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भू-राजनीति और राजनीतिगुरुवार, 16 जुलाई 2026

अमेरिका ने छात्र-पत्रकार वीज़ा की अवधि सीमित की, भारतीय छात्रों पर पड़ेगा सीधा असर

गृह सुरक्षा विभाग ने ‘अवधि-आधारित स्थिति’ समाप्त कर एफ, जे और आई वीज़ा के लिए निश्चित समयसीमा तय की, जो सितंबर से लागू हो सकती है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने 16 जुलाई 2026 को एक अंतिम नियम जारी कर विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के प्रतिभागियों और पत्रकारों के लिए दशकों से चली आ रही ‘अवधि-आधारित स्थिति’ (ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस) व्यवस्था को समाप्त कर दिया। इसके तहत एफ (छात्र), जे (विनिमय) और आई (मीडिया) श्रेणी के वीज़ा धारकों को अब एक निश्चित अवधि के लिए ही अमेरिका में रहने की अनुमति होगी। छात्रों और विनिमय आगंतुकों के लिए यह अधिकतम चार वर्ष होगी, जबकि विदेशी पत्रकारों को 240 दिन (लगभग आठ माह) तक रहने की इजाज़त मिलेगी; चीनी नागरिकों के लिए यह सीमा मात्र 90 दिन रखी गई है। नियम 60 दिनों में प्रभावी होगा, बशर्ते रिपब्लिकन-बहुल कांग्रेस इसे अवरुद्ध न करे।

डीएचएस के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने और वीज़ा दुरुपयोग रोकने के लिए उठाया गया है। विभाग का आरोप है कि 1970 के दशक से चली आ रही खुली व्यवस्था के कारण कई विदेशी छात्र ‘सदाबहार छात्र’ बनकर अनिश्चित काल तक अमेरिका में रह रहे थे। डीएचएस ने बताया कि 2024 में 18 लाख से अधिक छात्र वीज़ा प्रवेश दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा 5 लाख से अधिक विनिमय आगंतुकों और 37,300 मीडियाकर्मियों को वीज़ा जारी किए गए। विभाग का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आगंतुकों की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

हालांकि, अमेरिकी उच्च शिक्षा संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों ने इस निर्णय की तीखी आलोचना की है। नाफ्सा: एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स ने इसे ‘गुमराह और अनावश्यक’ बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अनिश्चितता और नौकरशाही बढ़ेगी। प्रेसिडेंट्स अलायंस ऑन हायर एजुकेशन एंड इमिग्रेशन ने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता कमज़ोर होगी। वहीं, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स जैसे संगठनों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा करार दिया। जापानी दूतावास ने भी डीएचएस से विदेशी संवाददाताओं के लिए दो से पांच वर्ष की प्रवेश अवधि रखने का आग्रह किया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। चीन के विदेश मंत्रालय ने पहले ही चीनी पत्रकारों के लिए 90-दिन की सीमा को भेदभावपूर्ण बताया था।

इस नियम का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका है, जो अमेरिका में सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह हैं। 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष में लगभग 3.6 लाख भारतीय छात्र अमेरिकी संस्थानों में नामांकित थे। पीएचडी, चिकित्सा और तकनीकी शोध जैसे दीर्घकालिक कार्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को अब बार-बार वीज़ा विस्तार के लिए आवेदन करना होगा, जिसमें बायोमेट्रिक डेटा, शुल्क और प्रशासनिक देरी का सामना करना पड़ेगा। स्नातकोत्तर छात्रों के लिए शैक्षिक उद्देश्य बदलने या संस्थान स्थानांतरित करने पर भी सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। साथ ही, पढ़ाई पूरी होने के बाद देश छोड़ने की मोहलत 60 से घटाकर 30 दिन कर दी गई है, जिससे वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) या रोज़गार-आधारित वीज़ा में बदलाव का रास्ता संकरा हो जाएगा।

यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक आव्रजन सख्ती अभियान का हिस्सा है, जिसमें पहले ही हज़ारों छात्र वीज़ा रद्द किए जा चुके हैं और अरबों डॉलर की संघीय शोध निधि रोकी गई है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी ऐसी ही सीमाएं प्रस्तावित की थीं, लेकिन जो बाइडन प्रशासन ने उन्हें वापस ले लिया था। अब यह नियम कांग्रेस की समीक्षा के अधीन है; रिपब्लिकन बहुमत के कारण इसके पारित होने की संभावना प्रबल है। इसके सितंबर 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है, जिसके बाद अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पत्रकारों की स्थिति मौलिक रूप से बदल जाएगी।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
अक्ष: Valutazione della politica
21%कम
3 ब्लॉक · स्थिति −0.50 से 0.00 तक
Critici dell'inasprimentoCronaca neutrale
LATRUSIND
प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
लैटिन अमेरिकी प्रेस0.00neutral
रूसी और सीआईएस प्रेस−0.20neutral
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.50critical
लैटिन अमेरिकी प्रेस0.00
स्वर

अमेरिकी सरकार वीज़ा नियमों में बदलाव करती है, विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए निश्चित समय सीमा पेश करती है।

तंत्रcronaca pura

समाचार को एक प्रशासनिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, बिना जिम्मेदारी या परिणामों को बताए, बदलाव को सामान्य बनाते हुए।

चूक

किसी विशेष राष्ट्रीयता पर विशिष्ट प्रभाव या छात्र संघों की आलोचना का उल्लेख नहीं किया गया है।

उदासीनताव्यावहारिकता
रूसी और सीआईएस प्रेस−0.20
स्वर

संयुक्त राज्य अमेरिका विदेशी पत्रकारों और छात्रों के लिए वीज़ा व्यवस्था को कड़ा करता है, प्रवास सीमाएं लागू करता है।

तंत्रenfasi sulla restrizione

'कड़ा' और 'प्रतिबंध' शब्दों का उपयोग शत्रुता की छाप बनाता है, बिना आधिकारिक सुरक्षा कारणों का उल्लेख किए।

चूक

यह रिपोर्ट नहीं करता कि यह उपाय होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा प्रस्तावित किया गया था और अभी भी समीक्षा के अधीन है।

चेतावनीसंदेह
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.50
स्वर

संयुक्त राज्य अमेरिका नए वीज़ा प्रतिबंधों के साथ भारतीय छात्रों को प्रभावित करता है, उनके कानूनी प्रवास को जोखिम में डालता है।

तंत्रvittimizzazione selettiva

यह संख्यात्मक डेटा और जोखिम परिदृश्यों का उपयोग करके भारतीय समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव पर जोर देता है, सहानुभूति और आलोचना उत्पन्न करता है।

चूक

यह उल्लेख नहीं करता कि यह नियम सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर लागू होता है, न कि केवल भारतीयों पर, और न ही छोटे कार्यक्रमों के लिए अपवाद हैं।

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गुरुवार, 16 जुलाई 2026

अमेरिका ने छात्र-पत्रकार वीज़ा की अवधि सीमित की, भारतीय छात्रों पर पड़ेगा सीधा असर

गृह सुरक्षा विभाग ने ‘अवधि-आधारित स्थिति’ समाप्त कर एफ, जे और आई वीज़ा के लिए निश्चित समयसीमा तय की, जो सितंबर से लागू हो सकती है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने 16 जुलाई 2026 को एक अंतिम नियम जारी कर विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के प्रतिभागियों और पत्रकारों के लिए दशकों से चली आ रही ‘अवधि-आधारित स्थिति’ (ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस) व्यवस्था को समाप्त कर दिया। इसके तहत एफ (छात्र), जे (विनिमय) और आई (मीडिया) श्रेणी के वीज़ा धारकों को अब एक निश्चित अवधि के लिए ही अमेरिका में रहने की अनुमति होगी। छात्रों और विनिमय आगंतुकों के लिए यह अधिकतम चार वर्ष होगी, जबकि विदेशी पत्रकारों को 240 दिन (लगभग आठ माह) तक रहने की इजाज़त मिलेगी; चीनी नागरिकों के लिए यह सीमा मात्र 90 दिन रखी गई है। नियम 60 दिनों में प्रभावी होगा, बशर्ते रिपब्लिकन-बहुल कांग्रेस इसे अवरुद्ध न करे।

