
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में विदेशी सैन्य उपस्थिति को चेतावनी दी, ब्रिटेन-फ्रांस का बयान खारिज
तेहरान ने कहा कि जलडमरूमध्य की सुरक्षा तटीय राज्यों की जिम्मेदारी है और कोई भी बाहरी सैन्य गतिविधि गंभीर परिणाम लाएगी।
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी विदेशी सैन्य गतिविधि के प्रति कड़ी चेतावनी जारी की। यह प्रतिक्रिया ब्रिटेन और फ्रांस के उस संयुक्त बयान पर आई जिसमें दोनों देशों ने नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन तैनात करने की तत्परता व्यक्त की थी। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि यह जलडमरूमध्य क्षेत्र से बाहर की शक्तियों के लिए सैन्य प्रदर्शन का मंच नहीं है और ईरान, एक जिम्मेदार शक्ति तथा जलडमरूमध्य की सुरक्षा का गारंटर होने के नाते, इस संवेदनशील जलमार्ग में किसी भी सैन्य गतिविधि के विरुद्ध आगाह करता है।
तेहरान का रुख स्पष्ट रूप से तटीय राज्यों की प्रधानता पर केंद्रित रहा। ग़रीबाबादी ने दोहराया कि होर्मुज की सुरक्षा केवल तटवर्ती देशों के हाथों में है और संकट उत्पन्न करने वाले अपने साहसिक कदमों के परिणामों के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। दूसरी ओर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के संयुक्त बयान में जलडमरूमध्य को वैश्विक अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धमनी बताया गया और सभी देशों के जहाजों के सुरक्षित आवागमन की बहाली को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय करार दिया गया। बयान में यह भी दावा किया गया कि ओमान ने अपने क्षेत्रीय जल को नौवहन जोखिमों से सुरक्षित करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस के साथ सहयोग करने पर सहमति दे दी है। इससे पहले सप्ताह में ईरान ने मैक्रों के उस वक्तव्य को भी खारिज कर दिया था जिसमें जलडमरूमध्य से खदानें हटाने के लिए फ्रांस, ओमान और अन्य देशों के बीच सहयोग की बात कही गई थी; तेहरान ने तब स्पष्ट किया कि यह कार्य केवल ईरान द्वारा ही किया जाएगा।
यह तनाव एक ऐसे समय में उभरा है जब ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक समझौता ज्ञापन 18 जून से प्रभावी हो चुका है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित इस दस्तावेज़ में शत्रुता की समाप्ति, प्रतिबंधों में ढील, परमाणु मुद्दे का समाधान, होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए बातचीत का ढांचा शामिल है। इसके बावजूद, ब्रिटेन और फ्रांस की घोषणा यह संकेत देती है कि पश्चिमी शक्तियाँ जलमार्ग की सुरक्षा को केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक साझा जिम्मेदारी के रूप में देखती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक रणनीतिक चोकपॉइंट है, और हाल के ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के दौरान यहाँ नौवहन में आई बाधाओं ने ईंधन की कीमतों पर तीव्र दबाव डाला था। अप्रैल में ब्रिटेन और फ्रांस ने 51 देशों के साथ एक शिखर सम्मेलन आयोजित कर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के प्रयास तेज़ किए थे। फिलहाल, समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन और प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। तेहरान तटीय नियंत्रण पर जोर दे रहा है जबकि लंदन और पेरिस अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। आगे की ठोस कूटनीतिक प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है, परंतु दोनों पक्षों के बयानों से संकेत मिलता है कि जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण बरकरार हैं।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.80 | aligned |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.60 | aligned |
We Iranians will not tolerate foreign interference in our gulf.
Repetition of the threat and personification of the state through the parliament speaker make the position indisputable.
Omits the perspective of maritime powers that prioritize freedom of navigation.
The region rejects any external military presence as destabilizing.
The call for regional solutions and the threat of revenge build a common front against interference.
Omits the concerns of Gulf Arab states about regional instability caused by Iran's posture.
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