
फीफा विश्व कप 2026: तीनों सह-मेज़बान अंतिम-16 से बाहर, 1998 के बाद कोई मेज़बान चैंपियन नहीं बन सका
अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के बाहर होते ही पहली बार तीन देशों की संयुक्त मेज़बानी वाला विश्व कप अपने मेज़बानों को क्वार्टर फ़ाइनल से पहले ही खो बैठा।
सोमवार रात सिएटल के ल्यूमन फ़ील्ड में अमेरिकी टीम बेल्जियम के हाथों 4-1 से करारी हार झेलकर बाहर हुई, और इसके साथ ही 2026 फीफा विश्व कप के तीनों सह-मेज़बान देशों का सफ़र अंतिम-16 में ही थम गया। इससे पहले कनाडा को मोरक्को ने 3-0 से हराया था, जबकि मैक्सिको ने एस्टाडियो एज़्टेका में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त संघर्ष किया, मगर 3-2 से हारकर बाहर हो गया। पहली बार तीन राष्ट्रों की संयुक्त मेज़बानी में हो रहे इस टूर्नामेंट में कोई भी मेज़बान क्वार्टर फ़ाइनल तक नहीं पहुँच सका।
अमेरिकी टीम ने ग्रुप चरण में पराग्वे और ऑस्ट्रेलिया को हराकर शानदार शुरुआत की थी, और अंतिम-32 में बोस्निया को 2-0 से हराया, लेकिन बेल्जियम के सामने उनकी रक्षापंक्ति बिखर गई। मैक्सिको ने ग्रुप में तीनों मैच जीतकर और इक्वाडोर को हराकर उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद जूड बेलिंगहम और हैरी केन के गोलों ने उन्हें रोक दिया। कनाडा ने पहली बार नॉकआउट दौर में प्रवेश किया और दक्षिण अफ़्रीका को 1-0 से हराकर इतिहास रचा, पर मोरक्को के तेज़ तर्रार खेल ने उनकी यात्रा समाप्त कर दी।
यह नतीजा विश्व कप के इतिहास में मेज़बानों के लिए एक लंबे सूखे को और बढ़ाता है। आख़िरी बार 1998 में फ़्रांस ने अपनी ज़मीन पर ख़िताब जीता था। इसके बाद 2002 में दक्षिण कोरिया चौथे स्थान पर रहा, जर्मनी 2006 में तीसरे स्थान पर, ब्राज़ील 2014 में सेमीफ़ाइनल तक पहुँचा, लेकिन कोई भी चैंपियन नहीं बन सका। 2010 में दक्षिण अफ़्रीका और 2022 में क़तर तो ग्रुप चरण से ही बाहर हो गए थे। 48 टीमों के विस्तारित प्रारूप के बावजूद, तीनों उत्तर अमेरिकी मेज़बानों का प्रदर्शन इस 'अभिशाप' को तोड़ने में नाकाफ़ी रहा।
अब क्वार्टर फ़ाइनल की तस्वीर लगभग पूरी हो चुकी है, जिसमें यूरोपीय टीमों का दबदबा है—स्पेन, फ़्रांस, इंग्लैंड, बेल्जियम और नॉर्वे सभी अंतिम-8 में हैं। अफ़्रीका से मोरक्को ने एक बार फिर सबको चौंकाया है। दक्षिण अमेरिका की उम्मीदें अब अर्जेंटीना और कोलंबिया पर टिकी हैं, जो मंगलवार को क्रमशः मिस्र और स्विट्ज़रलैंड से भिड़ेंगे। इस बीच, पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो और ब्राज़ील के नेमार अपने आख़िरी विश्व कप में निराशाजनक विदाई ले चुके हैं।
एशियाई टीमों के लिए भी यह टूर्नामेंट निराशाजनक रहा। जापान और दक्षिण कोरिया, जो 2002 में सह-मेज़बान थे, इस बार क्रमशः अंतिम-16 और ग्रुप चरण में बाहर हो गए। ईरान, जिसने बेल्जियम के साथ गोलरहित ड्रॉ खेला था, भी ग्रुप से आगे नहीं बढ़ सका। भारतीय उपमहाद्वीप की कोई टीम इस विश्व कप में नहीं थी, लेकिन 48 टीमों के प्रारूप ने भविष्य में एशियाई फ़ुटबॉल के लिए अवसरों की चर्चा तेज़ कर दी है। फ़िलहाल, मेज़बानों का सूखा जारी है और नज़रें 19 जुलाई को होने वाले फ़ाइनल पर टिकी हैं, जहाँ कोई ग़ैर-मेज़बान ही ट्रॉफ़ी उठाएगा।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
|---|---|---|
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.10 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
We in Latin America note with bitterness the failure of the three hosts, but place our hopes on Argentina and Colombia to defend the honor of South American football.
The contrast between the host nations' failure and the salvific mission of the South American teams, using the concept of 'honor', makes the narrative emotionally engaging and partisan.
It omits the success of Morocco, an African team, and the refereeing or disciplinary controversies involving the United States.
We Africans celebrate Morocco's victory over Canada, a demonstration of African football's strength, while noting the elimination of the other hosts.
It emphasizes Morocco's role as an African representative that overcame a host nation, creating a sense of continental pride through details of goals and performance.
It omits the historical perspective of eliminated hosts and South American hopes, focusing solely on Morocco's performance.
We in the Atlantic press record the elimination of the three hosts and update the tournament picture, without taking sides.
It adopts a detached, informative tone, presenting facts in chronological order and including controversial details (Balogun) without judgment, to maintain credibility as a neutral source.
It does not provide historical context about the host curse nor emphasize any regional success, limiting itself to essential reporting.
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