
लैटिन अमेरिका में बढ़ती महिला हिंसा के बीच कोलंबिया के नए राष्ट्रपति ने सख्त कार्रवाई का वादा किया
कई देशों में महिलाओं की हत्याओं और लापता होने की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई, जबकि कोलंबिया में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला ने सुरक्षा नीति में बदलाव का संकेत दिया।
पिछले कुछ हफ्तों में लैटिन अमेरिका के कई देशों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई हैं। कोलंबिया में कैली शहर में 21 वर्षीय गर्भवती मारिया कैमिला पोतोसी की हत्या और उसके अजन्मे बच्चे का लापता होना, साथ ही अर्जेंटीना में 32 वर्षीय माइकेला अल्बोर्नोज़ का एक महीने से अधिक समय से गायब रहना, इनमें प्रमुख हैं। कोलंबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला ने इसे “घृणित” बताते हुए महिलाओं की सुरक्षा को अपनी सरकार की प्राथमिकता बनाने का वादा किया है।
जांच के अनुसार, पोतोसी को आखिरी बार 16 जुलाई को एक मोटरसाइकिल पर किसी महिला के साथ देखा गया था। चार दिन बाद उसका शव बंधे हाथ-पैरों के साथ नदी किनारे मिला। परिजनों का दावा है कि शव से बच्चा गायब था, हालांकि अभी तक फोरेंसिक जांच से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने मोटरसाइकिल चालक महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, और 20 करोड़ पेसो (लगभग 50,000 डॉलर) के इनाम की घोषणा की गई है। वहीं, अर्जेंटीना में अल्बोर्नोज़ के मामले में परिवार का कहना है कि वह मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं और बिना दवा के नहीं रह सकतीं। हाल ही में सांता फे प्रांत में एक सड़क कैमरे में उनकी तस्वीर मिलने से खोज का दायरा बढ़ गया है।
असैन्य समाज और मानवाधिकार संस्थाओं ने इन वारदातों को महज व्यक्तिगत झगड़े या “असहिष्णुता” के रूप में देखने के बजाय व्यापक आपराधिक नेटवर्क और लिंग-आधारित हिंसा की कड़ी के रूप में जांचने की मांग की है। कोलंबिया की डिफेंसोरिया डेल पुएब्लो ने फिस्कलिया से सख्त जांच और गुमशुदगी के मामलों में तत्काल प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत करने को कहा है। इस बीच, मेक्सिको में राष्ट्रीय जन सुरक्षा प्रणाली के जून रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ जानबूझकर चोट पहुंचाने के 7,476 और पारिवारिक हिंसा के 25,031 मामले दर्ज हुए। ब्राजील के पाराइबा राज्य में इस साल की पहली छमाही में रोजाना औसतन दो हिंसक मौतें दर्ज की गईं।
कोलंबिया के राष्ट्रपति-चुनाव दे ला एस्प्रिएला, जो कभी नशा तस्करों के वकील रह चुके हैं, ने चुनाव प्रचार के दौरान सशस्त्र समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का वादा किया था। उनके समर्थकों का मानना है कि इससे हिंसा पर रोक लगेगी, लेकिन संघर्ष पीड़ितों और विश्लेषकों को डर है कि टकराव की नीति से स्थिति और बिगड़ सकती है। राजधानी बोगोटा की एक पीड़िता एम्पारो मोरेनो ने कहा, “मैंने हताशा में उन्हें वोट दिया, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह हिंसा पर काबू पा सकेंगे।”
जांच एजेंसियां फिलहाल सभी मामलों में सुराग जुटाने में लगी हैं। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले पुलिस और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। भारतीय संदर्भ में देखें तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े दर्शाते हैं कि दक्षिण एशिया में भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। लैटिन अमेरिकी देशों की तरह, यहां भी सामाजिक-आर्थिक कारक और संगठित अपराध हिंसा को बढ़ावा देते हैं। कोलंबिया, मेक्सिको और ब्राजील में चल रही यह लहर फिर से इस बात की याद दिलाती है कि लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए केवल कठोर कानून ही नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव और पीड़ित-केंद्रित न्याय प्रणाली की जरूरत है।
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