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राजनीतिमंगलवार, 16 जून 2026

अर्जेंटीना में सुप्रीम कोर्ट नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, मोरक्को-रूस में भी सुधार

राष्ट्रपति मिलेई ने डिक्री से नियुक्ति नियमों को सरल बनाया, मोरक्को ने वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति कानून पारित किया और रूस ने अदालतों में छात्रों की भर्ती का प्रस्ताव रखा।

अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने मंगलवार को एक अहम डिक्री (467/2026) जारी कर सुप्रीम कोर्ट के जजों, प्रोक्यूरेटर जनरल और डिफेंडर जनरल की नियुक्ति प्रक्रिया में बुनियादी बदलाव कर दिए। न्याय मंत्री हुआन बाउतिस्ता माहिकेस के हस्ताक्षर वाले इस डिक्री ने कार्यपालिका के समक्ष नागरिक टिप्पणियों और आपत्तियों की प्रशासनिक अवस्था को समाप्त कर उसे सीधे सीनेट को स्थानांतरित कर दिया। साथ ही, राष्ट्रपति को उम्मीदवारों के लिंग, विशेषज्ञता और क्षेत्रीय विविधता पर विचार करने की सिफारिश भी हटा दी गई। यह कदम सीनेट से पहले ही 15 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी मिलने और चार नए लोक अभियोजकों व रक्षकों की तैनाती के बाद उठाया गया, जिससे स्पष्ट है कि प्रशासन ऐतिहासिक रिक्तियों को तेजी से भरना चाहता है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट पाँच के बजाय केवल तीन सदस्यों पर काम कर रही है, और सरकार का तर्क है कि पुरानी प्रक्रियाएँ अनावश्यक विलंब पैदा करती थीं।

दूसरी ओर, मोरक्को में संसदीय प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधि सभा ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। पहला, जैविक कानून 06.26, जो संविधान के अनुच्छेद 49 और 92 के अनुरूप रणनीतिक सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और वरिष्ठ पदों की सूची को संशोधित करता है—इन पदों पर नियुक्ति से पहले सरकारी परिषद में विचार-विमर्श अनिवार्य है। निवेश और सार्वजनिक नीति मूल्यांकन मंत्री करीम जिदान ने इसे प्रस्तुत किया। दूसरा, कानून 41.25, जो अचल संपत्ति अधिकार संहिता और सह-स्वामित्व व्यवस्था में सुधार करता है, ताकि अहस्तांतरणीय संपत्तियों के लेन-देन में आने वाली विसंगतियाँ दूर हों। ये विधायी कदम दर्शाते हैं कि मोरक्को नियुक्ति प्रक्रिया को संसदीय निगरानी में रखते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहता है।

रूस में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य ड्यूमा को एक विधेयक भेजा है जिसमें अदालतों के तंत्र में ‘विशेषज्ञ’ पदों के लिए योग्यता शर्तों को नरम करने का प्रस्ताव है। इसके तहत माध्यमिक व्यावसायिक कानूनी शिक्षा प्राप्त या उच्च कानूनी शिक्षा के दौरान अध्ययनरत छात्र भी इन पदों पर नियुक्त हो सकेंगे, ताकि युवा प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सके। इधर, ब्राजील में सुप्रीम फेडरल कोर्ट (एसटीएफ) और सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) के बीच तनाव उभरा है। एसटीएफ के कुछ न्यायाधीश टीएसई के फैसलों की समीक्षा करने वाली संस्था की तरह काम करने की तैयारी कर रहे हैं, जो रोराइमा में उपचुनावों को लेकर एक साथ चल रही आभासी सुनवाइयों में सामने आया। यह खींचतान न्यायिक स्वायत्तता और आंतरिक संतुलन की चुनौतियों को उजागर करती है।

