
ट्रंप की मिली-जुली चेतावनी से तेल कीमतों में उथल-पुथल, ब्रेंट 80 डॉलर के आसपास
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद और राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी के बीच कच्चे तेल का बाजार अनिश्चितता से जूझ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बुधवार को एक नाटकीय मोड़ लिया, जब ब्रेंट क्रूड संक्षिप्त रूप से 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलने के बाद फिर से ऊपर उछल गया। इस उतार-चढ़ाव की जड़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परस्पर विरोधी संकेत थे। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की खबरों ने बाजार को राहत दी, वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने चेतावनी दी कि यह समझौता अंतिम नहीं है और यदि वे संतुष्ट नहीं हुए तो सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। इस अनिश्चितता के चलते ब्रेंट वायदा 79.27 डॉलर से 80.09 डॉलर के दायरे में झूलता रहा, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 75.97 से 76.79 डॉलर के बीच रहा।
लैटिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों ने इस गिरावट को ‘ट्रंप पुट’ की संज्ञा दी—यानी बाजार यह मानकर चल रहा है कि सबसे खराब ऊर्जा संकट पीछे छूट सकता है। अर्जेंटीना के सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात पहले ही बढ़ने लगा है, जिससे वैश्विक व्यापार की संभावनाएँ बेहतर हुई हैं। रूसी एजेंसियों ने समझौता ज्ञापन के विवरण पर प्रकाश डाला, जिसमें ईरानी तेल और पेट्रोरसायन निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील देने का प्रावधान है। इसी आशावाद के कारण मंगलवार को ब्रेंट 5.1 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई 5.8 प्रतिशत तक लुढ़क गया था।
पश्चिम एशिया और ब्राज़ीलियाई विश्लेषणों ने इस तस्वीर में दो अहम आयाम जोड़े। अरब मीडिया ने ट्रंप की उस टिप्पणी को रेखांकित किया जिसमें उन्होंने कहा कि यदि ईरान शर्तों का पालन नहीं करता तो युद्ध फिर छिड़ सकता है। वहीं ब्राज़ील की रिपोर्टों में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के पूर्वानुमान का हवाला दिया गया, जिसके अनुसार 2027 में वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी उछाल आएगा और बाजार अधिशेष की स्थिति में पहुँच सकता है। इस दीर्घकालिक परिदृश्य ने भी कीमतों में तेज सुधार की गुंजाइश को सीमित कर दिया।
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह उथल-पुथल दोहरी मार झेल रही अर्थव्यवस्था के लिए राहत और जोखिम दोनों लेकर आई है। होर्मुज के फिर खुलने और ईरानी तेल की वापसी से कच्चे तेल की लागत घट सकती है, जिससे चालू खाता घाटा और मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा। लेकिन ट्रंप की सैन्य धमकियाँ बताती हैं कि भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह टले नहीं हैं। अमेरिकी भंडार के आँकड़े उम्मीद से कहीं खराब आने से भी कीमतों को अस्थायी सहारा मिला।
कुल मिलाकर, तेल बाजार फिलहाल एक चौराहे पर खड़ा है। शुक्रवार को अपेक्षित समझौता यदि बिना किसी नए तनाव के संपन्न होता है, तो ब्रेंट 80 डॉलर के नीचे स्थिर हो सकता है और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को संबल मिलेगा। लेकिन ट्रंप प्रशासन की अप्रत्याशित शैली और आईईए का 2027 के अधिशेष का अनुमान यह संकेत देते हैं कि कीमतों में तेज उछाल की संभावना कम है, जबकि अल्पकालिक झटके बने रहेंगे। निवेशकों की निगाहें अब स्विट्ज़रलैंड वार्ता के नतीजे और होर्मुज में यातायात की वास्तविक बहाली पर टिकी हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ट्रंप की मिली-जुली चेतावनियों पर व्यापारियों की प्रतिक्रिया से तेल की कीमतें 80 डॉलर के आसपास झूलती रहीं। बाजार 'ट्रंप पुट' पर दांव लगा रहा है, यह मानते हुए कि राष्ट्रपति अंततः ओरमुज को फिर से खोलने का सौदा सुनिश्चित करेंगे, हालांकि उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान समझौते के अंतिम न होने की चेतावनी के बाद तेल की गिरावट डगमगा गई, जिससे ब्रेंट संक्षेप में 80 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। बाजार इस जोखिम से जूझ रहा है कि युद्धविराम टूट सकता है, जिससे आपूर्ति व्यवधान की आशंकाएं बनी हुई हैं।
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