
अमेरिका-ईरान समझौते पर इज़राइल की आशंका, ट्रंप के सहयोगियों ने किया बचाव
यरुशलम में एक विदेश नीति सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राजदूत समेत ट्रंप के करीबियों ने इज़राइली जनता की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया, जहाँ ईरान के साथ अंतरिम समझौते और व्हाइट हाउस की कड़ी टिप्पणियों से दशकों पुराने गठबंधन में दरार के संकेत मिले हैं।
यरुशलम में आयोजित एक विदेश नीति सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगियों ने इज़राइल के साथ संबंधों को लेकर उपजी चिंताओं के बीच उनका बचाव किया। अमेरिकी राजदूत माइक हकबी ने स्वीकार किया कि रिश्तों को लेकर ‘भारी स्तर की बेचैनी’ है, लेकिन दोनों देशों के बीच ‘अटूट बंधन’ की बात दोहराई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ किए गए एक अंतरिम समझौता ज्ञापन और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर की गई कड़ी टिप्पणियों ने इज़राइली जनता और नेतृत्व में गहरी आशंका पैदा कर दी है।
इज़राइली नेतृत्व के अनुसार, यह समझौता ईरान को सशक्त कर सकता है और लेबनान में हिज़्बुल्लाह से उत्पन्न खतरों से निपटने की इज़राइल की क्षमता को सीमित कर सकता है। वहीं, व्हाइट हाउस की ओर से ट्रंप ने हाल के सप्ताहों में नेतन्याहू को ‘पूरी तरह पागल’ कहा और सार्वजनिक रूप से सीरिया से इज़राइली सैनिकों की जगह लेने की संभावना पर विचार किया। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी कहा कि इस समय पूरी दुनिया में केवल ट्रंप ही इज़राइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं, और यह भी जोड़ा कि इज़राइल की हर आलोचना को यहूदी-विरोधी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
अमेरिकी जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, इज़राइल के प्रति अमेरिकी समर्थन में गिरावट आ रही है, विशेषकर युवा रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच। प्यू रिसर्च सेंटर के मार्च के एक सर्वेक्षण में 18 से 49 वर्ष के 57 प्रतिशत रिपब्लिकन ने इज़राइल के प्रति नकारात्मक राय रखी, जो एक वर्ष पहले 50 प्रतिशत थी। डेमोक्रेटिक पार्टी पहले ही इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों, खासकर गाजा में हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद हुई भारी तबाही, और ईरान पर संयुक्त हमले को लेकर कड़ा रुख अपना चुकी है। ऐसे में रिपब्लिकन खेमे से भी आलोचना का स्वर उभरना इज़राइल के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन गया है।
सम्मेलन में फॉक्स न्यूज के टिप्पणीकार मार्क लेविन और रेडियो होस्ट सिड रोसेनबर्ग जैसे ट्रंप समर्थकों ने इज़राइल को आश्वस्त करने का प्रयास किया। लेविन ने ईरान समझौते पर असहमति जताते हुए भी धार्मिक स्वतंत्रता और इज़राइल के प्रति ट्रंप के समर्थन की सराहना की। रोसेनबर्ग ने कहा कि चिंताओं के बावजूद ट्रंप ही इज़राइल के लिए सर्वोत्तम विकल्प हैं। हेरिटेज फाउंडेशन की विक्टोरिया कोट्स ने संबंधों में तनाव को स्वीकार करते हुए विश्वास जताया कि दोनों देशों के नेता इसे ‘पटरी पर’ ला सकते हैं।
फिलहाल, अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन के अंतिम रूप लेने और लेबनान में संघर्ष विराम वार्ता की प्रक्रिया जारी है। इज़राइली नीति-निर्माताओं के लिए यह स्थिति एक कूटनीतिक चुनौती बनी हुई है, क्योंकि वाशिंगटन में दोनों प्रमुख दलों के भीतर समर्थन का आधार सिकुड़ता दिख रहा है। आगामी सप्ताहों में इस बात पर नज़र रहेगी कि क्या ट्रंप प्रशासन इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं को समझौते में शामिल कर पाता है या गठबंधन में और दरार आती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इज़राइल में विश्वासघात और उलझन की गहरी भावना फैल रही है, जहाँ कभी ट्रंप के कट्टर समर्थक अब राष्ट्रपति को पहचान नहीं पा रहे हैं। एक खुले पत्र में सामूहिक चिंता व्यक्त की गई है, जिसमें पूछा गया है कि वे ईरान के साथ समझौता करते हुए सार्वजनिक रूप से इज़राइल की आलोचना कैसे कर सकते हैं। माहौल चिंताजनक और आहत निष्ठा का है, इस डर के साथ कि अंतरिम समझौता एक घातक दुश्मन को मजबूत करेगा।
ट्रंप के सहयोगियों ने ईरान के साथ अंतरिम समझौते और व्हाइट हाउस की आलोचना से बेचैन इज़राइली जनता को आश्वस्त करने के लिए कदम बढ़ाया। रिपोर्टों में अमेरिका-इज़राइल संबंधों को एक रोलर कोस्टर के रूप में दर्शाया गया है, जो संयुक्त हमले के बाद के विश्वास से लेकर सार्वजनिक असहमति तक जाता है। लहजा संयमित है, बिना पक्ष लिए बचाव प्रस्तुत करता है और दशकों पुराने गठबंधन में दरारों को मात्र दर्ज करता है।
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