
विश्व कप के शोर में एक मौन शोक: गाकपो की चर्च की मोमबत्ती और खेल के मैदान का संकेत
नीदरलैंड के स्ट्राइकर कोडी गाकपो ने विश्व कप 2026 के दौरान अपने अजन्मे बेटे को खोने के बाद निजता की अपील की, लेकिन टीम के साथ बने रहने का निर्णय लिया।
चर्च के अंदर एक मोमबत्ती जल रही थी। बाहर खेल के मैदान में उनका दो साल का बेटा सैमुअल खेल रहा था, और वहाँ सिर्फ एक और बच्चा था—उसका नाम एलिजाह था। नोआ वान डेर बिजल ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'ईश्वर का इससे सुंदर संकेत नहीं हो सकता था।' यह वह क्षण था जब नीदरलैंड के स्टार फुटबॉलर कोडी गाकपो और उनकी साथी ने अपने अजन्मे बेटे एलिजाह राफेल गाकपो की मृत्यु की खबर दुनिया के साथ साझा की। गर्भावस्था के दौरान हुई इस क्षति ने विश्व कप 2026 के रंगारंग माहौल को एकाएक गहरी उदासी में डुबो दिया।
यह त्रासदी उस समय सामने आई जब गाकपो उत्तरी अमेरिका में आयोजित विश्व कप में नीदरलैंड की अगुआई कर रहे थे। उन्होंने ग्रुप चरण में स्वीडन के खिलाफ दो गोल किए थे और टीम को नॉकआउट में पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी। शनिवार को नोआ ने सोशल मीडिया पर 'टूटे हुए दिल' के साथ यह समाचार साझा किया, जिसके बाद गाकपो ने खुद एक पोस्ट में 'गोपनीयता और स्थान' की माँग की। डच फुटबॉल महासंघ (KNVB) ने बयान जारी कर कहा कि गाकपो ने अपनी साथी के साथ सहमति से टीम के साथ बने रहने का फैसला किया है, और परिवार को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है।
वैश्विक मीडिया ने इस घटना को एक संवेदनशील मानवीय क्षण के रूप में देखा। यूरोपीय अखबारों ने इसे 'विश्व कप की सबसे दुखद कहानी' करार दिया, जबकि अरब जगत की मीडिया ने मोरक्को के खिलाफ आगामी मुकाबले से पहले खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक स्थिति पर सवाल उठाए। ब्राज़ील और पुर्तगाली भाषी मीडिया ने 'सहज गर्भपात' शब्द का इस्तेमाल करते हुए इस दुख को रेखांकित किया। भारत में भी, जहाँ फुटबॉल प्रशंसकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इस खबर ने खेल प्रेमियों को भावुक कर दिया। सोशल मीडिया पर दुनिया भर से समर्थन के संदेश उमड़े, जिसमें प्रशंसकों ने गाकपो के साहस की सराहना की।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बड़े खेल आयोजनों की चकाचौंध के पीछे खिलाड़ियों के निजी जीवन की नाजुक परतें छिपी होती हैं। गाकपो का मैदान पर उतरना, गोल करना और फिर एक पिता के रूप में असह्य पीड़ा सहना—यह विरोधाभास खेल जगत की उस सच्चाई को उजागर करता है जहाँ सार्वजनिक कर्तव्य और व्यक्तिगत शोक एक साथ चलते हैं। नोआ ने जिस तरह चर्च की मोमबत्ती और खेल के मैदान के उस संयोग को 'ईश्वर का संकेत' बताया, वह एक ऐसी छवि है जो स्टेडियमों की गूँज से कहीं अधिक देर तक याद रहेगी।
अंततः, उस छोटे से कंबल और बुनी हुई टोपी पर रखे दो हाथों की तस्वीर, जो नोआ ने साझा की, एक स्थायी स्मृति बन गई। विश्व कप के शोर में, एक चर्च के खेल के मैदान में मिला एलिजाह नाम का बच्चा, गाकपो परिवार के लिए यह याद दिलाने आया कि उनका बेटा कभी दूर नहीं है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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दंपति ने अपने बच्चे के गर्भपात के साथ एक गहरी क्षति का अनुभव किया। अपने दुःख में, उन्होंने चर्च की यात्रा और खेल के मैदान में एलिजा नाम के एक बच्चे से मुलाकात में सांत्वना पाई, इसे एक दैवीय संकेत माना कि उनका बेटा हमेशा पास है। उन्होंने इस कठिन समय में गोपनीयता का अनुरोध किया है।
विश्व कप दो व्यक्तिगत क्षतियों से प्रभावित रहा: फ्रांसीसी कोच की मां की मृत्यु और डच स्ट्राइकर की साथी का गर्भपात। उत्सव और शोक के इस विरोधाभास को 'एक शादी और दो अंतिम संस्कार' वाक्यांश में पकड़ा गया है। जहां डेसचैम्प्स अंतिम संस्कार के लिए घर लौटे, वहीं गाक्पो ने सोशल मीडिया पर अपने परिवार की त्रासदी साझा की।
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