
अफ़ग़ानिस्तान में बाढ़ का कहर: 20 की मौत, 100 से अधिक लापता
नूरिस्तान प्रांत में मानसूनी बारिश से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई, प्रशासन राहत-बचाव में जुटा
अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी प्रांत नूरिस्तान में सोमवार को अचानक आई बाढ़ में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लापता हैं। प्रांतीय राजधानी पारून और आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद आई इस बाढ़ ने घरों, दुकानों और सार्वजनिक भवनों को भारी नुकसान पहुंचाया।
अफ़ग़ान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएनडीएमए) के अनुसार 20 शव बरामद किए गए हैं और 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता फ़रीदून सामिम ने नौ शव मिलने की पुष्टि की है, हालांकि दोनों पक्षों ने 100 से अधिक लोगों के लापता होने की बात कही है। लापता होने वालों में पारून के मेयर और कई सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। स्थानीय स्वयंसेवी संस्था शपौल के प्रमुख आशिकुल्लाह साफ़ी ने बताया कि बाढ़ ने नगर पालिका भवन, होटलों और दर्जनों दुकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में विरोधाभास बना हुआ है। कुछ स्रोत 105 लापता बता रहे हैं, जबकि अधिकांश रिपोर्टों में ‘100 से अधिक’ का उल्लेख है। अधिकारियों ने बताया कि बचाव दल दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बिना पर्याप्त उपकरणों के मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी-बड़ी चट्टानें बहा लाया, जिससे राहत कार्य में बाधा आ रही है।
यह आपदा ऐसे समय आई है जब दक्षिण एशिया के कई देश मानसूनी बारिश और बाढ़ से जूझ रहे हैं। भारत के उत्तरी और पूर्वोत्तर राज्यों में सोमवार को ही बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 25 लोगों की मौत हुई, जबकि नेपाल में जून के मध्य से अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है। अफ़ग़ानिस्तान की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के प्रमुख मौलवी मतीउल हक़ ख़ालिस ने इसी माह चेतावनी दी थी कि देश में बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं और पर्यावरणीय समस्याओं ने मानवीय संकट को गहरा किया है।
फ़िलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारों और जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है। यह प्रारंभिक आंकड़े हैं और स्थिति स्पष्ट होने में समय लग सकता है।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
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| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Monsoon rains and climate change exacerbate Afghanistan's vulnerability.
By directly linking the event to monsoon rains and climate change, it creates a frame of environmental inevitability that shifts responsibility from local governance to global factors.
Houses built too close to the river and lack of adequate infrastructure made the catastrophe inevitable.
By highlighting the proximity of houses to the river and the total destruction, it suggests that inadequate urban planning is the root cause, making the disaster foreseeable and preventable.
The missing include the mayor and government employees, testifying to the scale of the disaster.
By focusing on the disappearance of institutional figures, it humanizes the catastrophe and emphasizes that even authorities were not spared, implying inadequate emergency management.
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