
ईरान का विश्व कप सफर दर्दनाक अंत पर थमा, वीडियो रेफरी और अंतिम क्षणों के गोल ने छीनी उम्मीद
तीन मैचों में अजेय रहने के बावजूद ईरान गोल अंतर के कारण बाहर हुआ, जहां मिस्र के खिलाफ ऑफसाइड का बेहद बारीक फैसला और ऑस्ट्रिया-अल्जीरिया मुकाबले का नाटकीय अंतिम गोल निर्णायक साबित हुआ।
सिएटल स्टेडियम में शुक्रवार रात ईरान के डिफेंडर रामिन रेजाईयान की आंखें छलक पड़ीं। कुछ ही मिनट पहले, स्टॉपेज टाइम के तीसरे मिनट में शोजा खलीलजादेह ने गेंद को जाली में पहुंचाकर पूरे ईरानी दल को जश्न में डुबो दिया था—यह गोल टीम मेल्ली को पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचाने वाला था। लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) की लंबी जांच के बाद गोल रद्द कर दिया गया: खलीलजादेह के पैर का अंगूठा मिस्र के अंतिम डिफेंडर से बाल बराबर आगे था। इसके तुरंत बाद उनका एक और हेडर क्रॉसबार से टकराया, और मैच 1-1 से समाप्त हुआ।
यह ड्रॉ ईरान के लिए पूरे टूर्नामेंट की कहानी बन गया। ग्रुप जी में उन्होंने बेल्जियम, न्यूजीलैंड और मिस्र—तीनों मजबूत टीमों—के खिलाफ बराबरी खेली और एक भी मैच नहीं हारे। बेल्जियम के खिलाफ भी मेहदी तारेमी का एक गोल पैर की अंगुली के ऑफसाइड से रद्द हुआ था, और न्यूजीलैंड के विरुद्ध तारेमी का शॉट पोस्ट से लगा। तीन अंक और शून्य गोल अंतर के साथ ईरान ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा, और उसे आठ सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह बनाने के लिए दूसरे ग्रुपों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ा।
शनिवार को उम्मीद की तीन शर्तों में से दो पूरी नहीं हुईं: क्रोएशिया ने घाना को 2-1 से हराया और डीआर कांगो ने उज्बेकिस्तान को 3-1 से। अब सब कुछ ऑस्ट्रिया-अल्जीरिया मैच पर टिका था, जहां किसी एक टीम की जीत ईरान को अगले दौर में पहुंचा देती। 2-2 की बराबरी के बीच स्टॉपेज टाइम में अल्जीरिया के रियाद महरेज ने गोल कर 3-2 की बढ़त दिला दी—ईरानी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन अंतिम सेकंडों में ऑस्ट्रिया के सासा कलाजद्जिक ने हेडर से बराबरी का गोल दाग दिया, और स्कोर 3-3 हो गया। इस एक गोल ने ईरान का विश्व कप खत्म कर दिया।
मैदान के बाहर भी ईरान का सफर असाधारण चुनौतियों से भरा रहा। ईरान और मेज़बान अमेरिका के बीच युद्ध के कारण टीम को एरिजोना के बजाय मेक्सिको के तिजुआना में बेस कैंप बनाना पड़ा। अमेरिकी अधिकारियों ने खिलाड़ियों को मैच से एक दिन पहले ही प्रवेश की अनुमति दी और खेल के तुरंत बाद वापस मेक्सिको लौटने का आदेश दिया। कोच अमीर घलेनोई ने इसे “पूरे विश्व कप की सबसे प्रताड़ित टीम” बताया, जबकि कप्तान तारेमी ने कहा, “यह एक आपदा विश्व कप है।” ईरानी फुटबॉल महासंघ ने अमेरिकी आचरण को “अन्यायपूर्ण और खेल भावना के विपरीत” करार दिया। वहीं, तिजुआना के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए टीम ने कहा, “दोस्ती के लिए अनुवाद की जरूरत नहीं होती।”
इस तरह ईरान बिना कोई मैच हारे विश्व कप से बाहर हो गया—ईएसपीएन के अनुसार विश्व कप इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि स्टॉपेज टाइम में बढ़त और बराबरी दोनों गोल एक ही मैच में आए। तीन ड्रॉ के बावजूद गोल अंतर की कमी ने उन्हें अंतिम-32 में पहुंचने से रोक दिया, जबकि समान अंक वाली केप वर्डे दूसरे स्थान पर रहकर आगे बढ़ गई। ईरान के लिए अगला बड़ा मुकाबला अब एशियाई कप क्वालीफिकेशन होगा, जहां उन्हें इस निराशा को पीछे छोड़कर नए सिरे से शुरुआत करनी होगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Latin American press highlights Iran's criticism of the United States for 'unfair and unsportsmanlike' treatment during the World Cup. It also notes the team's gratitude towards the Mexican people for their hospitality. The elimination is portrayed as bitter, with emphasis on the logistical difficulties imposed by the US.
The Atlantic press presents a mixed picture: some outlets criticize FIFA and the US for double standards, while others mock ESPN's praise of Iran's 'remarkable' winless run. The overall narrative focuses on Iran's unlucky elimination and the team's emotional response.
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