इन घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो वैश्विक स्तर पर न्यायिक नियुक्तियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने की कोशिशें स्पष्ट होती हैं। अर्जेंटीना का डिक्री-आधारित दृष्टिकोण कार्यपालिका को अधिक छूट देता है, जिससे पारदर्शिता और विविधता पर प्रश्न उठ सकते हैं, जबकि मोरक्को का संसदीय मार्ग संस्थागत सहमति को बनाए रखता है। रूस का प्रस्ताव न्यायिक कर्मचारियों की कमी को दूर करने का व्यावहारिक उपाय है, और ब्राजील का आंतरिक संघर्ष बताता है कि सुधारों के बीच भी न्यायपालिका के भीतर शक्ति संतुलन नाजुक रहता है। आने वाले महीनों में इन बदलावों का असर न्यायिक स्वतंत्रता, नियुक्तियों की गुणवत्ता और जनता के विश्वास पर पड़ेगा, खासकर तब जब अर्जेंटीना में रिक्त सीटों को भरने की होड़ और ब्राजील में चुनावी विवादों का सिलसिला जारी है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

48%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa arabo levante-MaghrebStampa latinoamericana
Stampa arabo levante-Maghreb
pragmatismodistacco

मोरक्को तकनीकी सुधारों को आगे बढ़ा रहा है: प्रतिनिधि सभा ने वरिष्ठ नियुक्तियों पर जैविक कानून, संशोधित वास्तविक अधिकार संहिता और प्रत्यक्ष सामाजिक सहायता व्यवस्था को अपनाया। रिपोर्टिंग प्रक्रियात्मक है, प्रशासनिक समायोजन पर केंद्रित है, राजनीतिक संघर्ष का कोई संकेत नहीं।

Stampa latinoamericana/ mercato
allarmescetticismourgenza

लैटिन अमेरिका में, न्यायिक सुधार सत्ता संघर्षों को उजागर करते हैं: ब्राज़ील का सर्वोच्च न्यायालय आंतरिक तनाव के बीच चुनावी फैसलों की समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है, जबकि अर्जेंटीना सरकार डिक्री द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की नियुक्तियों में तेजी लाने पर बहस कर रही है, जिससे संस्थागत नियंत्रण पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

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मंगलवार, 16 जून 2026

अर्जेंटीना में सुप्रीम कोर्ट नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, मोरक्को-रूस में भी सुधार

राष्ट्रपति मिलेई ने डिक्री से नियुक्ति नियमों को सरल बनाया, मोरक्को ने वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति कानून पारित किया और रूस ने अदालतों में छात्रों की भर्ती का प्रस्ताव रखा।

अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने मंगलवार को एक अहम डिक्री (467/2026) जारी कर सुप्रीम कोर्ट के जजों, प्रोक्यूरेटर जनरल और डिफेंडर जनरल की नियुक्ति प्रक्रिया में बुनियादी बदलाव कर दिए। न्याय मंत्री हुआन बाउतिस्ता माहिकेस के हस्ताक्षर वाले इस डिक्री ने कार्यपालिका के समक्ष नागरिक टिप्पणियों और आपत्तियों की प्रशासनिक अवस्था को समाप्त कर उसे सीधे सीनेट को स्थानांतरित कर दिया। साथ ही, राष्ट्रपति को उम्मीदवारों के लिंग, विशेषज्ञता और क्षेत्रीय विविधता पर विचार करने की सिफारिश भी हटा दी गई। यह कदम सीनेट से पहले ही 15 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी मिलने और चार नए लोक अभियोजकों व रक्षकों की तैनाती के बाद उठाया गया, जिससे स्पष्ट है कि प्रशासन ऐतिहासिक रिक्तियों को तेजी से भरना चाहता है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट पाँच के बजाय केवल तीन सदस्यों पर काम कर रही है, और सरकार का तर्क है कि पुरानी प्रक्रियाएँ अनावश्यक विलंब पैदा करती थीं।

