
ओमान ने यूरोप को चेताया: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर शुल्क संभव, पूर्व-युद्ध स्थिति की बहाली असंभव
ओमान ने यूरोपीय अधिकारियों से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध-पूर्व यथास्थिति वापस नहीं आएगी और जहाजों को प्रदूषण-नियंत्रण व नेविगेशन सेवाओं के लिए शुल्क देना पड़ सकता है।
ओमान ने यूरोपीय अधिकारियों को सूचित किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध-पूर्व की स्थिति की बहाली संभव नहीं है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कुछ शुल्क लगाए जा सकते हैं। निजी वार्ता से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ओमानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के पालन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जलडमरूमध्य के प्रदूषण-नियंत्रण या जहाजों को नेविगेशन सहायता जैसी सेवाओं के बदले शुल्क लिया जा सकता है। यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी शुल्क अनिवार्य होंगे या नहीं। ओमान वैश्विक समुद्री गलियारों, जिनमें एशिया का मलक्का जलडमरूमध्य भी शामिल है, में प्रचलित प्रणालियों का अध्ययन कर रहा है।
अमेरिका, यूरोप और खाड़ी के अरब देश इस संभावना को लेकर चिंतित हैं कि ओमान ईरान के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए शुल्क या टोल प्रणाली स्थापित कर सकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को पेरिस में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात करेंगे, ताकि जलडमरूमध्य में मुक्त आवागमन सुनिश्चित किया जा सके। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बहरीन में कहा कि अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने एक संयुक्त वक्तव्य में किसी भी टोल या शुल्क को खारिज किया है। वहीं, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान ने ट्रंप प्रशासन को बताया है कि वह जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं चाहता, हालांकि तेहरान ओमान के साथ मिलकर जलडमरूमध्य के यातायात का संयुक्त प्रबंधन करने पर जोर दे रहा है।
संभावित शुल्कों से कच्चे माल के व्यापारियों और शिपिंग कंपनियों को प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। ओमान ने पिछले सप्ताह विरोधाभासी संकेत भेजे: एक ओर उसने ईरान के साथ जलडमरूमध्य के प्रबंधन और लागतों पर चर्चा का संयुक्त बयान जारी किया, वहीं दो दिन बाद अमेरिका और जीसीसी के साथ एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए जिसमें किसी भी शुल्क को अस्वीकार किया गया। यूरोपीय अधिकारियों को बताया गया कि ओमान ईरान के दबाव में है, जिसने संघर्ष के दौरान ओमानी क्षेत्र में मिसाइलें और ड्रोन दागे थे और हवाई हमलों से क्षति के बावजूद खाड़ी में प्रमुख सैन्य शक्ति बना हुआ है।
फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर बमबारी शुरू करने के बाद तेहरान ने हमलों और खदानों के जरिए जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। अब शांति वार्ता के बीच ईरान ओमान के साथ संयुक्त प्रशासन चाहता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री के अनुसार, ईरान ने 60 दिनों तक कोई पारगमन शुल्क न लगाने का वादा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी शुल्क को अस्वीकार्य बताया है। ओमान पारंपरिक रूप से तटस्थ मध्यस्थ रहा है, लेकिन अब उसे पश्चिमी सहयोगियों और ईरान के बीच संतुलन साधना पड़ रहा है।
मैक्रों-सुल्तान बैठक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा होगी, जो होर्मुज से मुक्त और बिना शर्त आवागमन पर निर्भर है। 60 दिनों की अस्थायी राहत के बाद जलडमरूमध्य के भविष्य पर बातचीत जारी रहेगी। फिलहाल, ओमान द्वारा शुल्क प्रणाली का अध्ययन और ईरान का संयुक्त प्रबंधन पर जोर इस रणनीतिक जलमार्ग के शासन को लेकर अनिश्चितता बनाए हुए हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ओमान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध-पूर्व की स्थिति में नहीं लौटेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। ओमानी अधिकारियों ने ईरान के वादों पर संदेह जताया और इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण सफाई और नौवहन सहायता सेवाओं के बदले शुल्क उचित ठहराया जा सकता है।
ओमान ने यूरोपीय देशों को सूचित किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना शुल्क-आधारित हो सकता है, क्योंकि ईरान पर अमेरिकी बमबारी से पहले की स्थिति में लौटना असंभव है। ओमानी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का पालन करने का वचन देते हैं, लेकिन ध्यान देते हैं कि सफाई और नौवहन सेवाओं के लिए शुल्क लगाया जा सकता है, जबकि वाशिंगटन और खाड़ी देश पहले ही शुल्क की संभावना को खारिज कर चुके हैं।
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