
ईरानी ड्रोन का 'जेलीफिश' रहस्य और अमेरिकी हताहतों पर विवाद: संघर्ष के छिपे आयाम
एक अमेरिकी पायलट के बयान ने खुफिया हलकों में मतभेद पैदा कर दिया है, वहीं घायल सैनिकों ने पेंटागन पर चोटों को कम करके आंकने का आरोप लगाया है।
ईरान के ऊपर एक अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान के मार गिराए जाने के बाद पायलट द्वारा दिए गए असामान्य ब्योरे ने अमेरिकी खुफिया समुदाय के भीतर एक अनसुलझे विवाद को जन्म दे दिया है। पायलट ने बताया कि उसने आसमान में कई ईरानी ड्रोनों को आपस में जुड़कर एक इकाई की तरह गतिमान देखा, जिसे अधिकारियों ने ‘जेलीफिश’ या ‘बारूदी सुरंगों का मैदान’ जैसी संरचना बताया। सीएनएन और इकोरूक की रिपोर्टों के अनुसार, इस वृत्तांत ने खुफिया एजेंसियों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है, क्योंकि पायलट को इजेक्ट होने के बाद सिर में चोट लगी थी और कुछ विशेषज्ञ उसकी टिप्पणियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, अमेरिकी वायुसेना ने इस मामले में सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन सेंटकॉम और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय ने चुप्पी साध ली है।
इसी संघर्ष के दौरान कुवैत में एक ईरानी ड्रोन हमले में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों और उनके परिवारों ने पेंटागन पर चोटों की गंभीरता को छिपाने का आरोप लगाया है। सीबीएस न्यूज से बात करते हुए चीफ वारंट ऑफिसर रॉडनी बेयरमैन की पत्नी ने बताया कि सेना ने उनके पति की गंभीर छर्रे की चोटों, सिर की चोट और फेफड़ों की क्षति को ‘गैर-गंभीर’ श्रेणी में रखा। सार्जेंट कोरी हिक्स, जो उसी हमले में बुरी तरह जख्मी हुए और कई आपातकालीन सर्जरी से गुज़रे, के परिवार को बताया गया कि उन्हें केवल जबड़े की मामूली चोट आई है। सेना के प्रवक्ता ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ‘गंभीर’ और ‘अति गंभीर’ जैसे वर्गीकरण 72 घंटे के भीतर जान जाने के जोखिम पर आधारित होते हैं, लेकिन परिवारों का कहना है कि इस परिभाषा ने वास्तविक पीड़ा और लंबी स्वास्थ्य-लाभ प्रक्रिया को ढक दिया।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इस बीच दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में चेतावनी जारी की कि किसी भी युद्धविराम उल्लंघन पर उसे ‘पारस्परिक जवाबी कार्रवाई का वैध और निश्चित अधिकार’ है। आईआरजीसी के बयान के अनुसार, अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में ईरानी हवाई सीमा का उल्लंघन किया, जिसके बाद ईरानी वायु रक्षा इकाइयों ने एक एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराया और एक आरक्यू-4 ड्रोन तथा एक एफ-35 लड़ाकू विमान को भागने पर मजबूर कर दिया। सेंटकॉम ने इससे पहले कहा था कि उसने ‘आत्मरक्षा’ के तहत दक्षिणी ईरान में मिसाइल साइटों और माइन बिछाने की कोशिश कर रहे जहाजों को निशाना बनाया।
वाशिंगटन के खुफिया आकलन के अनुसार, ईरान के ड्रोन कार्यक्रम को रूस और चीन से तकनीकी सहायता मिलने की आशंका है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि पायलट द्वारा वर्णित ‘एक-से-अनेक मेश्ड नेटवर्किंग’ क्षमता, जो एक ऑपरेटर को कई ड्रोनों को एक साथ नियंत्रित करने देती है, चीन और रूस दोनों के लिए प्राथमिकता का क्षेत्र रही है। चीन ने बार-बार वाहन-माउंटेड कंटेनरों और हेलीकॉप्टरों से लॉन्च किए जाने वाले लॉयटरिंग म्यूनिशन के बड़े झुंडों का प्रदर्शन किया है, जबकि रूस ने भी स्वार्मिंग तकनीकों को अपने ड्रोन युद्ध सिद्धांत में शामिल किया है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि ईरान के पास ठीक वैसी ही क्षमता मौजूद है जैसा पायलट ने बताया।
इन घटनाक्रमों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हमलों के बावजूद ईरान के साथ समझौते की संभावना बरकरार रहने की बात कही है, और रूसी विदेश मंत्री ने मॉस्को की ओर से दीर्घकालिक समझौते को सुगम बनाने की पेशकश की है। तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारत समेत दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। फिलहाल, खुफिया समुदाय पायलट के बयान की जांच कर रहा है, जबकि सेंटकॉम और पेंटागन ने सार्वजनिक टिप्पणी से परहेज किया है। युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है और अगला कदम संभवतः तकनीकी स्तर की बातचीत या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे के उठाए जाने के रूप में सामने आ सकता है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.30 | aligned |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.60 | critical |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
The White House and Congress debate whether aid to Iran is a national security risk, while intelligence agencies are divided.
Domestic political implications are prioritized, turning a technical revelation into a partisan talking point.
Iran suffers from Washington's contradictions, which cannot even decide whether to help it, while American pilots reveal the truth.
The enemy's division is emphasized to reinforce the narrative of a besieged but morally superior Iran.
India and South Asia watch from afar the American divisions, concerned about possible repercussions on the Gulf and their own energy supplies.
An external observer tone is adopted, reducing the stakes to a calculation of regional interests.
The Maghreb and Levant take note of the controversy but consider it a distant issue that does not directly affect national interests.
The event is normalized as one of many global tensions, reducing its local relevance.
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