
होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन टैंकरों पर हमले, कतर ने ईरान को ठहराया जिम्मेदार
होर्मुज जलडमरूमध्य में कतर के एलएनजी टैंकर समेत तीन जहाजों पर हमलों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में 6-7 जुलाई की रात तीन वाणिज्यिक टैंकरों पर हमले हुए, जिनमें कतर का तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक अल रेकयात भी शामिल है। ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी (यूकेएमटीओ) के अनुसार, अज्ञात प्रक्षेप्य लगने से अल रेकयात के इंजन कक्ष में आग लग गई और धुएं के कारण विस्फोट का खतरा पैदा हो गया। चालक दल सुरक्षित है, लेकिन जहाज नियंत्रण खो बैठा। इसी दौरान सऊदी अरब का कच्चे तेल का सुपरटैंकर वेदयान भी ओमान के तट के पास क्षतिग्रस्त हुआ, और बाद में एक तीसरे टैंकर पर भी हमले की सूचना मिली। किसी भी घटना में जनहानि नहीं हुई, लेकिन ये हमले उस अंतरिम संघर्षविराम के बावजूद हुए जो अमेरिका और ईरान के बीच पिछले माह स्थायी शांति वार्ता के लिए हस्ताक्षरित हुआ था।
कतर के विदेश मंत्रालय ने ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए इसे “अंतरराष्ट्रीय नौवहन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर अस्वीकार्य हमला” बताया और पूर्ण कानूनी जिम्मेदारी तय करने की बात कही। वहीं, ईरानी राज्य टेलीविजन ने अनाम स्रोतों के हवाले से संकेत दिया कि टैंकर ने बार-बार चेतावनियों को नजरअंदाज किया, लेकिन आधिकारिक रूप से हमले की जिम्मेदारी नहीं ली। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कम से कम दो मिसाइलें दागीं। सऊदी अरब की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ये हमले ऐसे समय हुए हैं जब ईरान लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाज केवल उसके द्वारा अनुमोदित मार्गों का ही इस्तेमाल करें और भविष्य में पारगमन शुल्क भी वसूला जाए। अमेरिका और खाड़ी देश इस दावे को खारिज करते हुए मुक्त नौवहन पर जोर दे रहे हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने जून में हुए अंतरिम समझौते की नाजुकता को उजागर कर दिया है। वैश्विक तेल कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करते हैं, लंबे समय तक अस्थिरता ऊर्जा लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव डाल सकती है।
यह संकट 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के साथ शुरू हुए युद्ध की पृष्ठभूमि में है। युद्ध के दौरान ईरान ने जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया था, जिसके बाद जून में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत यातायात फिर से शुरू हुआ, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया कि सभी पारगमन उसके साथ समन्वयित होंगे। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान लाखों लोग सड़कों पर उतरे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ नारे लगाए।
अमेरिका-ईरान वार्ता फिलहाल गतिरोध में है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा है कि जब तक धमकियां जारी रहेंगी, बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी, जबकि ट्रंप ने “काम खत्म करने” की चेतावनी दोहराई है। यूकेएमटीओ ने जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की सलाह दी है। अगले दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता की कोई तारीख तय नहीं है, और जलडमरूमध्य में तनाव बना हुआ है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
Iran launched a missile attack on commercial vessels, as confirmed by intelligence sources.
By citing anonymous US sources, the accusation is presented as fact, without giving space to the Iranian version.
Omits the neutral UKMTO account and any Iranian denial, presenting the accusation as fact.
The attack occurred, but it is unclear who is responsible; US accusations are just one hypothesis.
The UKMTO facts are reported and US accusations are added as secondary information, maintaining a detached tone.
Omits the direct source of the accusation (Axios) and does not delve into possible Iranian motivations.
The incident is an isolated event, without attribution of blame.
Only the UKMTO statement is reported, avoiding any speculation or accusation.
Completely omits the US accusations and the context of peace negotiations.
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