
स्विस आल्प्स की गोद में लैटिन प्रार्थनाएँ और एक ऐतिहासिक विद्रोह: वैटिकन ने छह बिशपों को किया बहिष्कृत
पोप लियो चौदहवें की विनती को दरकिनार कर चार नए बिशपों के अभिषेक के बाद, वैटिकन ने पूरी सोसाइटी ऑफ सेंट पायस एक्स को विद्रोही घोषित कर दिया।
स्विट्ज़रलैंड के एकोन गाँव में आल्प्स की धूसर पहाड़ियों के नीचे, चार पादरी लाल मखमली तकियों पर मुँह छिपाए ज़मीन पर लेटे हुए थे। चारों ओर सैकड़ों पुरोहित मोमबत्तियाँ और क्रॉस लिए खड़े थे, और लोबान की सुगंध हवा में तैर रही थी। लैटिन में गूँजते प्रार्थना-गीतों के बीच, बिशप अल्फोंसो दे गालारेता ने अपना हाथ उनके सिर पर रखा—यह वह क्षण था जिसने कैथोलिक चर्च में एक नई दरार पैदा कर दी। यह कोई गुप्त अनुष्ठान नहीं था; इसे सात भाषाओं में यूट्यूब पर सीधा प्रसारित किया गया, और लगभग पंद्रह हज़ार श्रद्धालु वहाँ मौजूद थे।
यह अभिषेक समारोह सोसाइटी ऑफ सेंट पायस एक्स (एसएसपीएक्स) ने आयोजित किया था, जो एक अति-परंपरावादी कैथोलिक समूह है। पोप लियो चौदहवें ने कुछ दिन पहले ही एक पत्र लिखकर विनती की थी, “मैं आपसे पूरे दिल से गुज़ारिश करता हूँ: कृपया वापस लौट आइए!” लेकिन समूह ने पोप की चेतावनी को अनसुना कर दिया। इसके जवाब में, वैटिकन ने अगले ही दिन एक डिक्री जारी कर न केवल छह बिशपों—दो अभिषेककर्ता और चार नवनियुक्त—को बहिष्कृत (एक्सकम्यूनिकेट) कर दिया, बल्कि यह भी घोषित किया कि जो भी सामान्य श्रद्धालु “औपचारिक रूप से” इस समूह से जुड़ेंगे, वे भी चर्च से बाहर माने जाएँगे। यह कदम कई विशेषज्ञों की अपेक्षा से कहीं अधिक कठोर था।
एसएसपीएक्स की जड़ें 1970 में फ्रांसीसी आर्चबिशप मार्सेल लेफेब्वर द्वारा रखी गई थीं, जिन्होंने 1960 के दशक की द्वितीय वैटिकन परिषद के आधुनिकीकरण सुधारों का कड़ा विरोध किया था। यह समूह मानता है कि लैटिन में पीठ फेरकर की जाने वाली प्राचीन मिस्सा ही सच्ची परंपरा है, और अन्य धर्मों से संवाद तथा स्थानीय भाषाओं में प्रार्थना को यह विधर्म मानता है। 1988 में भी लेफेब्वर ने बिना पोप की अनुमति के चार बिशप नियुक्त किए थे, जिसके फलस्वरूप उन्हें और उन बिशपों को बहिष्कृत कर दिया गया था। बाद में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने 2009 में उस बहिष्कार को वापस लेकर सुलह का प्रयास किया, लेकिन वैचारिक मतभेद कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
इस बार का विद्रोह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक घटना बन गया। समारोह में अमेरिका, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड और दर्जनों अन्य देशों से लोग आए थे। बीबीसी से बात करते हुए जर्सी की एक अनुयायी रीटा रीड ने कहा, “इससे मुझे और ताकत मिलती है… अगर वे हमें बहिष्कृत करते हैं, तो करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।” समूह के लगभग छह लाख अनुयायी दुनिया भर में फैले हैं, और इसके पास अपने स्कूल, सेमिनरी और चैपल हैं। वैटिकन के इस कठोर रुख ने इन लोगों को एक कठिन चुनाव के सामने खड़ा कर दिया है—या तो अपनी परंपरागत आस्था का साथ दें, या रोम के साथ संबंध बनाए रखें।
समारोह स्थल पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला: वहाँ “एकोन2026” लिखी बेसबॉल कैप बाँटी जा रही थीं, और 92 डॉलर मूल्य की स्विस वाइन की बोतलें बिक रही थीं, जिन पर बिशप की मुकुटनुमा टोपी (माइटर) का चित्र बना था। यह तस्वीर एक ऐसे विद्रोह की प्रतीक बन गई जो सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक ब्रांडिंग के बीच झूल रहा है—एक ऐसा दृश्य जहाँ पवित्रता और व्यापार एक साथ खड़े थे, और आल्प्स की ठंडी हवा में लैटिन के स्वर अभी भी गूँज रहे थे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
The Latin American bloc did not cover the Vatican excommunication of Lefebvre followers, focusing instead on sports, local politics, and social issues.
The Indian and South Asian bloc ignored the Vatican story, prioritizing local news on housing, courts, and coal.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल
9 भाषाएँ · 31 स्रोत
Economy & Markets सेवैश्विक ऑटो बाजार में दोहरी चाल: इंडोनेशिया में नीतिगत अनिश्चितता, ब्राजील और रूस में मजबूत वृद्धि
4 भाषाएँ · 10 स्रोत
Technology सेएआई युग में मानवीय कौशल और बाल सुरक्षा की नई चुनौतियाँ
6 भाषाएँ · 8 स्रोत