डीएचएस के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने और वीज़ा दुरुपयोग रोकने के लिए उठाया गया है। विभाग का आरोप है कि 1970 के दशक से चली आ रही खुली व्यवस्था के कारण कई विदेशी छात्र ‘सदाबहार छात्र’ बनकर अनिश्चित काल तक अमेरिका में रह रहे थे। डीएचएस ने बताया कि 2024 में 18 लाख से अधिक छात्र वीज़ा प्रवेश दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा 5 लाख से अधिक विनिमय आगंतुकों और 37,300 मीडियाकर्मियों को वीज़ा जारी किए गए। विभाग का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आगंतुकों की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

हालांकि, अमेरिकी उच्च शिक्षा संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों ने इस निर्णय की तीखी आलोचना की है। नाफ्सा: एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स ने इसे ‘गुमराह और अनावश्यक’ बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अनिश्चितता और नौकरशाही बढ़ेगी। प्रेसिडेंट्स अलायंस ऑन हायर एजुकेशन एंड इमिग्रेशन ने चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता कमज़ोर होगी। वहीं, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स जैसे संगठनों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा करार दिया। जापानी दूतावास ने भी डीएचएस से विदेशी संवाददाताओं के लिए दो से पांच वर्ष की प्रवेश अवधि रखने का आग्रह किया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। चीन के विदेश मंत्रालय ने पहले ही चीनी पत्रकारों के लिए 90-दिन की सीमा को भेदभावपूर्ण बताया था।

इस नियम का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका है, जो अमेरिका में सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह हैं। 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष में लगभग 3.6 लाख भारतीय छात्र अमेरिकी संस्थानों में नामांकित थे। पीएचडी, चिकित्सा और तकनीकी शोध जैसे दीर्घकालिक कार्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को अब बार-बार वीज़ा विस्तार के लिए आवेदन करना होगा, जिसमें बायोमेट्रिक डेटा, शुल्क और प्रशासनिक देरी का सामना करना पड़ेगा। स्नातकोत्तर छात्रों के लिए शैक्षिक उद्देश्य बदलने या संस्थान स्थानांतरित करने पर भी सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं। साथ ही, पढ़ाई पूरी होने के बाद देश छोड़ने की मोहलत 60 से घटाकर 30 दिन कर दी गई है, जिससे वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) या रोज़गार-आधारित वीज़ा में बदलाव का रास्ता संकरा हो जाएगा।

यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक आव्रजन सख्ती अभियान का हिस्सा है, जिसमें पहले ही हज़ारों छात्र वीज़ा रद्द किए जा चुके हैं और अरबों डॉलर की संघीय शोध निधि रोकी गई है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी ऐसी ही सीमाएं प्रस्तावित की थीं, लेकिन जो बाइडन प्रशासन ने उन्हें वापस ले लिया था। अब यह नियम कांग्रेस की समीक्षा के अधीन है; रिपब्लिकन बहुमत के कारण इसके पारित होने की संभावना प्रबल है। इसके सितंबर 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है, जिसके बाद अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पत्रकारों की स्थिति मौलिक रूप से बदल जाएगी।

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'कड़ा' और 'प्रतिबंध' शब्दों का उपयोग शत्रुता की छाप बनाता है, बिना आधिकारिक सुरक्षा कारणों का उल्लेख किए।

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यह रिपोर्ट नहीं करता कि यह उपाय होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा प्रस्तावित किया गया था और अभी भी समीक्षा के अधीन है।

चेतावनीसंदेह
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.50
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संयुक्त राज्य अमेरिका नए वीज़ा प्रतिबंधों के साथ भारतीय छात्रों को प्रभावित करता है, उनके कानूनी प्रवास को जोखिम में डालता है।

तंत्रvittimizzazione selettiva

यह संख्यात्मक डेटा और जोखिम परिदृश्यों का उपयोग करके भारतीय समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव पर जोर देता है, सहानुभूति और आलोचना उत्पन्न करता है।

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