
रूस की दो तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमले, एक की मौत और ईंधन संकट गहराया
यूक्रेन ने क्रास्नोडार और यारोस्लाव क्षेत्रों में रूसी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले किए, जिससे आग और हताहत हुए; कीव इसे रूस की युद्ध क्षमता कमजोर करने की रणनीति बता रहा है।
यूक्रेन ने रविवार तड़के दक्षिणी रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र में स्लावयांस्क-ना-कुबानी रिफाइनरी और मॉस्को के पूर्व में यारोस्लाव क्षेत्र की एक दूसरी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए। रूसी अधिकारियों के अनुसार गिरे हुए ड्रोन के मलबे से रिफाइनरी में भीषण आग लग गई और स्लावयांस्क में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पास के गांव में एक अन्य घायल हो गया। बेलगोरोद सीमावर्ती क्षेत्र में भी यूक्रेनी ड्रोन हमलों में एक नागरिक मारा गया। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रात के दौरान 12 से अधिक क्षेत्रों में कुल 213 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए गए। इसी दौरान, रूस ने कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों और 142 लंबी दूरी के ड्रोनों से हमला किया, जिसमें सात मिसाइलें और 125 ड्रोन मार गिराए जाने की यूक्रेनी वायुसेना ने पुष्टि की।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने दोनों रिफाइनरियों पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए टेलीग्राम पर लिखा कि “हर हमले का अर्थ रूसी युद्ध मशीन को चलाने वाले संसाधनों में कमी और शांति की ओर एक और कदम है।” कीव के अधिकारियों के अनुसार, ये लंबी दूरी की “प्रतिबंध” कार्रवाइयाँ रूस की सैन्य आपूर्ति और ईंधन राजस्व को ठप करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, ताकि क्रेमलिन को वार्ता की मेज पर लाया जा सके। दूसरी ओर, क्रास्नोडार के गवर्नर वेनियामिन कोंद्रात्येव ने हमले को “बड़े पैमाने पर दुश्मन का ड्रोन हमला” बताया और यारोस्लाव के गवर्नर ने सुरक्षा कारणों से मॉस्को जाने वाली सड़कों पर यातायात अस्थायी रूप से रोकने की पुष्टि की।
स्लावयांस्क रिफाइनरी दक्षिणी रूस की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरियों में से एक है, जो सालाना लगभग 40 लाख टन कच्चा तेल संसाधित करती है और काला सागर बंदरगाहों के माध्यम से ईंधन तेल, नाफ्था और समुद्री ईंधन का निर्यात करती है। पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में तेज हुए इस ड्रोन अभियान ने रूस के कई हिस्सों में ईंधन की गंभीर कमी पैदा कर दी है; पेट्रोल पंपों पर कतारें और राशनिंग की खबरें हैं। यूक्रेन के लंबी दूरी के स्ट्राइक क्षमता के विकास ने — 2022 में 630 किलोमीटर से बढ़कर अब 1,750 किलोमीटर तक — रूसी सैन्य लॉजिस्टिक पर दबाव बढ़ाया है।
यूक्रेन ने पश्चिमी सहयोगियों से लंबी दूरी के हथियारों की सीमित आपूर्ति के बीच घरेलू ड्रोन उद्योग को तेजी से विकसित किया है, जिसमें कार्बन प्रिंटर और लॉनमूवर इंजन जैसी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। टेक्सास स्थित बेकर इंस्टीट्यूट के विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन अब अपनी सीमा से 2,000 किलोमीटर दूर तक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को विश्वसनीय रूप से खतरे में डाल सकता है। संघर्ष का यह चरण तब सामने आया है जब दोनों पक्ष शांति वार्ता की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं, परंतु जमीनी सैन्य कार्रवाइयों में तीव्रता जारी है। रूसी हमले यूक्रेनी शहरों को निशाना बना रहे हैं और यूक्रेन रूसी ऊर्जा अवसंरचना पर पलटवार कर रहा है। फिलहाल, किसी ठोस कूटनीतिक पहल की कोई घोषणा नहीं हुई है और हमलों के जारी रहने की आशंका है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Ukrainian drone strikes on Russian oil refineries are portrayed as a daring and strategically vital campaign. The attacks aim to cripple Russia's fuel supplies and military logistics, bringing the war closer to an end. Coverage highlights the audacity of Ukraine's long-range capabilities and the resulting fuel shortages inside Russia.
European coverage balances reports of Ukrainian drone attacks on Russian refineries with news of Russian missile strikes on Ukrainian cities. The focus is on the tactical escalation and the reciprocal nature of the strikes, with casualties reported on both sides. The tone is measured, presenting the event as part of the ongoing conflict without glorification.
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