
स्पेनिश संसद ने प्रधानमंत्री सांचेज़ से विश्वास मत या इस्तीफे की मांग की
गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे पेद्रो सांचेज़ पर राजनीतिक दबाव बढ़ाया, लेकिन सरकार ने इसे प्रभावहीन बताया।
स्पेन की कांग्रेस ऑफ डेप्युटीज़ ने बृहस्पतिवार को एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ से आग्रह किया कि वे या तो शीघ्र चुनाव बुलाएँ या संसद में विश्वास मत का सामना करें। पॉपुलर पार्टी (पीपी) द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को 178 मतों का समर्थन मिला, जबकि 171 सदस्यों ने विरोध किया और एक अनुपस्थित रहा। इसमें कहा गया कि सांचेज़ द्वारा सीधे नियुक्त और समर्थित राजनीतिक पदाधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की शृंखला उनके इस्तीफे की माँग करती है। प्रस्ताव के एक अन्य खंड में कांग्रेस की मेज़ (ब्यूरो) द्वारा पूर्व में शीघ्र चुनाव पर मतदान रोकने की भी निंदा की गई।
विपक्षी दलों पीपी और वोक्स का कहना है कि सत्तारूढ़ सोशलिस्ट पार्टी (पीएसओई) के खिलाफ न्यायिक जाँचों का दायरा इतना व्यापक है कि सरकार की नैतिक साख समाप्त हो चुकी है। विशेष रूप से, कातालान स्वतंत्रता-समर्थक दल जुंट्स का समर्थन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि 2023 में इसी दल ने सांचेज़ के शपथ-ग्रहण को संभव बनाया था। जुंट्स के नेतृत्व ने संकेत दिया है कि सांचेज़ के साथ उनका विधायी गठबंधन अब समाप्त हो चुका है। दूसरी ओर, न्याय मंत्री फ़ेलिक्स बोलान्योस ने प्रस्ताव को “राजनीतिक रूप से शून्य” बताते हुए कहा कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। सांचेज़ ने स्वयं स्पष्ट किया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे और न ही अभी चुनाव बुलाएँगे।
यह प्रस्ताव पूर्व परिवहन मंत्री होज़े लुइस आबालोस को भ्रष्टाचार के एक मामले में 24 वर्ष की सज़ा सुनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है। पीपी के अनुसार, यह और इसी तरह के अन्य मामले सांचेज़ की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी को रेखांकित करते हैं। हालाँकि, स्पेन के संविधान के तहत केवल प्रधानमंत्री को ही विश्वास मत प्रस्ताव लाने या संसद भंग करने का अधिकार है। विपक्ष अभी तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया है, क्योंकि उसके पास आवश्यक बहुमत नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मतदान ने सांचेज़ के संसदीय अलगाव को उजागर किया है, जिससे आने वाले महीनों में बजट जैसे विधेयकों का पारित होना कठिन हो सकता है। यूरोपीय संघ के एक प्रमुख सदस्य देश में यह अस्थिरता भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते जैसी वार्ताओं पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकती है, ऐसा कुछ कूटनीतिक हलकों का आकलन है। फिलहाल, प्रस्ताव का कोई कानूनी बल नहीं है, लेकिन सरकार पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। अगला ठोस कदम संभवतः तब देखने को मिलेगा जब जुंट्स या अन्य सहयोगी दल विधायी समर्थन वापस लेने का औपचारिक निर्णय लेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्पेन की संसद ने पेड्रो सांचेज़ को विश्वास मत का सामना करने के लिए एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया, जबकि भ्रष्टाचार के घोटालों ने पीएसओई को हिला दिया है। सरकार ने 'वे हमें नहीं हिला सकते' वाले रुख के साथ जवाब दिया, जबकि विपक्षी नेता फेइजू चिंता के संकेत दिखा रहे हैं। राजनीतिक नाटक को विडंबना और वास्तविक परिणामों को लेकर संशय के साथ प्रस्तुत किया गया।
स्पेन के सांसदों ने प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के इस्तीफे की मांग करते हुए एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया, जो उनके सहयोगियों और सत्तारूढ़ सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों के कारण है। प्रस्ताव में उनसे इस्तीफा देने या जल्दी चुनाव बुलाने का आग्रह किया गया है। यह मतदान सांचेज़ सरकार पर राजनीतिक दबाव को दर्शाता है।
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