
नासा ने गिरते स्विफ्ट टेलीस्कोप को बचाने के लिए पहली बार रोबोटिक रेस्क्यू मिशन लॉन्च किया
प्रशांत महासागर के एक एटॉल से शुक्रवार को लॉन्च हुआ लिंक अंतरिक्ष यान, स्विफ्ट वेधशाला को पकड़कर उसकी कक्षा ऊपर उठाएगा।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक रोबोटिक मिशन लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य पृथ्वी की ओर गिर रही अपनी स्विफ्ट अंतरिक्ष वेधशाला को बचाना है। प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप समूह के एक एटॉल से सुबह 08:36 GMT पर एक संशोधित L-1011 विमान के पेट से पेगासस XL रॉकेट ने उड़ान भरी और लिंक नामक अंतरिक्ष यान को कक्षा में स्थापित किया। यह पहला प्रयास है जब किसी ऐसे उपग्रह को पकड़ने और ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश की जा रही है, जिसे मूल रूप से सर्विसिंग के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था।
स्विफ्ट वेधशाला 2004 में लॉन्च की गई थी और मूल रूप से केवल दो साल के मिशन के लिए बनाई गई थी, लेकिन इसने दो दशकों से अधिक समय तक काम किया। यह गामा-किरण विस्फोटों का अध्ययन करती है, जो ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली विस्फोट घटनाएं हैं। हाल के वर्षों में सूर्य की बढ़ी हुई सक्रियता के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का विस्तार हुआ है, जिससे 360 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी वायुमंडलीय कणों का घर्षण बढ़ गया है। इस घर्षण ने स्विफ्ट की गति धीमी कर दी और इसकी कक्षा तेज़ी से नीचे आ रही है—पिछले दो वर्षों में यह 600 किलोमीटर से घटकर लगभग 360 किलोमीटर पर आ गई। नासा के अनुमान के अनुसार, बिना किसी हस्तक्षेप के यह 2026 के अंत तक वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाती।
इस संकट को देखते हुए नासा ने अमेरिकी स्टार्टअप कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज को 30 मिलियन डॉलर का अनुबंध दिया, जिसके तहत कंपनी ने मात्र आठ-नौ महीनों में लिंक अंतरिक्ष यान तैयार किया। यह एक रेफ्रिजरेटर के आकार का रोबोट है, जिसमें तीन रोबोटिक भुजाएं, कैमरे और आयन थ्रस्टर्स लगे हैं। आने वाले हफ्तों में लिंक धीरे-धीरे स्विफ्ट के करीब पहुंचेगा, उसकी परिक्रमा करेगा और फिर तीनों भुजाओं से टेलीस्कोप के एक फ्लैंज को पकड़ेगा। इसके बाद यह स्विफ्ट को धीरे-धीरे लगभग 240 किलोमीटर ऊपर उसकी मूल कक्षा में ले जाएगा, जिसमें कम से कम एक महीने का समय लगेगा। पूरी प्रक्रिया 10 से 12 सप्ताह में पूरी होने की उम्मीद है।
स्विफ्ट का वैज्ञानिक महत्व इसे बचाने का प्रमुख कारण है। इसने अब तक 2,000 से अधिक गामा-किरण विस्फोटों का पता लगाया है और यह पुष्टि करने में मदद की है कि सोना और प्लैटिनम जैसे भारी तत्व ऐसे ही विस्फोटों में बनते हैं। नासा के खगोल भौतिकी प्रभाग के निदेशक शॉन डोमागल-गोल्डमैन ने इस प्रयास को “कम से कम कोशिश करने का अवसर” बताया, जबकि कंपनी के सीईओ घोनी ली ने इसे “उच्च जोखिम, उच्च प्रतिफल” वाला मिशन कहा। ब्रिटेन के ओपन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक शिमोन बार्बर ने भी इस बात पर जोर दिया कि स्विफ्ट जैसी क्षमता वाला कोई अन्य उपकरण फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए जोखिम के बावजूद यह प्रयास सार्थक है।
यह मिशन भविष्य के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है। नासा का हबल स्पेस टेलीस्कोप भी इसी तरह सौर गतिविधि के कारण धीरे-धीरे नीचे आ रहा है और कुछ वर्षों में इसी तरह के बचाव अभियान का उम्मीदवार बन सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें लिंक पर हैं, जो लगभग एक महीने में स्विफ्ट के पास पहुंचेगा और फिर पकड़ने की ऐतिहासिक कोशिश करेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एटलांटिका ब्लॉक स्विफ्ट टेलीस्कोप को बचाने के लिए रोबोटिक मिशन के प्रक्षेपण को एक नियमित लेकिन अभूतपूर्व तकनीकी ऑपरेशन के रूप में रिपोर्ट करता है। यह प्रक्षेपण विवरण, रॉकेट और मिशन समयरेखा पर केंद्रित है, बिना जोखिम को नाटकीय बनाए। स्वर तथ्यात्मक और तटस्थ है, इंजीनियरिंग चुनौती पर जोर देता है।
ईरानी ब्लॉक स्विफ्ट टेलीस्कोप के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालता है, जिसने 20 वर्षों से अधिक समय तक गामा-रे विस्फोटों का अध्ययन किया है, और बताता है कि इसका अवतरण 2024 में सौर गतिविधि से त्वरित हुआ है। यह बचाव मिशन को एक मूल्यवान संपत्ति को बचाने के लिए आवश्यक बताता है, लेकिन कक्षीय क्षय की प्राकृतिक प्रक्रिया पर भी ध्यान देता है। स्वर विश्लेषणात्मक और थोड़ा चिंतित है।
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