
इंद्रधनुषी झंडों के साए में मिस्र-ईरान का विश्व कप संघर्ष
सिएटल के प्राइड मैच में इंद्रधनुषी झंडों की अनुमति के बाद मिस्र और ईरान की टीमें ग्रुप जी के निर्णायक मुकाबले में उतरेंगी, जहां जीत अगले दौर का टिकट तय करेगी।
शुक्रवार रात लुमन फील्ड में जब मिस्र और ईरान आमने-सामने होंगे, स्टेडियम में इंद्रधनुषी झंडे लहराने की अनुमति होगी — फीफा ने इसे मानवाधिकारों की सामान्य अभिव्यक्ति बताते हुए हरी झंडी दे दी है। दोनों टीमों ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर चुप्पी साधते हुए अपना पूरा ध्यान फुटबॉल पर केंद्रित कर दिया है, क्योंकि यह ग्रुप जी का आखिरी और निर्णायक मुकाबला है। मिस्र के चार अंक हैं — बेल्जियम से ड्रॉ और न्यूजीलैंड पर जीत — जबकि ईरान ने दो ड्रॉ से दो अंक बटोरे हैं। जीतने वाली टीम अंतिम-16 में जगह पक्की कर सकती है, हारने वाली बाहर।
यह मैच प्राइड मैच के रूप में तब चिह्नित हुआ जब सिएटल की स्थानीय आयोजन समिति ने दिसंबर की ड्रॉ से पहले ही 26 जून के खेल को शहर के प्राइड वीकेंड से जोड़ दिया था। ड्रॉ ने दो ऐसे देशों को आमने-सामने ला दिया जहां समलैंगिकता कानूनी रूप से दंडनीय है: ईरान में मृत्युदंड तक का प्रावधान है, मिस्र में ‘सार्वजनिक अश्लीलता’ के तहत कारावास हो सकता है। दोनों महासंघों ने फीफा से इंद्रधनुषी प्रतीकों पर रोक की मांग की, लेकिन फीफा ने स्टेडियम आचार संहिता के तहत झंडों की अनुमति दे दी, साथ ही स्पष्ट किया कि प्राइड समारोह बाहरी संगठनों के हैं, स्वयं फीफा का नहीं। स्टेडियम के भीतर कोई आधिकारिक प्राइड गतिविधि नहीं होगी, पर प्रशंसक अपने झंडे ला सकते हैं।
सिएटल के आयोजकों का रुख अडिग रहा। स्थानीय समिति की हेडा मैक्लेंडन ने कहा कि प्राइड उत्सव पचास वर्षों से इसी सप्ताहांत होता आया है और यह शहर की पहचान का हिस्सा है, चाहे कोई भी टीम खेले। ईरानी कोच अमीर गलेनोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ खेल की बात की, जबकि मिस्र के कोच होसाम हसन ने भी सारा ध्यान रणनीति पर केंद्रित रखा। वहीं, अमेरिका में बसी ईरानी प्रवासी समुदाय ने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है; सिएटल की मेयर केटी विल्सन ने स्टेडियम के आसपास प्रदर्शनकारियों के लिए निर्धारित क्षेत्र और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की जानकारी दी।
खेल के लिहाज से यह मुकाबला दो संघर्षशील टीमों के बीच है। मिस्र ने न्यूजीलैंड को हराकर लय पकड़ी, जबकि ईरान ने बेल्जियम जैसी मजबूत टीम को रोककर अपनी रक्षात्मक क्षमता दिखाई। अब दोनों के सामने एक ही समीकरण है: जीत से अगला चरण, हार से विदाई। मैदान पर असली जंग गोल के लिए होगी, और जो भी टीम बाहरी शोर को पीछे छोड़कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी, वही ग्रुप जी से बेल्जियम के साथ नॉकआउट में कदम रखेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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सिएटल में ईरान-मिस्र का मुकाबला विश्व कप के पाखंड का प्रतीक बन गया है: फीफा ने इसे 'प्राइड मैच' घोषित किया, लेकिन कथित तौर पर दोनों संघों को आश्वासन दिया कि कोई इंद्रधनुषी झंडे या एलजीबीटी समारोह नहीं होंगे, जिससे मानवाधिकारों और राजनीतिक सुविधा के बीच विरोधाभास की आलोचना हो रही है। कुछ मीडिया का कहना है कि झंडे फिर भी लहराए जाएंगे, जो मेज़बान शहर के प्राइड उत्सवों और दोनों देशों में समलैंगिकता के अपराधीकरण के बीच अपरिहार्य टकराव को रेखांकित करता है।
एंग्लो-अमेरिकी प्रेस इस मैच को एक अजीब भू-राजनीतिक टकराव के रूप में पेश करती है, जिसमें इस बात की विडंबना पर ध्यान दिया जाता है कि ईरान और मिस्र एक ऐसे शहर में 'प्राइड मैच' खेल रहे हैं जो एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों का जश्न मना रहा है, और टीमों की असहजता के बावजूद इंद्रधनुषी झंडे लहराए जाएंगे। लहजा तटस्थ और वर्णनात्मक है, जो स्पष्ट निंदा के बिना मूल्यों के टकराव पर केंद्रित है।
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