
व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर पर भारत सरकार की रोक, तीन दिन में मांगा जवाब
गोपनीयता बढ़ाने के दावे के बीच सरकार को धोखाधड़ी और प्रतिरूपण का खतरा, मेटा को परामर्श पूरा होने तक रोलआउट रोकने का निर्देश।
भारत सरकार ने व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर तत्काल रोक लगाते हुए मेटा को तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 1 जुलाई 2026 को जारी नोटिस में कहा कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार के साथ परामर्श पूरा नहीं हो जाता, तब तक यह सुविधा भारत में शुरू नहीं की जाए। इस कदम का सीधा असर देश के 80 करोड़ से अधिक व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा, जिनके लिए फोन नंबर छिपाकर बातचीत का विकल्प फिलहाल स्थगित हो गया है।
यह फीचर उपयोगकर्ताओं को एक अद्वितीय यूजरनेम (@Name123 जैसे) आरक्षित करने की अनुमति देता है, जिससे पहली बार संपर्क करने पर फोन नंबर दिखाई नहीं देता। व्हाट्सएप ने इसे गोपनीयता की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव बताया है, खासकर सामूहिक चैट या नए परिचितों से बातचीत के लिए। कंपनी ने 29 जून से दुनिया भर में नाम आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की थी और वर्ष के अंत तक इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना थी। साथ ही एक वैकल्पिक 'यूजरनेम की' भी रखी गई है, जिसे जाने बिना कोई अजनबी संपर्क नहीं कर सकेगा।
भारतीय अधिकारियों की चिंता प्रतिरूपण और साइबर धोखाधड़ी को लेकर है। मंत्रालय के अनुसार, यूजरनेम के जरिए कोई भी व्यक्ति सरकारी एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों या जानी-मानी हस्तियों के नाम से मिलते-जुलते हैंडल बनाकर लोगों को ठग सकता है। दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के तहत मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को सत्यापित मोबाइल नंबर से जोड़ना अनिवार्य है, जिससे यह फीचर टकराता नजर आता है। पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ फैसल कावूसा जैसी हस्तियों ने भी आशंका जताई है कि मिलते-जुलते यूजरनेम धोखाधड़ी का बड़ा जरिया बन सकते हैं।
दूसरी ओर, लैटिन अमेरिकी और मध्य-पूर्वी देशों में इस फीचर को गोपनीयता के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अर्जेंटीना के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रोड्रिगो अल्वारेज़ ने इसे व्हाट्सएप के बिजनेस मॉडल में अब तक का सबसे अहम बदलाव बताया, जो टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्रतिस्पर्धियों की मौजूदा सुविधाओं से मेल खाता है। व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं और सत्यापित मेटा अकाउंट्स के नाम पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं, और किसी अकाउंट द्वारा नए संपर्कों तक पहुंचने की सीमा तय की गई है।
अब सबकी निगाहें मेटा के जवाब और आगामी परामर्श पर टिकी हैं। सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक समाधान नहीं निकला तो इस सुविधा को पूरी तरह अवरुद्ध करने के कानूनी उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। व्हाट्सएप को अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं को भारतीय नियामकीय ढांचे के अनुरूप साबित करना होगा, वरना दुनिया के सबसे बड़े बाजार में यह महत्वाकांक्षी प्राइवेसी अपडेट अटक सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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व्हाट्सएप ने यूजरनेम बनाने की सुविधा शुरू की है, जिसे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ गोपनीयता के लिए एक अहम कदम मानते हैं। अब उपयोगकर्ता अपना फोन नंबर बताए बिना बातचीत कर सकते हैं, जिससे व्यक्तिगत डेटा पर अधिक नियंत्रण मिलता है। यह सुविधा दुनिया भर के 3 अरब उपयोगकर्ताओं के लिए चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है।
भारत सरकार व्हाट्सएप के नए यूजरनेम फीचर की जांच कर रही है, क्योंकि आशंका है कि इससे प्रतिरूपण और ऑनलाइन धोखाधड़ी को बढ़ावा मिल सकता है। अधिकारी गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का आकलन कर रहे हैं, और जोखिम पाए जाने पर प्लेटफॉर्म के खिलाफ नियामक कार्रवाई हो सकती है। यह कदम इस चिंता को दर्शाता है कि गुमनामी का दुरुपयोग बुरे तत्वों द्वारा किया जा सकता है।
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