
अटलांटा में इतिहास और खेल के बीच स्कालोनी का स्पष्ट रुख
अर्जेंटीना के कोच ने इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल को माल्विनास युद्ध की स्मृतियों से अलग रखने की अपील करते हुए टीम की खेल-शैली पर ध्यान केंद्रित किया।
अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में मंगलवार को प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस का केंद्र कोई सामरिक दांव नहीं, बल्कि लियोनेल स्कालोनी का एक साफ संदेश बना: “यह सिर्फ एक फुटबॉल मैच है, इसे किसी और चीज से मिलाना पागलपन होगा।” अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच 24 साल बाद हो रहे इस पहले आधिकारिक मुकाबले से पहले कोच ने 1982 के माल्विनास युद्ध और 1986 के माराडोना क्षणों की गूंज को खेल की वास्तविकता से अलग करने की जरूरत पर जोर दिया। स्कालोनी ने कहा कि शहीदों को याद करना जरूरी है, लेकिन मौजूदा खिलाड़ियों और दर्शकों का उस इतिहास से कोई लेना-देना नहीं है।
यह बयान उस वक्त आया जब अर्जेंटीना की टीम स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में संघर्षपूर्ण जीत के बाद अपनी पहचान तलाश रही थी। स्कालोनी ने स्वीकार किया कि टीम को “गेंद के साथ खेलना फिर से सीखना होगा” और वह लंबे अंतराल तक अपनी सामान्य लय से दूर रही। उन्होंने संकेत दिए कि इंग्लैंड की विस्फोटक गति—खासकर जूड बेलिंगहम और हैरी केन जैसे खिलाड़ियों—को बेअसर करने के लिए शुरुआती ग्यारह में बदलाव संभव है, हालांकि अंतिम फैसला मैच से पहले ही खिलाड़ियों को बताया जाएगा। कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी खिलाड़ी पूरी शारीरिक स्थिति में न होने पर नहीं उतारा जाएगा, चाहे मैच कितना भी बड़ा क्यों न हो।
दक्षिण अमेरिकी मीडिया में इस रुख को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। अर्जेंटीना के कई अखबारों ने स्कालोनी के तकनीकी फोकस को रेखांकित किया, जबकि डिएगो माराडोना जूनियर ने इटली से एक विपरीत स्वर जोड़ते हुए कहा कि “इंग्लैंड के खिलाफ कुछ भी सामान्य नहीं है।” ब्राजील के समाचार आउटलेट्स ने इस ऐतिहासिक तनाव को विस्तार से समझाया, जिसमें 649 अर्जेंटीनी और 255 ब्रिटिश सैनिकों की मौत का जिक्र किया गया। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने इस मैच को टूर्नामेंट का सबसे अधिक जोखिम वाला मुकाबला करार दिया और माल्विनास से जुड़े झंडों पर स्टेडियम में प्रतिबंध लगा दिया।
खेल के मैदान पर अर्जेंटीना की राह आसान नहीं रही। केप वर्डे और मिस्र के खिलाफ शुरुआती झटकों के बाद स्विट्जरलैंड को हराने तक टीम ने कई बार अपनी सीमाएं दिखाईं, लेकिन लियोनेल मेसी का निर्णायक प्रभाव लगातार बना रहा। यह पहला मौका होगा जब मेसी अपने करियर में इंग्लिश टीम के सामने होंगे। दूसरी ओर, इंग्लैंड ने नॉर्वे को अतिरिक्त समय में हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और थॉमस टूशेल की टीम छह दशक बाद पहली विश्व कप फाइनल की तलाश में है। स्कालोनी ने स्पेन की फ्रांस पर 2-0 की जीत को “इस विश्व कप का सबसे संपूर्ण प्रदर्शन” बताते हुए कहा कि फाइनल में पहुंचने वाली टीम को हर हाल में कष्ट सहना पड़ता है।
अब सारी निगाहें बुधवार की शाम पर टिकी हैं, जहां विजेता रविवार को स्पेन के खिलाफ खिताबी मुकाबला खेलेगा। स्कालोनी ने प्रशंसकों से कहा कि वे इस पल का आनंद लें और भरोसा रखें कि टीम आखिरी सांस तक सब कुछ झोंक देगी। अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने के इरादे से उतरेगी, जबकि इंग्लैंड के सामने 1966 के बाद पहली बार इस मुकाम को छूने का मौका होगा।
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