
अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने के लिए इज़राइल का 50 मिलियन डॉलर का अभियान
इज़राइल सरकार ने अमेरिका में अपनी छवि सुधारने के लिए AI संदेशों और रूढ़िवादी मीडिया का सहारा लिया, जबकि अमेरिकी जनता में उसके प्रति असंतोष बढ़ा है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल ने अमेरिकी जनमत को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए एक व्यापक प्रभाव अभियान पर लगभग 50 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इस अभियान में अमेरिकियों के मोबाइल फोन पर ‘फ्रेंड्स फॉर पीस’ नामक समूह से AI-जनित संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल शांति वार्ता के वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव जैसे सवाल पूछे जाते हैं। साथ ही, पूर्व ट्रंप सलाहकार ब्रैड पार्स्केल की कंपनी को 45 मिलियन डॉलर से अधिक का अनुबंध देकर रूढ़िवादी मीडिया नेटवर्क और प्रभावशाली सोशल मीडिया हस्तियों के माध्यम से सामग्री प्रसारित की जा रही है। यह कदम तब उठाया गया है जब प्यू रिसर्च सेंटर के मार्च सर्वेक्षण में पाया गया कि 60% अमेरिकी वयस्क इज़राइल को नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, जो गाज़ा और ईरान में सैन्य कार्रवाइयों से उपजा है।
अमेरिकी राजनीतिक हलकों में इस अभियान को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात से सहमत हैं कि इज़राइल समेत कुछ विदेशी देश अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी इज़राइल सरकार के भीतर ऐसे तत्वों की ओर इशारा किया जो ईरान के साथ युद्ध को लम्बा खींचने के लिए अमेरिकी राय को प्रभावित करना चाहते हैं। दूसरी ओर, क्विंसी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता निक क्लीवलैंड-स्टाउट के अनुसार, इज़राइल इस वर्ष अमेरिका में प्रभाव प्रयासों पर किसी भी अन्य देश से अधिक खर्च करने की राह पर है, जो संघीय सरकार को बताई गई राशियों से स्पष्ट है। इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने 2026 के लिए वैश्विक छवि सुधार हेतु 700 मिलियन डॉलर से अधिक के बजट की घोषणा की है।
इस अभियान का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि यह केवल पारंपरिक मीडिया तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, ब्रैड पार्स्केल की टीम ने चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसे AI उपकरणों के परिणामों को प्रभावित करने के लिए Allyvia.org जैसी वेबसाइटें बनाई हैं, ताकि उपयोगकर्ता जब अमेरिका-इज़राइल संबंधों के बारे में पूछें तो वे इज़राइल-समर्थक स्रोतों का संदर्भ दें। इसके अलावा, युवा अमेरिकियों को लक्षित करने के लिए टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर Gen Z के लिए सामग्री तैयार की जा रही है। प्यू के आँकड़े बताते हैं कि 18-29 वर्ष के 75% अमेरिकी इज़राइल के प्रति नकारात्मक रवैया रखते हैं, जो संभवतः इस रणनीति के पीछे का कारण है। अमेरिकी प्रगतिशील हलकों में, AIPAC के प्रभाव में कमी देखी जा रही है, और हाल के डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनावों में कई ऐसे उम्मीदवार जीते हैं जिन्होंने गाज़ा युद्ध के विरोध को अपना मुख्य मुद्दा बनाया और AIPAC समर्थित प्रतिद्वंद्वियों को हराया।
वैश्विक संदर्भ में, इस तरह के प्रभाव अभियान कोई नई बात नहीं हैं। पूर्व में, सीरिया की पूर्व प्रथम महिला अस्मा असद ने भी अमेरिकी PR कंपनियों की मदद से छवि सुधारने का प्रयास किया था। स्वयं अमेरिका ने हंगरी में जनमत को यूक्रेन के समर्थन में मोड़ने के लिए प्रचार अभियान चलाए हैं। इज़राइल का वर्तमान प्रयास ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश नीति में ‘सॉफ्ट पावर’ के साधनों का पुनर्गठन हो रहा है, जैसा कि USAID के बंद होने और नए तरीकों की ओर बदलाव से संकेत मिलता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि केवल विज्ञापन और AI-संचालित सामग्री से गहरी राजनीतिक असहमति को दूर करना चुनौतीपूर्ण है; स्टीव बैनन जैसे रणनीतिकारों ने टिप्पणी की है कि “वे कुछ ऐसा बेचने की कोशिश कर रहे हैं जो बिक नहीं सकता।” फिलहाल, यह अभियान जारी है और 2026 का बढ़ा हुआ बजट इंगित करता है कि इज़राइल अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने के अपने प्रयासों को और तेज़ करेगा, जबकि अमेरिकी राजनीति में फलस्तीन समर्थक आवाज़ें मज़बूत हो रही हैं।
| इज़राइली प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.80 | critical |
Israel acknowledges its image crisis but responds with a mix of self-criticism and diplomatic pragmatism.
The opinion piece uses moral outrage to expose hypocrisy, while the factual report normalizes the spending as standard practice, creating a tension that legitimizes both perspectives.
The neutral report omits deep moral critiques, while the opinion ignores strategic reasons for the campaign.
The United States balances traditional loyalty with new democratic pressures, maintaining a pragmatic approach to the alliance.
By presenting both AIPAC's slipping grip and the reaffirmation of the alliance, an apparent balance is created that masks the real tension, suggesting foreign policy is above public opinion.
The specific use of AI in the campaign is omitted, downplaying the scale of Israeli interference.
Iran denounces Israel's manipulation of US opinion via AI as proof of its moral collapse.
The narrative builds credibility by contrasting artificial propaganda with genuine human sentiment, reversing the roles of victim and aggressor.
Any mention of internal Israeli divisions or the US democratic debate is omitted, which would weaken the portrayal of a monolithic Israel.
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