
दर्द और तनाव से राहत के लिए नए किफायती रास्ते: मेलाटोनिन से गर्दन व्यायाम तक, शोध क्या कहते हैं
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की समीक्षा में मेलाटोनिन को पुराने दर्द में आम दर्दनिवारकों जितना प्रभावी पाया गया, जबकि तनाव और माइग्रेन के लिए जीवनशैली आधारित उपाय सामने आ रहे हैं।
सिडनी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 23 क्लिनिकल परीक्षणों और 2,000 से अधिक प्रतिभागियों के आंकड़ों की समीक्षा कर एक ऐसा निष्कर्ष निकाला है जो पुराने दर्द के प्रबंधन का नक्शा बदल सकता है। उनके अनुसार, नींद लाने में मददगार मेलाटोनिन सप्लीमेंट मांसपेशियों और जोड़ों के पुराने दर्द को 0-100 के पैमाने पर औसतन 9 अंक तक कम कर सकता है, जो एस्पिरिन, नेप्रोक्सन और पैरासिटामोल जैसी सामान्य दर्दनिवारक दवाओं के बराबर है। यह प्रभाव खासतौर पर कमर दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस और फाइब्रोमायल्जिया जैसी स्थितियों में देखा गया। हालांकि सर्जरी के बाद के दर्द में इसका कोई स्पष्ट लाभ नहीं मिला, यह खोज एक सस्ते और सुरक्षित विकल्प की ओर इशारा करती है जो ओपिओइड जैसी जोखिम भरी दवाओं पर निर्भरता घटा सकता है।
इस खोज के पीछे एक दोहरी क्रियाविधि काम करती दिखती है। मेलाटोनिन न केवल दर्द की तीव्रता को कम करता है बल्कि नींद की गुणवत्ता में भी सुधार करता है, और पुराने दर्द से जूझ रहे अधिकांश मरीजों में ये दोनों समस्याएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी होती हैं। अध्ययन में दर्द के लिए 3 से 10 मिलीग्राम की खुराकें इस्तेमाल की गईं, जिनमें 3 मिलीग्राम प्रतिदिन सबसे आम रही। शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि यह मौजूदा उपचारों का विकल्प नहीं बल्कि चिकित्सकीय सलाह के बाद एक पूरक उपाय हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें नींद की भी शिकायत है।
दर्द के अलावा, तनाव और माइग्रेन जैसी स्थितियों के लिए भी गैर-औषधीय हस्तक्षेपों पर नए प्रमाण सामने आ रहे हैं। मेक्सिको की राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय (यूएनएएम) की मनोचिकित्सा शोधकर्ता इंग्रिड वर्गास हुइकोचेआ बताती हैं कि तनाव अपने आप में बीमारी नहीं है, बल्कि जब यह लगातार बना रहे तो शरीर में कोर्टिसोल का स्तर ऊंचा रहकर एकाग्रता, स्मृति और हृदय गति को प्रभावित करता है। इसी तरह, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता गर्दन के ऊपरी हिस्से की गतिशीलता बढ़ाने वाले हल्के व्यायामों के जरिए माइग्रेन की आवृत्ति और गंभीरता कम करने का परीक्षण कर रहे हैं। एक प्रारंभिक अध्ययन में 10 में से 8 प्रतिभागियों ने माइग्रेन में कमी की सूचना दी, और कुछ ने तो दौरे को रोकने में सफलता पाई।
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि इन उपायों का प्रभाव जीवनशैली में छोटे लेकिन नियमित बदलावों से गहराई से जुड़ा है। कोर्टिसोल को संतुलित रखने के लिए 7-9 घंटे की नींद, नियमित मध्यम व्यायाम, ध्यान और सांस लेने की तकनीकें, संतुलित आहार और कैफीन जैसे उत्तेजक पदार्थों का सीमित सेवन प्रभावी साबित हुए हैं। इंडोनेशिया और अन्य देशों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित चर्चाएं भी इसी ओर इशारा करती हैं कि समय प्रबंधन, पर्याप्त आराम और भावनाओं को साझा करने की आदत बर्नआउट से बचाने में अहम भूमिका निभाती है।
अगला ठोस कदम बड़े पैमाने के क्लिनिकल परीक्षणों का होगा। सिडनी की टीम मेलाटोनिन की दर्दनिवारक क्षमता की पुष्टि के लिए और अध्ययनों की जरूरत बता रही है, जबकि क्वींसलैंड विश्वविद्यालय माइग्रेन पर गर्दन व्यायाम के प्रभाव के लिए पहले औपचारिक क्लिनिकल परीक्षण के लिए प्रतिभागियों की भर्ती कर रहा है। इन परिणामों के आधार पर ही यह तय होगा कि क्या ये सस्ते और सुलभ उपाय वास्तव में मुख्यधारा की चिकित्सा पद्धति का हिस्सा बन सकते हैं।
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मेलाटोनिन पुराने दर्द के खिलाफ एक सस्ता और सुरक्षित हथियार है, जो पहले से उपलब्ध है और अधिक जोखिम भरी दवाओं पर निर्भरता कम करने में सक्षम है।
सिडनी विश्वविद्यालय के एक अध्ययन और एक शोधकर्ता के बयान का हवाला देकर वैज्ञानिक विश्वसनीयता प्रदान करता है, कम लागत और सुरक्षा पर जोर देकर इसकी उपयोगिता के बारे में समझाता है।
गर्दन के व्यायाम या कोर्टिसोल प्रबंधन का उल्लेख नहीं करता, मेलाटोनिन को एकमात्र नया हथियार के रूप में प्रस्तुत करता है।
कोर्टिसोल को संतुलन में रखना चाहिए; तनाव दुश्मन है, और जीवनशैली में बदलाव ही समाधान है।
विशेषज्ञों के उद्धरण और व्यावहारिक सुझावों का उपयोग करके कार्रवाई योग्य सलाह की भावना पैदा करता है, वैज्ञानिक अधिकार को रोजमर्रा की प्रासंगिकता के साथ मिलाता है।
गर्दन के व्यायाम का उपचार के रूप में उल्लेख नहीं करता, केवल मेलाटोनिन और कोर्टिसोल पर ध्यान केंद्रित करता है।
गर्दन के व्यायाम एक सरल, घरेलू उपाय हैं जो माइग्रेन को रोक सकते हैं, मूल कारण को लक्षित करते हुए।
एक वीडियो प्रदर्शन और एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के परीक्षण का उपयोग करके समाधान को सुलभ और विश्वसनीय बनाता है।
मेलाटोनिन या कोर्टिसोल का उल्लेख नहीं करता, पूरी तरह से ग्रीवा व्यायाम पर ध्यान केंद्रित करता है।
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