
रूसी हमले में कीव का प्राचीन गिरजाघर जला, यूनेस्को धरोहर पर गहरा संकट
यूक्रेन पर रूस के विशाल मिसाइल-ड्रोन हमले में कीव पेचेर्स्क लावरा का उस्पेंस्की कैथेड्रल आग की लपटों में घिर गया, जिसे लेकर मास्को और पश्चिम के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हो गए हैं।
रूस ने रविवार-सोमवार की रात यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक को अंजाम दिया, जिसमें 70 मिसाइलें और 611 ड्रोन दागे गए। राजधानी कीव, खारकीव और द्नीप्रो पर हुए इस हमले में कम से कम 11 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। सबसे चौंकाने वाली घटना कीव के केंद्र में स्थित 11वीं सदी के कीव पेचेर्स्क लावरा मठ परिसर में लगी भीषण आग रही, जहाँ उस्पेंस्की कैथेड्रल (डॉर्मिशन कैथेड्रल) की सुनहरी गुंबदें और छत जलकर क्षतिग्रस्त हो गईं। यह स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर है और पूर्वी ईसाई धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में गिना जाता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इसे “ईसाई संस्कृति के ख़िलाफ़ रूस का अब तक का सबसे बड़ा अपराध” करार दिया, जबकि खारकीव में बचावकर्मियों पर हुए दोहरे हमले में पाँच आपातकालीन कर्मी मारे गए।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने मठ पर हमले से साफ इनकार किया और दावा किया कि यह क्षति यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली की एक अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल की खराबी के कारण हुई, जिसकी शेल्फ लाइफ समाप्त हो चुकी थी। मास्को ने कहा कि उसकी सेना “नागरिक ढाँचों पर हमले की योजना नहीं बनाती और न ही करती है” और उसने केवल सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाया। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने पश्चिमी नेताओं की निंदा को “फ़र्ज़ी” बताया और याद दिलाया कि ज़ेलेंस्की सरकार द्वारा यूक्रेनी ऑर्थोडॉक्स चर्च के ख़िलाफ़ कार्रवाइयों पर पश्चिम चुप रहा। वहीं रूसी सांसद आंद्रेई कोलेसनिक ने कहा कि लावरा पर हमला रूसी सेना के लिए “वर्जित” है क्योंकि यह कीवन रस से जुड़ी उनकी भी एक पवित्र धरोहर है।
पश्चिमी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि “रूस के इस हमले को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता” और इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने इसे “असाधारण गंभीरता का हमला” बताते हुए कहा कि यह दिखाता है कि रूस शांति वार्ता नहीं चाहता। फ्रांस के विदेश मंत्री ने इसकी तुलना पेरिस के नोत्र दाम कैथेड्रल पर बमबारी से की। ये बयान ऐसे समय आए जब जी7 नेता फ्रांस के एवियां-ले-बेन में शिखर सम्मेलन के लिए जुट रहे थे, जहाँ ज़ेलेंस्की ने और अधिक वायु रक्षा सहायता और रूस पर कड़े दबाव की अपील की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हालिया फोन वार्ता के बावजूद यह हमला दर्शाता है कि कूटनीतिक प्रयास अभी भी ज़मीनी हकीकत से बहुत दूर हैं।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह घटना कई स्तरों पर प्रासंगिक है। एक ओर, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों पर हमले क्षेत्र की अपनी संवेदनशीलताओं को छूते हैं—चाहे वह अफ़ग़ानिस्तान में बामियान बुद्ध प्रतिमाएँ हों या भारत-पाकिस्तान के बीच साझा विरासत स्थल। दूसरी ओर, जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका-ईरान-पाकिस्तान के बीच फारस की खाड़ी में युद्धविराम पर सहमति की खबरें वैश्विक कूटनीति के एक जटिल मोड़ की ओर इशारा करती हैं, जहाँ एक क्षेत्र में शांति की कोशिशें और दूसरे में युद्ध का विस्तार साथ-साथ चल रहे हैं। भारत, जो रूस और पश्चिम दोनों के साथ संतुलन बनाए हुए है, ने बार-बार बातचीत और संयम का आह्वान किया है, लेकिन इस तरह के सांस्कृतिक प्रतीकों पर हमले उसके लिए भी एक नैतिक चुनौती पेश करते हैं।
आगे का रास्ता अनिश्चित है। ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन “मौजूदा अवसर की खिड़की” का फायदा उठाकर युद्ध समाप्त करना चाहता है, लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने जी7 में मिलने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अधिकतमवादी लक्ष्य दोहराए। लावरा की जलती छतों की तस्वीरें न केवल एक धार्मिक स्थल की क्षति हैं, बल्कि उस गहरी सभ्यतागत दरार का प्रतीक बन गई हैं जो इस युद्ध को और भी विनाशकारी बना रही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूस ने कीव और ख़ारकिव पर भीषण और क्रूर हमला किया, यूनेस्को-सूचीबद्ध मठ परिसर में ऐतिहासिक डॉर्मिशन कैथेड्रल को जानबूझकर निशाना बनाया—यह नोत्र-दाम की बमबारी के समान निर्दयता का प्रतीक है। यूक्रेन के यूरोपीय संघ की सदस्यता वार्ता आगे बढ़ाने के दौरान हुआ यह हमला मॉस्को की बर्बरता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति अवमानना को दर्शाता है। ख़ारकिव में एक दोहरे हमले में नागरिक बचावकर्मी मारे गए, जबकि क्रेमलिन अविश्वसनीय रूप से कैथेड्रल की आग के लिए यूक्रेनी वायु-रक्षा मिसाइल को ज़िम्मेदार ठहराता है।
रात भर दोनों पक्षों ने घातक हमलों का आदान-प्रदान किया: रूस के तूला में एक आवासीय इलाके पर यूक्रेनी ड्रोन हमले में तीन नागरिक मारे गए और एक बच्चा घायल हो गया, जबकि बड़े पैमाने पर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने यूक्रेनी शहरों को निशाना बनाकर नौ लोगों की जान ले ली। हमलों का यह क्रम दोनों मोर्चों पर नागरिकों पर ड्रोन युद्ध की भारी कीमत को दर्शाता है, हर राजधानी एक-दूसरे पर गैर-सैन्य स्थलों को निशाना बनाने का आरोप लगा रही है।
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