
यूरोप में भीषण गर्मी से 1,300 से अधिक मौतें, कई देशों में तापमान के रिकॉर्ड टूटे
डब्ल्यूएचओ के अनुसार 21 जून से अब तक पूरे महाद्वीप में अत्यधिक तापमान से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 1,300 पार, फ्रांस में अकेले तीन दिनों में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज।
पश्चिमी और मध्य यूरोप में जून के मध्य से जारी भीषण गर्मी की लहर ने अब तक 1,300 से अधिक लोगों की जान ले ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 21 जून से लेकर अब तक पूरे महाद्वीप में अत्यधिक तापमान से जुड़ी अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। फ्रांस, जर्मनी, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी सहित कई देशों में तापमान ने सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ दिए। फ्रांस के बोर्दो में पारा 45 डिग्री सेल्सियस और पेरिस में 42 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि जर्मनी के कुछ हिस्सों में 41.7 डिग्री और चेक गणराज्य में 41.9 डिग्री दर्ज किया गया।
मौतों के आंकड़ों को लेकर विभिन्न स्रोतों में थोड़ा अंतर है। फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि अकेले तीन दिनों में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें हुईं, जिनमें अधिकांश 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग थे। मई में आई एक अन्य गर्मी की लहर में भी 300 से अधिक मौतें दर्ज की गई थीं। स्पेन की मृत्यु निगरानी प्रणाली ने कुछ ही दिनों में 300 से अधिक अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है। वहीं, डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय निदेशक ने दावा किया कि इटली में 24 घंटों में पांच मौतें हुईं, लेकिन इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस आंकड़े से इनकार करते हुए कहा कि उनके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है।
गर्मी की वजह से बुनियादी ढांचे पर भी व्यापक असर पड़ा है। जर्मनी के लाइपज़िग शहर में ट्राम पटरियों की जोड़ों में भरी सीलिंग सामग्री पिघल गई, जिससे पूरी ट्राम सेवा ठप हो गई और नागरिकों से इसे खुरच कर हटाने में मदद करने की अपील की गई। हंगरी में 120 से अधिक स्थानों पर पानी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि ऑस्ट्रिया में भारी बारिश और मिट्टी के धंसने से एक बस फंस गई। स्विट्ज़रलैंड के अस्पतालों में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि दर्ज की गई। यूरोप के अधिकांश घरों में वातानुकूलन नहीं है और इमारतें सर्दियों में गर्मी बनाए रखने के लिए बनाई गई हैं, जो इस संकट को और गंभीर बना रहा है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, यह गर्मी की लहर मुख्य रूप से एक 'हीट डोम' के कारण है—उच्च वायुमंडलीय दबाव का एक विशाल क्षेत्र जो बादलों को बनने से रोकता है और उत्तरी अफ्रीका से गर्म हवा खींचता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा कि लगातार साल-दर-साल आने वाली ऐसी तीव्र गर्मी की लहरों को अब केवल मौसम का संयोग नहीं माना जा सकता, बल्कि ये दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं। फ्रांस में वातानुकूलन को लेकर सांस्कृतिक विरोध के बावजूद, कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि देश की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक जीवाश्म-मुक्त है, इसलिए एसी के इस्तेमाल से उत्सर्जन में वृद्धि नहीं होगी और यह जानें बचा सकता है। इंडोनेशिया के मौसम विज्ञान विभाग ने स्पष्ट किया कि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में इस तरह की गर्मी की लहरें सामान्य नहीं हैं, क्योंकि वहां का वायुमंडलीय गतिकी अलग है।
डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय क्षेत्रीय निदेशक ने इस गर्मी की लहर को 'ड्रेस रिहर्सल' बताते हुए कहा कि भविष्य की गर्मियाँ और कठिन होंगी। उन्होंने 6 जुलाई को सभी सदस्य देशों की आपात बैठक बुलाई है। फिलहाल, मौतों के आंकड़े प्रारंभिक हैं और कई देशों में स्थिति की समीक्षा जारी है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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फ्रांस में मई की लू के दौरान 300 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 75 वर्ष से अधिक आयु के लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने कई क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। रिपोर्ट तथ्यों पर केंद्रित है और सबसे कमज़ोर आयु वर्ग में मृत्यु दर में 15% की वृद्धि को रेखांकित करती है।
फ्रांसीसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने मई की पाँच दिवसीय लू के दौरान अनुमान से कम से कम 300 अधिक मौतों की सूचना दी, जो इस वर्ष की पहली लू थी। संक्षिप्त प्रेषण बिना किसी अतिरिक्त टिप्पणी के केवल आधिकारिक बयान को प्रसारित करता है।
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