
अमेरिका-ईरान युद्ध: 11वीं रात भी हमले जारी, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर
अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हमले किए, जबकि ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बुधवार तड़के ईरान में सैन्य ठिकानों पर नए हमले शुरू किए, जो लगातार 11वीं रात की कार्रवाई है। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी के लिए ईरान की खतरा पैदा करने की क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि हमले तेज होंगे और पिकैक्स पर्वत स्थित भूमिगत परमाणु स्थल को भी जल्द निशाना बनाया जा सकता है। इस बीच, ईरान के खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया तो इसे पूरे क्षेत्र में संघर्ष का विस्तार माना जाएगा और सभी अमेरिकी व सहयोगी परिसंपत्तियों पर निर्णायक हमला किया जाएगा।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया और बहरीन, कुवैत तथा जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन में अमेज़न के एक डेटा सेंटर पर क्रूज मिसाइलें दागने का दावा किया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इसे “पूर्ण पैमाने का युद्ध” घोषित किया। क्षेत्रीय सैन्य सूत्रों के अनुसार, जॉर्डन ने पांच ईरानी ड्रोन मार गिराए, बहरीन ने कहा कि ड्रोन ने उसके वायु नेविगेशन सिस्टम को निशाना बनाया लेकिन यातायात अप्रभावित रहा, और कुवैत ने भी ड्रोन इंटरसेप्ट किए।
इस संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में गिरावट आई है और कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2% की वृद्धि हुई है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की, जिससे लाल सागर मार्ग भी प्रभावित हो सकता है। समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के अनुसार, एक टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से नुकसान पहुंचा और चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। दक्षिण एशिया के लिए, ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए जलडमरूमध्य में लंबे समय तक अस्थिरता आपूर्ति श्रृंखला और मूल्य स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, हाल के दिनों में जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर ईरानी हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए, जिनमें से दो की पहचान 19 वर्षीय प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस और 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान के रूप में हुई। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी हमलों में अब तक 50 नागरिक मारे गए और 500 घायल हुए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के मद्देनजर अपने नागरिकों के लिए वैश्विक सतर्कता जारी की है।
युद्धविराम के पतन के बावजूद, ईरानी अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारी “बेताबी से मिलना चाहते हैं” लेकिन जब तक वे सार्थक बातचीत के लिए तैयार नहीं होते, अमेरिका की कोई दिलचस्पी नहीं है। फिलहाल, सैन्य अभियान जारी हैं और क्षेत्रीय शक्तियां अपनी सुरक्षा स्थिति मजबूत कर रही हैं। अगले कूटनीतिक कदम की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन अप्रत्यक्ष वार्ता के संकेत संघर्ष के समानांतर बने हुए हैं।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
The US military reports its own strikes, citing CENTCOM. The narrative stays within the US official account, omitting any Iranian response.
By relying solely on official US military statements, the bloc presents the strikes as a routine, justified operation, ignoring the broader conflict.
The bloc omits Iran's retaliatory strikes and declaration of full-scale war, which would present the conflict as a mutual escalation rather than a unilateral US operation.
The US military and administration speak through official statements and casualty reports. The narrative frames Iran as the aggressor retaliating against justified US strikes.
By presenting both sides' actions but attributing the initiative to the US and the retaliation to Iran, the bloc justifies US strikes and portrays Iran as the escalator.
The bloc omits Iran's stated reasons for retaliation, such as defending against US aggression, and downplays the US role in initiating the strikes.
Both US and Iranian officials are quoted, with the narrative highlighting the mutual escalation and the declaration of war. The tone is alarmist but balanced.
By framing the conflict as a 'full-scale war' and quoting both sides, the bloc creates a sense of dramatic inevitability, making the escalation appear unavoidable.
The bloc omits the involvement of Houthi forces and the naval blockade, which would broaden the conflict beyond US-Iran.
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