
अमेरिकी सेना का प्रशांत महासागर में एक और घातक हमला, एक की मौत, दो बचे
ड्रग तस्करी के संदेह में अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत में नाव पर हमला कर एक व्यक्ति को मार डाला, सितंबर से अब तक 208 मौतें हो चुकी हैं।
अमेरिकी दक्षिणी कमान (साउथकॉम) ने 16 जून को पूर्वी प्रशांत महासागर में एक संदिग्ध नशा तस्कर नाव पर घातक हमला किया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग बच गए। जनरल फ्रांसिस एल. डोनोवन के निर्देश पर ज्वाइंट टास्क फोर्स सदर्न स्पीयर ने यह 'लीथल काइनेटिक स्ट्राइक' अंजाम दी। सेना का दावा है कि खुफिया जानकारी से पुष्टि हुई थी कि नाव ज्ञात तस्करी मार्गों पर चल रही थी और 'नामित आतंकवादी संगठनों' द्वारा संचालित थी, लेकिन नाव पर वास्तव में मादक पदार्थ होने का कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया।
यह हमला डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा सितंबर 2025 में लैटिन अमेरिका में तथाकथित 'नार्को-आतंकवादियों' के खिलाफ शुरू किए गए व्यापक सैन्य अभियान की ताजा कड़ी है। इंडोनेशियाई, स्पेनिश और अंग्रेजी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक कम से कम 208 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिकी सेना पूर्वी प्रशांत और कैरिबियन सागर में दर्जनों नावों को निशाना बना चुकी है, और अधिकतर मामलों में कोई जीवित नहीं बचता। वाशिंगटन इसे कार्टेल के खिलाफ 'सशस्त्र संघर्ष' का दर्जा देता है, जबकि मानवाधिकार संगठन इन हमलों को न्यायेतर हत्या करार देते हैं।
लैटिन अमेरिकी और मध्य पूर्वी मीडिया में इस कार्रवाई की तीखी आलोचना हुई है। लेबनानी अखबार अन-नहर ने लिखा कि वाशिंगटन इसे 'ड्रग आतंकवादियों' को निशाना बनाना कहता है, जबकि अधिकार समूह इसे अवैध हत्या मानते हैं। ब्राजील के सीएनएन ब्रासील और जी1 ने बताया कि सेना ने हमले का वीडियो जारी किया, लेकिन स्वतंत्र रूप से उसकी लोकेशन और तारीख की पुष्टि नहीं हो सकी। ईरानी मीडिया हमशहरी ऑनलाइन ने इसे 'बहानेबाजी की नीति' बताया। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस सबूत के ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं और निर्दोष मछुआरों के मारे जाने का खतरा बढ़ाते हैं।
यह सैन्य रणनीति समुद्री सुरक्षा के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकती है। हिंद महासागर क्षेत्र, जो दक्षिण एशिया से सटा है, भी ड्रग तस्करी के मार्गों से प्रभावित है—अफगानिस्तान से हेरोइन का समुद्री रास्ता भारत और श्रीलंका के करीब से गुजरता है। यदि अमेरिकी मॉडल को अन्य शक्तियां अपनाती हैं, तो क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। फिलहाल, ट्रंप प्रशासन के इस अभियान का कोई अंत नजर नहीं आता, और हर हमले के साथ कानूनी व नैतिक सवाल और गहराते जा रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी सेना ने प्रशांत महासागर में एक और जहाज पर हमला किया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और नशीली दवाओं के खिलाफ उसके अभियान में मरने वालों की संख्या 200 से अधिक हो गई। मानवाधिकार समूह इन कार्रवाइयों को न्यायेतर हत्याएं बताकर निंदा करते हैं, जबकि वाशिंगटन जोर देता है कि वे 'नार्को-आतंकवादियों' को निशाना बना रहे हैं। बढ़ती मौतों का आंकड़ा हस्तक्षेप की वैधता पर विवाद को तेज कर रहा है।
पेंटागन ने पूर्वी प्रशांत में संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करी पोत पर हमले की पुष्टि की, जिसमें एक की मौत हुई और दो बच गए। यह नार्को-आतंकवाद के खिलाफ महीनों से चल रहे अभियान का नवीनतम मामला है जिसमें कम से कम 208 लोग मारे जा चुके हैं। इस कार्रवाई को तस्करी मार्गों को बाधित करने के लिए एक आवश्यक सुरक्षा उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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