
ट्रंप की चेतावनी: युद्धविराम उल्लंघन पर ईरान को 'अस्तित्व खोने' की धमकी, अमेरिकी हमले जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी ड्रोन हमलों के बाद दूसरे दिन भी सैन्य कार्रवाई की और कहा कि यदि तेहरान ने संघर्षविराम का उल्लंघन जारी रखा तो उसे सैन्य बल से 'खत्म' कर दिया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार 27 जून 2026 को चेतावनी दी कि यदि ईरान युद्धविराम का उल्लंघन करता रहा तो 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा'। यह बयान अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद आया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट पनामा-ध्वज वाले तेल टैंकर 'एम/टी किकू' पर ईरानी ड्रोन हमले की सीधी प्रतिक्रिया थे, जिसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा था।
वाशिंगटन का पक्ष है कि तेहरान ने 17 जून को हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय स्मरणपत्र (एमओयू) का बार-बार उल्लंघन किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी विमानों ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों तथा तटीय रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी कहा कि 'हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा' और ईरान किसी असहमति पर फोन उठा सकता है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि हमलों में ईरानी सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा स्थलों, ड्रोन भंडारण सुविधाओं और माइनलेयर क्षमताओं को लक्षित किया गया, तथा वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन सामान्य बना रहेगा।
तेहरान के राज्य टीवी ने दक्षिणी ईरान के सिरिक क्षेत्र में विस्फोटों की पुष्टि की, परंतु सीधे तौर पर अमेरिकी हमलों पर टिप्पणी नहीं की। ईरानी विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन पर स्मरणपत्र का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि उसने अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर 'रक्षात्मक' हमले किए हैं। बहरीन, जहां एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डा है, ने भी ईरानी ड्रोन हमले की सूचना दी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने अनधिकृत मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की, और तेहरान का मानना है कि उसे जलडमरूमध्य पर नियंत्रण तथा शुल्क वसूलने का पूर्ण अधिकार है।
यह तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से संघर्ष का केंद्र बना रहा है, जहां से दुनिया का लगभग 20-25% कच्चा तेल गुजरता है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करते हैं, स्थिति चिंताजनक है। युद्धविराम के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन ताजा हमलों से अनिश्चितता लौट आई है। विवाद का एक प्रमुख बिंदु नौवहन मार्ग है: अमेरिका ओमान के तट के पास एक दक्षिणी मार्ग को बढ़ावा दे रहा है, जबकि ईरान चाहता है कि जहाज उसके नियंत्रण वाले उत्तरी मार्ग से गुजरें और शुल्क अदा करें।
17 जून के स्मरणपत्र के तहत 60 दिनों की बातचीत की अवधि शुरू हुई थी, जिसमें जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और परमाणु मुद्दे पर वार्ता जैसे प्रावधान शामिल हैं। फिलहाल दोनों पक्षों ने औपचारिक रूप से समझौते को नहीं छोड़ा है, लेकिन लगातार सैन्य कार्रवाइयों ने इसे कमजोर कर दिया है। अमेरिकी नौसेना की देखरेख वाली एक बहुराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने ओमानी मार्ग का विस्तार करने की घोषणा की है, जिससे तेहरान के साथ नया टकराव संभव है। आगामी कदमों में राजनयिक वार्ता जारी रहने की संभावना है, परंतु सैन्य प्रतिक्रिया का सिलसिला भी थमता नहीं दिख रहा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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लैटिन अमेरिकी मीडिया ट्रंप की धमकी को एक अस्तित्वगत अल्टीमेटम के रूप में पेश करता है जो संघर्ष को वापसी से परे ले जाता है। वे अमेरिकी बयानबाजी की असंगति और ईरान के विनाश के जोखिम को रेखांकित करते हैं, वाशिंगटन को अपनी इच्छा थोपने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार शक्ति के रूप में चित्रित करते हैं।
भारतीय और दक्षिण एशियाई मीडिया इस घटना को घटनाओं के क्रम के रूप में रिपोर्ट करता है: ईरानी बुनियादी ढांचे पर नए अमेरिकी हमले और युद्धविराम उल्लंघन के जवाब में ट्रंप की कड़ी चेतावनी। जोर सैन्य अभियानों और आधिकारिक बयानों के समयबद्ध विवरण पर है, व्यापक भू-राजनीतिक विश्लेषण में उलझे बिना।
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