
राइकर्स द्वीप की बर्फीली कोठरी से बेलेव्यू अस्पताल तक: हार्वे वाइंस्टीन की सज़ा और सेहत की जंग
हॉलीवुड के पूर्व दिग्गज हार्वे वाइंस्टीन को जेल में दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहाँ वे निमोनिया और हृदय गति रुकने से जूझ रहे हैं।
राइकर्स द्वीप की जेल में फ़ोन के लिए कतार में खड़े हार्वे वाइंस्टीन ने सामने वाले क़ैदी से पूछा कि क्या उसका काम ख़त्म हो गया। जवाब में एक ज़ोरदार मुक्का उनके चेहरे पर पड़ा। वे फर्श पर गिर पड़े, ख़ून से लथपथ। बाद में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “मैं बुरी तरह ज़ख़्मी हो गया था। पुलिस ने पूछा कि किसने मारा, लेकिन मैं बता नहीं सका। यहाँ मुख़बिरी नहीं की जा सकती—यह जंगल का क़ानून है।” यह दृश्य उस शख़्स की मौजूदा हक़ीक़त है, जो कभी हॉलीवुड का सबसे ताक़तवर फ़िल्म निर्माता था।
अब यही वाइंस्टीन, 74 वर्ष की उम्र में, न्यूयॉर्क के बेलेव्यू अस्पताल की जेल वार्ड में भर्ती हैं। दो सप्ताह पहले उन्हें साँस लेने में भारी तकलीफ़ हुई, जो निमोनिया से जुड़ी हृदय गति रुकने की वजह बनी। राइकर्स द्वीप से उन्हें तुरंत मैनहटन के इस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ वे अंतःशिरा एंटीबायोटिक्स और हृदय मॉनिटर से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, स्थिति में थोड़ा सुधार है, लेकिन वे अब भी ख़तरे से बाहर नहीं हैं। यह कोई पहला स्वास्थ्य संकट नहीं है—पिछले वर्षों में उन्हें क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया, आपातकालीन हृदय शल्य चिकित्सा, कोविड-19 और दोहरे निमोनिया का सामना करना पड़ा है।
वाइंस्टीन की कहानी सत्ता, पतन और वैश्विक सांस्कृतिक बदलाव का एक जीवंत अध्याय है। 2017 में जब उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप सार्वजनिक हुए, तो #MeToo आंदोलन ने दुनिया भर में ज़ोर पकड़ा। भारत में भी इसकी गूँज ‘मी टू’ अभियान के रूप में सुनाई दी, जिसने फ़िल्म उद्योग और अन्य क्षेत्रों में सत्ता के दुरुपयोग को उजागर किया। वाइंस्टीन को 2020 में 23 साल की सज़ा सुनाई गई, जिसे बाद में प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण पलट दिया गया, लेकिन 2025 में एक अलग मामले में फिर से दोषी ठहराया गया। लॉस एंजेलिस की एक अदालत ने भी उन्हें 16 साल की सज़ा दी है, हालाँकि कैलिफ़ोर्निया की अपील अदालत ने सज़ा की अवधि पर पुनर्विचार का आदेश दिया है। इस बीच, न्यूयॉर्क में सितंबर में एक और सज़ा का एलान होना है, जिसमें अभियोजन पक्ष 20 साल की क़ैद की माँग कर रहा है।
वैश्विक दर्शकों के लिए यह दास्ताँ सिर्फ़ एक अपराधी की सज़ा नहीं, बल्कि सत्ता की नश्वरता का प्रतीक बन गई है। वाइंस्टीन ने ख़ुद राइकर्स को “नर्क” और “ठंडा और बेरहम” बताया, और कहा कि वे हर तीन घंटे में अपने बच्चों से फ़ोन पर बात करके ही “समझदार” बने रहते हैं। उनकी यह तड़प—कि “मैं यहाँ मरना नहीं चाहता”—एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ है जो कभी दूसरों की ज़िंदगियों पर राज करता था, और अब अपनी ही ज़िंदगी के लिए भीख माँग रहा है।
बेलेव्यू अस्पताल के जेल वार्ड में, जहाँ वाइंस्टीन अगले कुछ सप्ताह बिताएँगे, एक अजीब सन्नाटा है। मॉनिटर की बीप और एंटीबायोटिक की बूँदों के बीच, हॉलीवुड का वह सितारा जिसने कभी ऑस्कर की रातों पर राज किया, अब सिर्फ़ गार्डों और नर्सों से बात करता है। यह तस्वीर सत्ता के भंगुर होने की एक ख़ामोश गवाही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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बदनाम हॉलीवुड दिग्गज को जेल में दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कहानी एक समय के सर्वशक्तिमान व्यक्ति के नाटकीय पतन को रेखांकित करती है, जो अब सलाखों के पीछे जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है। चिकित्सा आपातकाल को एक लंबे पतन के नवीनतम अध्याय के रूप में पेश किया गया है।
प्रिय अभिनेता डैनी ग्लोवर ने खुलासा किया कि उन्हें अल्जाइमर है और वे मानते हैं कि उन्होंने निदान को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है। फिर भी वे पढ़ने, टीवी देखने की दैनिक दिनचर्या का वर्णन करते हैं और जोर देते हैं कि उनका जीवन समाप्त नहीं हुआ है। कहानी शांत लचीलेपन और बीमारी से पूरी तरह परिभाषित होने से इनकार का चित्रण करती है।
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