
कांगो में इबोला प्रकोप: अगले सप्ताह दो उपचारों का परीक्षण शुरू, बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए पहला क्लिनिकल ट्रायल
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुर्लभ बुंडिबुग्यो इबोला वायरस के खिलाफ MBP134 और रेमडेसिविर के क्लिनिकल परीक्षण की घोषणा की, जिसमें 500-1000 प्रतिभागी शामिल होंगे और मृत्यु दर कम करने की क्षमता का आकलन किया जाएगा।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बुंडिबुग्यो इबोला वायरस का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है, अब तक 1,094 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 277 मौतें दर्ज की गई हैं। पड़ोसी युगांडा में 20 मामले सामने आए हैं, और फ्रांस में एक स्वास्थ्यकर्मी के संक्रमित पाए जाने से यह संकट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घोषणा की है कि अगले सप्ताह से इटुरी प्रांत में दो संभावित उपचारों—मोनोक्लोनल एंटीबॉडी MBP134 और एंटीवायरल रेमडेसिविर—का क्लिनिकल परीक्षण शुरू होगा। यह इस दुर्लभ स्ट्रेन के लिए पहला ऐसा परीक्षण है, क्योंकि इसके खिलाफ़ अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या उपचार मौजूद नहीं है।
परीक्षण का उद्देश्य यह आकलन करना है कि ये दवाएं अकेले या संयोजन में बुंडिबुग्यो वायरस से संक्रमित मरीज़ों की मृत्यु दर को कम कर सकती हैं या नहीं। इसमें 500 से 1,000 प्रतिभागी शामिल होने की संभावना है, हालांकि यह संख्या उपचारों की प्रारंभिक प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी—जितनी जल्दी सकारात्मक संकेत मिलेंगे, उतने ही कम मरीज़ों की आवश्यकता होगी। यह परीक्षण एक संघ द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसमें कांगो का राष्ट्रीय जैवचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, चिकित्सा मानवीय संगठन अलीमा, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय और WHO शामिल हैं। दवाओं की खुराकें संयुक्त राज्य अमेरिका और गिलियड साइंसेज़ द्वारा दान की गई हैं।
ज़मीनी स्तर पर प्रकोप अब भी प्रतिक्रिया प्रयासों से आगे निकल रहा है। इटुरी क्षेत्र दशकों से सशस्त्र संघर्षों से प्रभावित है, जहाँ स्थानीय समुदायों में बाहरी लोगों और अधिकारियों के प्रति गहरा अविश्वास व्याप्त है। स्वास्थ्यकर्मियों पर सात हमले दर्ज किए गए हैं, और संपर्क अनुरेखण (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) की दर 70% है, जो 95% के लक्ष्य से काफ़ी कम है। खनन क्षेत्र होने के कारण युवा श्रमिकों का लगातार आना-जाना वायरस को नए इलाकों में फैलाने का जोखिम बढ़ाता है। फ्रांस में अलीमा के एक डॉक्टर का मामला अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के सामने मौजूद ख़तरों को रेखांकित करता है। सकारात्मक पक्ष यह है कि कांगो में परीक्षण क्षमता प्रतिदिन 30 से बढ़कर 2,000-3,000 तक पहुँच गई है, और उपचार केंद्रों में बिस्तरों की संख्या 10 से बढ़कर 500 से अधिक हो गई है। फिर भी, WHO और अफ़्रीकी संघ की संयुक्त तैयारी योजना के लिए 51.8 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है, जबकि वित्तीय सहायता अभी अपर्याप्त बनी हुई है।
अगला ठोस कदम अगले सप्ताह परीक्षण का आरंभ है, जिसके साथ ही प्रभावित समुदायों को शामिल करने और उन्हें सूचित करने का काम तेज़ किया जाएगा। चूँकि इस स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, संपर्क अनुरेखण के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। परीक्षण के दौरान सुरक्षा और प्रभावकारिता के आँकड़े आने तक, प्रकोप की रोकथाम के लिए बेहतर निगरानी, सुरक्षित दफ़न प्रथाएँ और सामुदायिक विश्वास बहाली पर ही निर्भर रहना होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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कांगो में इबोला का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है, जिससे स्वास्थ्यकर्मी ख़तरे में हैं। अगले सप्ताह डब्ल्यूएचओ दो एंटीवायरल दवाओं का क्लिनिकल परीक्षण शुरू करेगा, जिनमें से एक अमेरिका द्वारा दान की गई है, जिससे महामारी को रोकने की ठोस उम्मीद जगी है।
अगले सप्ताह कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला के दो उपचारों का क्लिनिकल परीक्षण शुरू होगा। अब तक एक हज़ार से अधिक मामले और 277 मौतें दर्ज की गई हैं, और स्वास्थ्यकर्मी कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।
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