दूसरी ओर, मोरक्को में संसदीय प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधि सभा ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। पहला, जैविक कानून 06.26, जो संविधान के अनुच्छेद 49 और 92 के अनुरूप रणनीतिक सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और वरिष्ठ पदों की सूची को संशोधित करता है—इन पदों पर नियुक्ति से पहले सरकारी परिषद में विचार-विमर्श अनिवार्य है। निवेश और सार्वजनिक नीति मूल्यांकन मंत्री करीम जिदान ने इसे प्रस्तुत किया। दूसरा, कानून 41.25, जो अचल संपत्ति अधिकार संहिता और सह-स्वामित्व व्यवस्था में सुधार करता है, ताकि अहस्तांतरणीय संपत्तियों के लेन-देन में आने वाली विसंगतियाँ दूर हों। ये विधायी कदम दर्शाते हैं कि मोरक्को नियुक्ति प्रक्रिया को संसदीय निगरानी में रखते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहता है।

रूस में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य ड्यूमा को एक विधेयक भेजा है जिसमें अदालतों के तंत्र में ‘विशेषज्ञ’ पदों के लिए योग्यता शर्तों को नरम करने का प्रस्ताव है। इसके तहत माध्यमिक व्यावसायिक कानूनी शिक्षा प्राप्त या उच्च कानूनी शिक्षा के दौरान अध्ययनरत छात्र भी इन पदों पर नियुक्त हो सकेंगे, ताकि युवा प्रतिभाओं को आकर्षित किया जा सके। इधर, ब्राजील में सुप्रीम फेडरल कोर्ट (एसटीएफ) और सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) के बीच तनाव उभरा है। एसटीएफ के कुछ न्यायाधीश टीएसई के फैसलों की समीक्षा करने वाली संस्था की तरह काम करने की तैयारी कर रहे हैं, जो रोराइमा में उपचुनावों को लेकर एक साथ चल रही आभासी सुनवाइयों में सामने आया। यह खींचतान न्यायिक स्वायत्तता और आंतरिक संतुलन की चुनौतियों को उजागर करती है।

इन घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो वैश्विक स्तर पर न्यायिक नियुक्तियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने की कोशिशें स्पष्ट होती हैं। अर्जेंटीना का डिक्री-आधारित दृष्टिकोण कार्यपालिका को अधिक छूट देता है, जिससे पारदर्शिता और विविधता पर प्रश्न उठ सकते हैं, जबकि मोरक्को का संसदीय मार्ग संस्थागत सहमति को बनाए रखता है। रूस का प्रस्ताव न्यायिक कर्मचारियों की कमी को दूर करने का व्यावहारिक उपाय है, और ब्राजील का आंतरिक संघर्ष बताता है कि सुधारों के बीच भी न्यायपालिका के भीतर शक्ति संतुलन नाजुक रहता है। आने वाले महीनों में इन बदलावों का असर न्यायिक स्वतंत्रता, नियुक्तियों की गुणवत्ता और जनता के विश्वास पर पड़ेगा, खासकर तब जब अर्जेंटीना में रिक्त सीटों को भरने की होड़ और ब्राजील में चुनावी विवादों का सिलसिला जारी है।

स्रोतों में मतभेद

राजनीति · 2 स्रोत · 1 भाषा

48%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र40%
निंदक60%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa arabo levante-MaghrebStampa latinoamericana
Stampa arabo levante-Maghreb
pragmatismodistacco

मोरक्को तकनीकी सुधारों को आगे बढ़ा रहा है: प्रतिनिधि सभा ने वरिष्ठ नियुक्तियों पर जैविक कानून, संशोधित वास्तविक अधिकार संहिता और प्रत्यक्ष सामाजिक सहायता व्यवस्था को अपनाया। रिपोर्टिंग प्रक्रियात्मक है, प्रशासनिक समायोजन पर केंद्रित है, राजनीतिक संघर्ष का कोई संकेत नहीं।

Stampa latinoamericana/ mercato
allarmescetticismourgenza

लैटिन अमेरिका में, न्यायिक सुधार सत्ता संघर्षों को उजागर करते हैं: ब्राज़ील का सर्वोच्च न्यायालय आंतरिक तनाव के बीच चुनावी फैसलों की समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है, जबकि अर्जेंटीना सरकार डिक्री द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की नियुक्तियों में तेजी लाने पर बहस कर रही है, जिससे संस्थागत नियंत्रण पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

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