
ट्यूनीशिया के 8 खिलाड़ियों पर डोपिंग का संकट, मेक्सिको में दूषित मांस बना संदेह
विश्व कप 2026 के दौरान क्लेनब्यूटेरॉल के लिए सकारात्मक परीक्षण, लेकिन जांच में जानबूझकर सेवन की संभावना नहीं, प्रतिबंध की आशंका कम
विश्व कप 2026 के ग्रुप चरण से बाहर हो चुकी ट्यूनीशिया की टीम पर एक नया संकट मंडरा गया जब ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसके आठ खिलाड़ियों के डोपिंग टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ क्लेनब्यूटेरॉल के अंश मिले हैं। हालांकि, यूरोपीय और रूसी स्रोतों के अनुसार, जांच का रुख जानबूझकर डोपिंग की बजाय मेक्सिको में ठहरने के दौरान दूषित मांस के सेवन की ओर है। पदार्थ की मात्रा इतनी कम थी कि विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के 2022 के प्रोटोकॉल के तहत इसे 'असामान्य निष्कर्ष' (एटिपिकल फाइंडिंग) की श्रेणी में रखा गया, जिससे स्वतः प्रतिबंध का खतरा टल गया।
जांच का केंद्र मोंटेरे का एक रेस्तरां बताया जा रहा है जहां टीम ने भोजन किया था। मेक्सिको में पशुपालन में अवैध रूप से क्लेनब्यूटेरॉल के इस्तेमाल का इतिहास रहा है, और 2011 के गोल्ड कप में पांच मैक्सिकन खिलाड़ियों तथा उसी वर्ष अंडर-17 विश्व कप में 109 खिलाड़ियों के साथ ऐसे ही मामले सामने आए थे। तब वाडा और फीफा ने मांस के नमूनों में क्लेनब्यूटेरॉल पाए जाने के बाद सभी को दोषमुक्त कर दिया था। वर्तमान मामले में भी फीफा और ट्यूनीशियाई महासंघ ने अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन खिलाड़ियों के क्लबों को सूचित कर दिया गया है।
ट्यूनीशिया का विश्व कप अभियान पहले ही निराशाजनक रहा था। टीम ने स्वीडन से 1-5, जापान से 0-4 और नीदरलैंड से 1-3 से हारकर ग्रुप चरण में ही विदाई ले ली। पहले मैच के बाद कोच साबरी लामुशी को बर्खास्त कर हर्वे रेनार को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस बीच, इंग्लैंड की टीम, जिसे मेक्सिको सिटी में प्री-क्वार्टर फाइनल खेलना है, ने अपने रसोइयों और खाद्य सामग्री के साथ यात्रा करके सावधानी बरती है।
वाडा के नियमों के तहत यदि दूषित मांस से अनजाने में पदार्थ शरीर में पहुंचने की पुष्टि हो जाती है तो खिलाड़ियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगेगा। फिलहाल जांच जारी है और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मेक्सिको में खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के दौरान टीमों की सतर्कता को रेखांकित कर दिया है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.50 | critical |
Mexico rejects the doping accusations as a pretext for trade barriers. Mexican meat is safe and the analyses prove it.
The burden of proof is reversed: instead of proving contamination, those raising the issue are accused of having protectionist ulterior motives.
Russia denounces yet another smear campaign orchestrated by the West. Doping is a pretext to attack geopolitical adversaries.
A parallel is drawn between accusations against Russia and those against Mexico, suggesting a pattern of Western hypocrisy.
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