
इज़राइल का दक्षिण लेबनान में अनिश्चितकालीन सैन्य प्रवास: नेतन्याहू ने सेना को दी ‘पूर्ण स्वतंत्रता’
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इज़राइली सेना दक्षिण लेबनान से पीछे नहीं हटेगी और ज़रूरत पड़ने तक वहाँ बनी रहेगी, जबकि सेना ने बलों की अदला-बदली और तैनाती में कमी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को घोषणा की कि उन्होंने सेना को दक्षिण लेबनान में ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ के साथ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है और इज़राइली बल तब तक वहाँ से नहीं हटेंगे जब तक सुरक्षा आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो जातीं। इज़राइली रक्षा मंत्री यिसराइल कात्ज़ ने भी इसी रुख़ को दोहराते हुए कहा कि सेना लेबनान, सीरिया और ग़ज़ा में ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में बनी रहेगी। इसी बीच इज़राइली सेना रेडियो ने ख़बर दी कि सेना दक्षिण लेबनान में अपनी उपस्थिति घटा रही है और कुछ ब्रिगेडों को ‘आराम व तैयारी’ के लिए इज़राइल वापस बुला रही है। सैन्य सूत्रों के अनुसार यह क़दम सभी मोर्चों पर परिचालन बलों को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कुछ ब्रिगेडों को जनरल स्टाफ़ रिज़र्व के रूप में तैयार रखा जाएगा और ग़ज़ा व लेबनान के बीच बलों की अदला-बदली की जाएगी।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ इस इज़राइली रुख़ के विपरीत खड़ी हैं। लेबनानी सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से अल-अरबिया ने बताया कि बेरूत इज़राइली सेना की वापसी के लिए एक स्पष्ट समय-सारणी चाहता है, जबकि इज़राइल बफ़र ज़ोन में बने रहने और कार्रवाई की स्वतंत्रता पर ज़ोर दे रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने पहले ही कहा था कि लेबनान में युद्धविराम का अर्थ इज़राइली सेना की पूर्ण वापसी है। अमेरिकी पक्ष से जुड़ी जानकारी में विरोधाभास है: एक इज़राइली अधिकारी ने येदिओत अहरोनोत को बताया कि नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप को इज़राइल के दक्षिण लेबनान से न हटने पर सहमत कर लिया है, जबकि ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल युद्ध रोकने की बात कही गई है।
इस गतिरोध के व्यावहारिक निहितार्थ कई स्तरों पर दिख रहे हैं। इज़राइली सेना का बल घटाने का क़दम यह संकेत देता है कि वह दीर्घकालिक कम तीव्रता वाली उपस्थिति की योजना बना रही है, न कि पूर्ण निकासी की। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि इज़राइल ग़ज़ा पट्टी के 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र को नियंत्रित करता है और उत्तरी बस्तियों में सुरक्षा बहाल कर दी गई है। ये बयान एक ऐसे व्यापक सैन्य अभियान की ओर इशारा करते हैं जो हिज़्बुल्लाह और हमास दोनों के ख़िलाफ़ एक साथ जारी है। ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर नेतन्याहू की चेतावनी—कि वह कभी ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देंगे—इस क्षेत्रीय टकराव को और गहरा करती है।
व्यापक संदर्भ में, इज़राइल का यह रुख़ ईरान-अमेरिका वार्ता के नाज़ुक ढाँचे पर दबाव डाल सकता है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और क्षेत्रीय संघर्षों को रोकने की कोशिशें शामिल हैं। इराक़, जिसकी तेल निर्यात क्षमता जलडमरूमध्य बंद होने से बुरी तरह प्रभावित हुई है, ओपेक कोटा बढ़ाने की माँग कर रहा है, जो युद्ध के आर्थिक प्रभावों को दर्शाता है। फ़िलहाल, इज़राइली सेना ग़ज़ा और लेबनान के बीच ब्रिगेडों की अदला-बदली जारी रखेगी, और लेबनान के साथ वापसी की समय-सारणी पर बातचीत अनिर्णीत है। आने वाले सप्ताहों में ईरान-अमेरिका समझौते के क्रियान्वयन और अमेरिकी प्रशासन की ओर से इज़राइल पर संभावित दबाव इस मोर्चे की दिशा तय करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
Netanyahu's statements about maintaining a military presence in South Lebanon and claiming total freedom of action are reported with concern. The narrative underscores Israel's determination to stay and reshape the regional balance, while hinting at the risks of prolonged occupation.
The Israeli prime minister declared that troops will remain in South Lebanon as long as necessary, while the army is rotating forces to maintain readiness. The coverage is factual, noting both the continued presence and the logistical adjustments without emotional emphasis.
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