
जब बंदर ने खिलौना छोड़ा और बच्चे ने कुत्ते को पढ़ा: करुणा की अनोखी तस्वीरें
दुनिया भर में पशु कल्याण से जुड़े अनूठे प्रयोग बता रहे हैं कि सामूहिक संवेदना कैसे इंसानों और जानवरों दोनों की ज़िंदगी बदल सकती है।
फ्लोरिडा के जैक्सनविल स्थित एक पशु आश्रय में नहेमायाह नाम का बच्चा नियमित रूप से कुत्तों के सामने बैठकर किताबें पढ़ता था। उसकी आवाज़ सुनकर होपर जैसे कुत्ते, जो 400 दिनों से किसी अपनाने वाले का इंतजार कर रहे थे, शांत हो जाते। जैक्सनविल ह्यूमेन सोसाइटी के ‘पॉज़िटिव रीडिंग’ कार्यक्रम ने बच्चों की पढ़ाई और पशुओं के तनाव-निवारण को एक साथ जोड़ दिया; संस्था के अनुसार, 2017 के एक अध्ययन में पाया गया कि जानवरों को पढ़कर सुनाने से बच्चों का रुझान सीखने की ओर बढ़ता है।
दक्षिण अमेरिका में भी करुणा के ऐसे ही सामूहिक आयोजन देखने को मिले। कोलंबिया के बैरेंकिया शहर में अगस्त में होने वाला ‘गुआऊ’ फैशन शो कोई साधारण रैंप नहीं था—वहाँ वरिष्ठ, अशक्त और मिश्रित नस्ल के कुत्तों को मॉडलों के साथ चलने का मौका मिला, ताकि उन्हें गोद लेने की संभावना बढ़ाई जा सके। आयोजकों का अनुमान था कि शहर में लगभग 20,000 कुत्ते सड़कों पर हैं और आश्रय संस्थाएँ आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। वहीं ब्यूनस आयर्स में हर महीने पार्कों में लगने वाली गोद-अभियान की बैठकों में पशु चिकित्सा शिविर, मुफ्त रैबीज टीकाकरण और 15 से अधिक स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी ने इसे एक सामुदायिक उत्सव का रूप दे दिया। मेडेलिन के आसपास अबुर्रा घाटी क्षेत्र में तो महानगरीय प्राधिकरण ने चार महीने में 14,000 से अधिक कुत्तों और बिल्लियों की मुफ्त नसबंदी का लक्ष्य रखा, जिसमें न केवल पशु स्वास्थ्य बल्कि सार्वजनिक स्वच्छता पर भी जोर दिया गया।
इन्हीं दिनों जापान के इचिकावा चिड़ियाघर ने एक अलग तरह की कहानी दुनिया को दी। वहाँ एक मकाक बंदर ‘पंच’ को जन्म के बाद माँ ने त्याग दिया था। देखभालकर्ताओं ने उसे एक आइकिया का नारंगी रंग का आरंगुटान सॉफ्ट टॉय थमा दिया, ताकि वह चिपकना सीखे—नवजात मकाकों के बचने के लिए ज़रूरी कौशल। पंच उस खिलौने को हर जगह साथ ले जाने लगा और तस्वीरें वायरल हो गईं। लेकिन कुछ ही हफ्तों में वह दूसरे बंदरों के समूह में घुल-मिल गया और अपने खिलौने को अलग कमरे में छोड़कर अकेला घूमने लगा। उसके पहले जन्मदिन पर चिड़ियाघर को जापान भर से करीब 2,500 बधाई पत्र मिले, जिनमें से हज़ार को प्रदर्शनी में रखा गया—एक ऐसा उत्सव जिसमें किसी पशु की जिजीविषा और सामाजिक स्वीकार्यता की यात्रा पर सार्वजनिक मोह साफ झलका।
कोलंबिया से आई व्यक्तिगत कहानियाँ इस यथार्थ को और नज़दीक लाती हैं। चार साल से एक फाउंडेशन में रह रही काली कुतिया सलमा अब भी किसी स्थायी परिवार का इंतज़ार कर रही है, हालाँकि उसकी सेहत और स्वभाव गोद लेने के लिए पूरी तरह तैयार है। कैसर नाम का डेढ़ साल का कुत्ता इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि उसके मालिकों के घर नया बच्चा आने वाला था और जगह कम थी; उसे लेने वाली संस्था ने स्पष्ट किया कि ‘वह सिर्फ दूसरों के फैसलों का दोषी नहीं है।’ इसी दौरान ब्राजील के अरापोंगास शहर ने महिलाओं के लिए मुफ्त आईयूडी सेवा शुरू की—25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को बिना पूर्व पैप स्मियर जांच के यह सुविधा दी गई। हालाँकि इस पहल का सीधा संबंध पशु कल्याण से नहीं है, लेकिन यह उसी नागरिक-केंद्रित संवेदनशीलता का हिस्सा है जो कमज़ोर समझे जाने वाले समूहों—चाहे वे इंसान हों या जानवर—के लिए बुनियादी देखभाल सुनिश्चित करना चाहती है।
आखिरकार, जैक्सनविल के आश्रय में होपर को जब कोई अपनाने आया, तब तक नहेमायाह 100 घंटे पढ़ चुका था और उसे सुनहरी स्याही से हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र मिला। या शायद तस्वीर वहाँ रुकती है जहाँ पंच ने पहली बार अपना खिलौना एक कोने में रख दिया और दूसरे मकाकों के पास खेलने चला गया—एक छोटा-सा इशारा, जो बताता है कि करुणा कभी-कभी आवाज़, कभी फैशन शो, तो कभी एक खिलौने के छोड़ देने भर में अपनी भाषा गढ़ लेती है।
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