
जापानी वाहन निर्माताओं की वैश्विक बिक्री में गिरावट, चीन और मध्य-पूर्व बने बड़े दबाव बिंदु
मई में आठ प्रमुख जापानी कंपनियों की कुल बिक्री 2.6 प्रतिशत घटकर 19.66 लाख इकाई रह गई, जिसमें चीन की कड़ी प्रतिस्पर्धा और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े व्यवधानों ने अहम भूमिका निभाई।
जापान के आठ बड़े वाहन निर्माताओं का मई में वैश्विक बिक्री आंकड़ा 2.6 प्रतिशत गिरकर 19.66 लाख इकाई पर आ गया, जो लगातार चौथे महीने गिरावट को दर्शाता है। टोयोटा की बिक्री में सबसे तीखी गिरावट दर्ज की गई, जो डाइहात्सु सहित 7.4 प्रतिशत घटकर 8.85 लाख इकाई रह गई। इस गिरावट का केंद्र दो भू-राजनीतिक और बाज़ारीय दबाव हैं: चीन में स्थानीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) ब्रांडों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मध्य-पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी अस्थिरता, जिसने आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा लागत को प्रभावित किया है।
चीन में टोयोटा की बिक्री 31.7 प्रतिशत लुढ़क गई, जिसके पीछे पेट्रोल की ऊंची कीमतों और बीवाईडी, गीली व चेरी जैसी कंपनियों के आक्रामक विस्तार को वजह बताया जा रहा है। होंडा की स्थिति और भी कमज़ोर रही, जिसकी चीन, मध्य-पूर्व और अफ़्रीका में बिक्री आधी रह गई। इसके विपरीत, सुज़ुकी ने भारत की मज़बूत मांग के दम पर वैश्विक बिक्री में 23.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि सुबारू और माज़दा को अमेरिकी बाज़ार से सहारा मिला। यह विभाजन दर्शाता है कि पारंपरिक वाहन निर्माताओं पर दबाव एक समान नहीं है; जिनका ईंधन-कुशल या हाइब्रिड मॉडलों पर ज़ोर है, उन्हें कुछ राहत मिल रही है।
मध्य-पूर्व का संकट सिर्फ बिक्री का नहीं, बल्कि उत्पादन और लागत का भी है। टोयोटा सालाना करीब 5-6 लाख वाहन इस क्षेत्र में निर्यात करती है, और कंपनी के लेखा प्रमुख के अनुसार इसका लगभग आधा हिस्सा प्रभावित होने की आशंका है। मई में टोयोटा का मध्य-पूर्व में बिक्री 38.6 प्रतिशत गिरी, जबकि होंडा की बिक्री में 52 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी दौरान, यूरोप में पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री घटी और ईवी-हाइब्रिड पंजीकरण बढ़े, जिसका सीधा लाभ टेस्ला और चीनी कंपनियों को मिला। इससे पारंपरिक यूरोपीय वाहन निर्माताओं पर दोहरा दबाव बन रहा है।
इन झटकों के बीच टोयोटा ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए परिचालन आय 3 खरब येन (लगभग 18.8 अरब डॉलर) रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के 3.8 खरब येन से कम है और विश्लेषकों की उम्मीदों से भी पीछे है। कंपनी ने कच्चे माल की बढ़ती लागत को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। आगे का रुख होर्मुज मार्ग के धीरे-धीरे खुलने और चीन में मूल्य प्रतिस्पर्धा की तीव्रता पर निर्भर करेगा। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव जापानी कंपनियों की तिमाही आय रिपोर्ट होगी, जो बताएगी कि लागत दबाव और भू-राजनीतिक जोखिम के बीच उनका मुनाफ़ा कितना सुरक्षित है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मई में आठ प्रमुख जापानी वाहन निर्माताओं की वैश्विक बिक्री सालाना आधार पर 2.6% घटकर 19.7 लाख इकाई रह गई। टोयोटा की बिक्री लगातार चौथे महीने गिरी, मध्य पूर्व में 40% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि होंडा की बिक्री चीन, मध्य पूर्व और अफ्रीका में आधी रह गई। सुजुकी ने मजबूत मांग के दम पर 23% की वृद्धि के साथ इस रुझान को तोड़ा।
ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से उत्पादन और रसद बाधित होने से मई में टोयोटा की वैश्विक बिक्री 7.4% गिर गई। अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद, जलडमरूमध्य धीरे-धीरे ही खुल रहा है और जहाजों पर हमले जारी हैं, जो क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑटो उद्योग की निर्भरता को रेखांकित करता है। चीन में आक्रामक स्थानीय इलेक्ट्रिक वाहन प्रतिस्पर्धा ने और दबाव बढ़ा दिया।
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