को विशेष सत्र में फ्राई के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इस बीच, सरोगेसी पर बहस जारी रहने की संभावना है, क्योंकि सीडीयू के भीतर ही कुछ कानूनी विशेषज्ञ प्रतिबंधों में ढील की वकालत कर रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व मौजूदा रुख पर कायम है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.60 | critical |
जर्मन राजनीतिक पर्यवेक्षक स्पान के पाखंड और रूढ़िवादी गुट और चांसलर मर्ज़ को हुए नुकसान की निंदा करते हैं।
स्पान के निजी कार्यों को उनके सार्वजनिक रुख के साथ जोड़कर, कथा पाखंड का एक स्पष्ट मामला बनाती है, जिससे उन्हें और उनकी पार्टी को अवैध ठहराया जाता है।
लैटिन अमेरिकी पर्यवेक्षक जोर देते हैं कि राजनीतिक नेताओं को अपने निजी जीवन और सार्वजनिक रुख के बीच सुसंगत होना चाहिए; स्पान का पाखंड अस्वीकार्य है।
कथा सुसंगतता की नैतिक अपेक्षा को सार्वभौमिक बनाती है, इसे एक सार्वभौमिक मानक के रूप में लागू करती है जो स्थानीय कानूनी बारीकियों की परवाह किए बिना स्पान की निंदा करती है।
यह गुट सीडीयू के भीतर आंतरिक राजनीतिक गतिशीलता और AfD के उदय के व्यापक संदर्भ को छोड़ देता है, केवल नैतिक विरोधाभास पर ध्यान केंद्रित करता है।
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