
युगांडा ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की दौड़ में ओलारा ओटुन्नू को उतारा, उम्मीदवारों की संख्या सात हुई
बाल अधिकारों के वैश्विक पैरोकार ओटुन्नू के प्रवेश से अफ्रीका-लैटिन अमेरिका की बहस तेज, 30 जुलाई को सुरक्षा परिषद का पहला गुप्त मतदान।
युगांडा ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए वरिष्ठ राजनयिक ओलारा ओटुन्नू को औपचारिक रूप से नामित किया। इसके साथ ही दावेदारों की संख्या सात हो गई है। ओटुन्नू (75) 1997 से 2005 तक तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान के अधीन बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर विशेष प्रतिनिधि रहे। अन्य उम्मीदवारों में चिली की मिशेल बाशेले, इक्वाडोर की मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, अर्जेंटीना के राफेल ग्रॉसी, कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिनस्पैन, गुयाना की कैरोलिन रॉड्रिग्स-बर्केट और सेनेगल के मैकी साल शामिल हैं। सभी 31 दिसंबर 2026 को पद छोड़ रहे एंटोनियो गुतारेस की जगह लेने की होड़ में हैं।
चुनाव प्रक्रिया 30 जुलाई को सुरक्षा परिषद के पहले 'स्ट्रॉ पोल' से शुरू होगी। 15 सदस्यों वाली परिषद में गुप्त मतदान से हर उम्मीदवार के प्रति रुझान जाना जाएगा। कोई एक प्रत्याशी तब तक चुना नहीं जाएगा जब तक उसे नौ वोट और पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस) में से किसी का वीटो न मिल जाए। चुने गए नाम को औपचारिक मंजूरी के लिए महासभा के पास भेजा जाएगा। नए महासचिव का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
क्षेत्रीय राजनीति इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभा रही है। पारंपरिक रूप से यह पद क्षेत्रीय रोटेशन के आधार पर भरा जाता है और इस बार लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई समूह (ग्रूलैक) की बारी मानी जा रही है। रूसी राजनयिक सूत्रों के अनुसार, मॉस्को अगले महासचिव से यूक्रेन मुद्दे पर "अधिक वस्तुनिष्ठ" रुख और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सख्त अनुपालन की अपेक्षा करता है। वहीं, युगांडा द्वारा अफ्रीकी उम्मीदवार उतारे जाने से पूरे महाद्वीप में यह बहस तेज हो गई है कि क्या अब अफ्रीका से महासचिव बनने का समय है; 1992-96 के बुतरस-घाली के बाद कोई अफ्रीकी इस पद पर नहीं रहा। कुछ अफ्रीकी देशों का मानना है कि ओटुन्नू का अनुभव और कूटनीतिक कौशल महाद्वीप के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है।
ओटुन्नू का करियर संयुक्त राष्ट्र में गहरी पैठ रखता है। उन्होंने 1980-85 में युगांडा के स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता की और अनौपचारिक 'स्ट्रॉ बैलट' प्रक्रिया शुरू की, जिसे 'ओटुन्नू फॉर्मूला' के नाम से जाना जाता है। युगांडा सरकार का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, सशस्त्र संघर्षों और मानवीय संकटों के दौर में उनका शांतिदूत वाला अनुभव संगठन की अगुवाई के लिए उपयुक्त है। फिलहाल सबकी नज़रें 30 जुलाई के पहले गुप्त मतदान पर हैं, जिसके नतीजे आगे की रणनीति और संभावित दल-बदल का संकेत देंगे। इसके बाद अनिश्चित संख्या में और दौर होंगे, जब तक कोई आम सहमति नहीं बन जाती।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
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| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.20 | neutral |
The UN receives a new candidacy without fanfare.
Simple fact-stating creates an impression of completeness and impartiality.
Omits Otunnu's presidential candidacy and his loss to Museveni, which in the African framing is used to contextualize his political profile.
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Uganda throws a last-minute contender into the ring.
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