
जून में वैश्विक सेवा क्षेत्र में व्यापक नरमी, रोजगार और मांग पर दबाव
संयुक्त अरब अमीरात, भारत, ब्रिटेन और रूस के सेवा पीएमआई आंकड़े मांग में कमी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण गतिविधियों में सुस्ती की ओर इशारा करते हैं।
जून 2026 के क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) ने कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सेवा क्षेत्र में एक साथ नरमी दर्ज की, जो वैश्विक मांग में व्यापक कमजोरी का संकेत है। संयुक्त अरब अमीरात का गैर-तेल निजी क्षेत्र पीएमआई गिरकर 50.8 पर आ गया, जो फरवरी 2021 के बाद सबसे कमजोर विस्तार है और मात्र स्थिरता की सीमा से थोड़ा ऊपर है। ब्रिटेन (48.8) और रूस (48.2) का सेवा सूचकांक लगातार दूसरे महीने संकुचन क्षेत्र में रहा, जबकि भारत का पीएमआई 57.4 तक गिरकर 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस सुस्ती का तत्काल प्रभाव श्रम बाजार पर पड़ा—यूएई में रोजगार चार वर्षों में पहली बार घटा, ब्रिटेन और रूस में छंटनी की गति तेज हुई, और भारत में नियुक्तियां लगभग थम गईं।
इस साझा नरमी के पीछे पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव एक प्रमुख कारक के रूप में उभरा। यूएई में, क्षेत्रीय संघर्ष ने ग्राहकों के खर्च के फैसलों को टाल दिया और पर्यटन गतिविधियों को प्रभावित किया। ब्रिटेन की कंपनियों ने ईरान युद्ध से जुड़ी लागत वृद्धि और ग्राहकों में जोखिम-परहेज की भावना को रेखांकित किया। भारत में, पश्चिम एशिया से जुड़े व्यवधानों में कमी ने लागत दबाव को कुछ हद तक घटाया, लेकिन घरेलू प्रतिस्पर्धा और कमजोर मांग ने गति को धीमा रखा। रूस में, क्रय शक्ति में गिरावट के कारण बिक्री में लगातार तीसरे महीने कमी आई। इन वैश्विक कारकों के अलावा, ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद राजनीतिक अनिश्चितता ने भी कारोबारी भरोसे को प्रभावित किया।
कंपनियों ने बढ़ती लागत और पतले मार्जिन के बीच खर्चों पर नियंत्रण को प्राथमिकता दी। यूएई में इनपुट मूल्य मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से ऊंची बनी रही, जबकि बिक्री मूल्यों में मामूली वृद्धि हुई, जिससे मुनाफे पर दबाव बना। ब्रिटेन में आपूर्तिकर्ताओं ने परिवहन और कच्चे माल की लागत बढ़ने की शिकायत की, हालांकि ईंधन की कीमतों में नरमी से कुछ राहत मिली। भारत में इनपुट लागत वृद्धि पांच महीने के निचले स्तर पर आ गई, लेकिन बिजली, खाद्य और परिवहन खर्च ऊंचे रहे। एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधाएं कम होने से यूएई में आपूर्ति श्रृंखला में सुधार हुआ और डिलीवरी समय घटा।
आगे की राह भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। यूएई का गैर-तेल क्षेत्र सरकारी निवेश के सहारे मामूली विस्तार बनाए हुए है, जबकि भारत की वृद्धि दीर्घकालिक औसत से ऊपर बनी हुई है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था अप्रैल में पहले ही 0.1% सिकुड़ चुकी है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के प्रमुख अर्थशास्त्री डेविड ओवेन के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव में कमी से मांग में सुधार हो सकता है, लेकिन ग्राहक सतर्कता और क्षमता में कटौती के चलते रिकवरी धीमी रहने की संभावना है। अगले कुछ सप्ताह में जारी होने वाले जुलाई के पीएमआई आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि यह नरमी अस्थायी है या व्यापक आर्थिक मंदी का संकेत।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
The global services slowdown is a technical data point confirming known trends. Russia, with its resource-oriented economy and domestic market, is less exposed to these fluctuations. Focus remains on internal dynamics and the resilience of the national sector.
The collapse of services PMIs is a warning signal for the global economy, adding to geopolitical tensions and trade uncertainties. Western governments must act quickly to avoid a recession. Consumer and business confidence are at lows.
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